एसएटीआई कॉलेज में 39 करोड़ के ग्रांट रोकने की मांग:भोपाल में RTI एक्टिविस्ट ने सूचियों में गड़बड़ी के लगाए आरोप, पदों को लेकर भी उठे सवाल

एसएटीआई कॉलेज में 39 करोड़ के ग्रांट रोकने की मांग:भोपाल में RTI एक्टिविस्ट ने सूचियों में गड़बड़ी के लगाए आरोप, पदों को लेकर भी उठे सवाल

विदिशा के एसएटीआई इंजीनियरिंग कॉलेज में ग्रांट और एरियर्स भुगतान को लेकर विवाद सामने आया है। आरटीआई एक्टिविस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता चेतन सिंह राजपूत ने वित्त विभाग को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि करीब 39 करोड़ रुपए के इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई। अपात्र लोगों को लाभ देने और पात्र कर्मचारियों को बाहर रखने की कोशिश की गई है। शिकायत में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं और लोकधन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है। साथ ही जांच पूरी होने तक भुगतान रोकने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की गई है, जिससे पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। सूची में पात्रता की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं सोमवार को राजधानी के एमपी नगर के पास मौजूद एक रेस्टोरेंट में प्रेसवार्ता के दौरान चेतन सिंह ने कहा कि कॉलेज द्वारा तैयार की गई ग्रांट और एरियर्स की सूची में पात्रता तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। आरोप है कि कई ऐसे लोगों के नाम शामिल कर दिए गए, जो नियमों के अनुसार पात्र नहीं थे। वहीं, कई पात्र कर्मचारियों को सूची से बाहर रखा गया। इससे चयन प्रक्रिया पर पक्षपात और मनमानी के आरोप लगे हैं। इस मामले में डॉ. वाईके जैन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। ऐसे में अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है। नियमों के खिलाफ एरियर्स का लाभ देने का आरोप आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया है कि कुछ कर्मचारियों को नियमों के विरुद्ध एरियर्स का लाभ दिया जा रहा है। उदाहरण के तौर पर, जिनकी सेवा अवधि कम थी या जो तय तारीख के बाद नियुक्त हुए, उन्हें भी लाभ देने की बात सामने आई है। वहीं कई पात्र कर्मचारियों के एरियर्स तैयार ही नहीं किए गए, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं। शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि प्रबंधन समिति द्वारा स्वीकृत पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को शासन द्वारा स्वीकृत पदों पर कार्यरत दिखाकर अनुदान लेने का प्रयास किया गया। इसे भ्रामक जानकारी देकर आर्थिक लाभ लेने की कोशिश बताया गया है। मामले में कॉलेज के संचालक डॉ. वाईके जैन और उनके सहयोगियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा है कि उन्हें पहले सेवा से अलग किया गया था, लेकिन बाद में दोबारा नियुक्त कर दिया गया। आरोप है कि एरियर्स की गणना में उस अवधि का वेतन भी जोड़ दिया गया, जब वे सेवा में नहीं थे। इसे हितों के टकराव और नियमों के उल्लंघन का मामला बताया गया है। जांच तक भुगतान रोकने की मांग शिकायतकर्ता ने वित्त विभाग से मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक ग्रांट और एरियर्स का भुगतान रोक दिया जाए, ताकि किसी भी तरह के वित्तीय नुकसान से बचा जा सके। अन्य कर्मचारियों ने भी जताई चिंता बताया गया है कि इस मामले को लेकर कई सेवानिवृत्त और वर्तमान कर्मचारी भी अपनी शिकायतें दर्ज करा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता हो सकती है। प्रशासन से पारदर्शिता की मांग शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि पूरे मामले में पारदर्शिता जरूरी है और आरटीआई के तहत सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं।

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