अरवल जिले के अहियापुर में भूदान की जमीन पर बालू खनन और फसलों को नष्ट किए जाने के विरोध में सैकड़ों किसानों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। करीब 182 परिवारों के किसानों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं और बालू माफिया व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि उनकी आजीविका से जुड़ी लगभग 150 एकड़ भूदान भूमि पर वर्षों से खेती की जा रही थी, जिस पर फलदार पेड़ भी लगे थे। बालू माफिया और प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर बुलडोजर चलाकर इस जमीन को 10 से 12 फीट तक खोद दिया गया, जिससे खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई। इस कार्रवाई में 1000 से अधिक फलदार पेड़ों सहित कुल 4 से 5 हजार छोटे-बड़े पेड़ उखाड़ दिए गए। आलू, प्याज, लहसुन, सरसों और अन्य सब्जियों की फसलें भी नष्ट हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि खनन विभाग ने बिना उचित जांच के खेती योग्य जमीन को बालू खनन के लिए छोड़ दिया। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार बालू निकालने के लिए इतनी गहरी खुदाई नहीं की जा सकती, लेकिन यहां 10 से 12 फीट तक गड्ढे खोद दिए गए हैं, जिससे जमीन के बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है। इस मौके पर भाकपा माले के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने किसानों के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि गरीब किसानों की जमीन और उनकी आजीविका पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन बालू माफिया के दबाव में काम कर रहा है और किसानों को न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी को चार सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें बालू माफिया और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई, किसानों को उचित मुआवजा देने और अनियंत्रित बालू खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांगें प्रमुख थीं। अरवल जिले के अहियापुर में भूदान की जमीन पर बालू खनन और फसलों को नष्ट किए जाने के विरोध में सैकड़ों किसानों ने जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया। करीब 182 परिवारों के किसानों ने जिलाधिकारी के समक्ष अपनी शिकायतें रखीं और बालू माफिया व प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि उनकी आजीविका से जुड़ी लगभग 150 एकड़ भूदान भूमि पर वर्षों से खेती की जा रही थी, जिस पर फलदार पेड़ भी लगे थे। बालू माफिया और प्रशासनिक कार्रवाई के नाम पर बुलडोजर चलाकर इस जमीन को 10 से 12 फीट तक खोद दिया गया, जिससे खेती पूरी तरह बर्बाद हो गई। इस कार्रवाई में 1000 से अधिक फलदार पेड़ों सहित कुल 4 से 5 हजार छोटे-बड़े पेड़ उखाड़ दिए गए। आलू, प्याज, लहसुन, सरसों और अन्य सब्जियों की फसलें भी नष्ट हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। प्रदर्शनकारी किसानों ने आरोप लगाया कि खनन विभाग ने बिना उचित जांच के खेती योग्य जमीन को बालू खनन के लिए छोड़ दिया। उनका कहना है कि नियमों के अनुसार बालू निकालने के लिए इतनी गहरी खुदाई नहीं की जा सकती, लेकिन यहां 10 से 12 फीट तक गड्ढे खोद दिए गए हैं, जिससे जमीन के बंजर होने का खतरा पैदा हो गया है। इस मौके पर भाकपा माले के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने किसानों के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने कहा कि गरीब किसानों की जमीन और उनकी आजीविका पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सिंह ने आरोप लगाया कि प्रशासन बालू माफिया के दबाव में काम कर रहा है और किसानों को न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी। प्रदर्शन के बाद किसानों ने जिलाधिकारी को चार सूत्री मांग पत्र सौंपा। इसमें बालू माफिया और इसमें संलिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई, किसानों को उचित मुआवजा देने और अनियंत्रित बालू खनन पर तत्काल रोक लगाने की मांगें प्रमुख थीं।


