सतना में TET के विरोध में इच्छामृत्यु मांगी:कलेक्ट्रेट पहुंचकर बोले- 20–25 साल सेवा के बाद परीक्षा अनिवार्य करना अनुचित

सतना में TET के विरोध में इच्छामृत्यु मांगी:कलेक्ट्रेट पहुंचकर बोले- 20–25 साल सेवा के बाद परीक्षा अनिवार्य करना अनुचित

सतना में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट की मांग को लेकर सतना में शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन सामने आया है। शुक्रवार शाम सैकड़ों शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति के नाम एडीएम को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग की गई है। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति देने की चेतावनी भी दी गई है। शिक्षकों ने बताया कि लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा 2 मार्च 2026 को जारी पत्र के आधार पर यह प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी पात्रता परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लागू की जा रही प्रक्रिया शिक्षकों के अनुसार यह व्यवस्था सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय के बाद लागू की जा रही है। आदेश में कहा गया है कि यदि शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करते हैं तो उन्हें अयोग्य मानते हुए सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा सकती है। ज्ञापन में कहा गया है कि प्रदेश में हजारों शिक्षक ऐसे हैं जो पिछले 20 से 25 वर्षों से निष्कलंक सेवा दे रहे हैं। सेवा के अंतिम वर्षों में पात्रता परीक्षा अनिवार्य किए जाने से उनमें मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति बन गई है। शिक्षकों का कहना है कि इतने वर्षों की सेवा के बाद नौकरी समाप्त होने का खतरा उनके सम्मान और भविष्य दोनों के लिए गंभीर संकट खड़ा कर सकता है। सरकार से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की मांग शिक्षकों ने सरकार से अपील की है कि वह सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रखते हुए इस निर्णय पर पुनर्विचार कराए। साथ ही राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त सभी शिक्षकों को पात्रता परीक्षा से छूट दी जाए। शिक्षकों का तर्क है कि उनकी नियुक्ति उस समय के नियमों के अनुसार हुई थी, इसलिए बाद में लागू प्रावधानों के आधार पर उनकी सेवा पर सवाल उठाना उचित नहीं है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि यदि उन्हें टीईटी से मुक्त नहीं किया गया तो उन्हें सामूहिक इच्छामृत्यु की अनुमति दी जाए।

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