बक्सर में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में प्रदर्शन:ओबीसी, एससी-एसटी समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे

बक्सर में यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन 2026 के समर्थन में प्रदर्शन:ओबीसी, एससी-एसटी समुदाय के लोग सड़कों पर उतरे

बक्सर में गुरुवार को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी ‘इक्विटी रेगुलेशन, 2026’ के समर्थन में एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। इसमें ओबीसी, एससी और एसटी समाज के हजारों युवा, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। किला मैदान से शुरू मार्च आंबेडकर चौक पहुंचा यह मार्च शहर के किला मैदान से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए आंबेडकर चौक पहुंचा। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। वे यूजीसी से इक्विटी नियमों को पुनः बहाल करने और सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे थे। मार्च का समापन आंबेडकर चौक पर एक नुक्कड़ सभा के साथ हुआ। सभा को संबोधित करते हुए डुमरांव के पूर्व विधायक और इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि इक्विटी रेगुलेशन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने जोर दिया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमा दिलाने के लिए ये नियम अत्यंत आवश्यक हैं। 2019 से 2024 के बीच जाति आधारित उत्पीड़न बढ़ा डॉ. सिंह ने बताया कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच जाति आधारित उत्पीड़न की शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ये मामले दर्शाते हैं कि पूर्व के दिशा-निर्देश प्रभावी नहीं रहे हैं। किसान नेता रामप्रवेश यादव ने जाति गणना (2022-23) का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और पिछड़े वर्गों की शिक्षा व राजनीति में भागीदारी अभी भी बहुत कम है। उन्होंने नए नियमों में ओबीसी छात्रों को भी इक्विटी संरक्षण में शामिल करने को एक ऐतिहासिक कदम बताया। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि “मेरिट के खतरे” का तर्क देकर इन नियमों का विरोध करना दरअसल विशेषाधिकारों को बचाने का प्रयास है। अंत में, सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में मांग की कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था वास्तव में न्यायपूर्ण और समावेशी बन सके। बक्सर में गुरुवार को उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता और गैर-भेदभाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी ‘इक्विटी रेगुलेशन, 2026’ के समर्थन में एक विशाल आक्रोश मार्च निकाला गया। इसमें ओबीसी, एससी और एसटी समाज के हजारों युवा, छात्र, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। किला मैदान से शुरू मार्च आंबेडकर चौक पहुंचा यह मार्च शहर के किला मैदान से शुरू होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए आंबेडकर चौक पहुंचा। इस दौरान प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर नारेबाजी की। वे यूजीसी से इक्विटी नियमों को पुनः बहाल करने और सख्ती से लागू करने की मांग कर रहे थे। मार्च का समापन आंबेडकर चौक पर एक नुक्कड़ सभा के साथ हुआ। सभा को संबोधित करते हुए डुमरांव के पूर्व विधायक और इंकलाबी नौजवान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि इक्विटी रेगुलेशन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग, जन्म-स्थान और दिव्यांगता के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त करना है। उन्होंने जोर दिया कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और दिव्यांगजनों को समान अवसर और गरिमा दिलाने के लिए ये नियम अत्यंत आवश्यक हैं। 2019 से 2024 के बीच जाति आधारित उत्पीड़न बढ़ा डॉ. सिंह ने बताया कि यूजीसी के आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच जाति आधारित उत्पीड़न की शिकायतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने रोहित वेमुला, पायल तडवी और दर्शन सोलंकी जैसी घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि ये मामले दर्शाते हैं कि पूर्व के दिशा-निर्देश प्रभावी नहीं रहे हैं। किसान नेता रामप्रवेश यादव ने जाति गणना (2022-23) का उल्लेख करते हुए कहा कि दलितों और पिछड़े वर्गों की शिक्षा व राजनीति में भागीदारी अभी भी बहुत कम है। उन्होंने नए नियमों में ओबीसी छात्रों को भी इक्विटी संरक्षण में शामिल करने को एक ऐतिहासिक कदम बताया। वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि “मेरिट के खतरे” का तर्क देकर इन नियमों का विरोध करना दरअसल विशेषाधिकारों को बचाने का प्रयास है। अंत में, सभी प्रतिभागियों ने एक स्वर में मांग की कि यूजीसी इक्विटी रेगुलेशन, 2026 को पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ देशभर के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था वास्तव में न्यायपूर्ण और समावेशी बन सके।  

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