पटना में 7 सूत्री मांगों पर अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन:समायोजन से लेकर 65 साल तक सेवा नियमित करने की मांग, कहा- 6-7 साल से सेवा दे रहे

पटना में 7 सूत्री मांगों पर अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन:समायोजन से लेकर 65 साल तक सेवा नियमित करने की मांग, कहा- 6-7 साल से सेवा दे रहे

पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ धरना पर बैठे हैं। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए हजारों अतिथि प्राध्यापकों ने एकजुट होकर अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से विश्वविद्यालयों में लगातार पढ़ा रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब भी उनकी सेवा अस्थायी बनी हुई है। हर साल 11 महीने के बाद सेवा नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे असुरक्षा की भावना बनी रहती है। संघ ने मांग की कि इस बाध्यता को समाप्त कर सेवा को 65 वर्ष की आयु तक नियमित या समायोजित किया जाए। अतिथि शिक्षकों की सात सूत्री मांगें इस प्रकार हैं: 1.बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के अनुसार राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत पुराने व नए अतिथि शिक्षकों की सेवा 65 साल की आयु तक नियमित/समायोजित की जाए। 2.हर वर्ष 11 महीने के बाद सेवा नवीनीकरण की बाध्यता समाप्त की जाए। 3.हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बिहार में भी वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित की जाए। 4.विभिन्न विश्वविद्यालयों से हटाए गए अतिथि शिक्षकों की पुनर्बहाली करते हुए उनकी सेवा का समायोजन किया जाए। 5.स्थायी शिक्षकों की तरह अतिथि शिक्षकों को भी समान सुविधाएं प्रदान की जाएं। 6.विश्वविद्यालयों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों पर पहले से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा समायोजित की जाए और उसके बाद शेष रिक्त पदों पर नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए। 7.2012 के रेशनलाइजेशन के बाद छात्रों की बढ़ती संख्या और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखते हुए नए पदों का सृजन कर अतिथि शिक्षकों की सेवा समायोजित की जाए। सरकार से शिक्षा समिति के अनुसार लागू करने की अपील इस दौरान विधान परिषद सदस्य डॉ वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि अतिथि प्राध्यापकों की मांग पूरी तरह जायज है। पिछले छह-सात सालों से ये शिक्षक पूरी निष्ठा के साथ छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। सरकार यदि प्रखंड स्तर पर नए कॉलेज खोल रही है तो शिक्षकों की आवश्यकता भी होगी, ऐसे में इन्हीं शिक्षकों की सेवा समायोजित कर उनका अनुभव उपयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से शिक्षा समिति की अनुशंसा लागू करने की अपील की। विधानसभा सदस्य गौतम कृष्ण ने भी शिक्षकों के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि सात-आठ वर्षों से अध्यापन कर रहे शिक्षकों के प्रति सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता होते हैं। यदि उनके साथ संवेदनहीनता बरती गई तो इसका असर शिक्षा और समाज दोनों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी नियमों और आरक्षण प्रावधानों के तहत नियुक्त इन शिक्षकों की सेवा का समायोजन न्यायसंगत कदम होगा। इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी और कहा कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आज बिहार राज्य विश्वविद्यालय अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ धरना पर बैठे हैं। राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए हजारों अतिथि प्राध्यापकों ने एकजुट होकर अपनी सात सूत्री मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले कई सालों से विश्वविद्यालयों में लगातार पढ़ा रहे हैं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब भी उनकी सेवा अस्थायी बनी हुई है। हर साल 11 महीने के बाद सेवा नवीनीकरण की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे असुरक्षा की भावना बनी रहती है। संघ ने मांग की कि इस बाध्यता को समाप्त कर सेवा को 65 वर्ष की आयु तक नियमित या समायोजित किया जाए। अतिथि शिक्षकों की सात सूत्री मांगें इस प्रकार हैं: 1.बिहार विधान परिषद की शिक्षा समिति की अनुशंसा के अनुसार राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों में वर्षों से कार्यरत पुराने व नए अतिथि शिक्षकों की सेवा 65 साल की आयु तक नियमित/समायोजित की जाए। 2.हर वर्ष 11 महीने के बाद सेवा नवीनीकरण की बाध्यता समाप्त की जाए। 3.हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और पश्चिम बंगाल की तर्ज पर बिहार में भी वर्षों से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा नियमित की जाए। 4.विभिन्न विश्वविद्यालयों से हटाए गए अतिथि शिक्षकों की पुनर्बहाली करते हुए उनकी सेवा का समायोजन किया जाए। 5.स्थायी शिक्षकों की तरह अतिथि शिक्षकों को भी समान सुविधाएं प्रदान की जाएं। 6.विश्वविद्यालयों के स्वीकृत एवं रिक्त पदों पर पहले से कार्यरत अतिथि शिक्षकों की सेवा समायोजित की जाए और उसके बाद शेष रिक्त पदों पर नई नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए। 7.2012 के रेशनलाइजेशन के बाद छात्रों की बढ़ती संख्या और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत छात्र-शिक्षक अनुपात को ध्यान में रखते हुए नए पदों का सृजन कर अतिथि शिक्षकों की सेवा समायोजित की जाए। सरकार से शिक्षा समिति के अनुसार लागू करने की अपील इस दौरान विधान परिषद सदस्य डॉ वीरेंद्र नारायण यादव ने कहा कि अतिथि प्राध्यापकों की मांग पूरी तरह जायज है। पिछले छह-सात सालों से ये शिक्षक पूरी निष्ठा के साथ छात्रों को शिक्षा दे रहे हैं। सरकार यदि प्रखंड स्तर पर नए कॉलेज खोल रही है तो शिक्षकों की आवश्यकता भी होगी, ऐसे में इन्हीं शिक्षकों की सेवा समायोजित कर उनका अनुभव उपयोग में लाया जा सकता है। उन्होंने सरकार से शिक्षा समिति की अनुशंसा लागू करने की अपील की। विधानसभा सदस्य गौतम कृष्ण ने भी शिक्षकों के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि सात-आठ वर्षों से अध्यापन कर रहे शिक्षकों के प्रति सरकार को संवेदनशील रुख अपनाना चाहिए। शिक्षक समाज और राष्ट्र के निर्माता होते हैं। यदि उनके साथ संवेदनहीनता बरती गई तो इसका असर शिक्षा और समाज दोनों पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यूजीसी नियमों और आरक्षण प्रावधानों के तहत नियुक्त इन शिक्षकों की सेवा का समायोजन न्यायसंगत कदम होगा। इस दौरान विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी और कहा कि यदि सरकार शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लेती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।  

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