सहजानंद सरस्वती को भारत रत्न देने की मांग:पटना में भाजपा ने मनाई जयंती, कहा- वो युग पुरुष हैं, आज राष्ट्रीय किसान दिवस घोषित करना चाहिए

सहजानंद सरस्वती को भारत रत्न देने की मांग:पटना में भाजपा ने मनाई जयंती, कहा- वो युग पुरुष हैं, आज राष्ट्रीय किसान दिवस घोषित करना चाहिए

स्वामी सहजानंद किसान वाहिनी की ओर से रवींद्र रंजन की अध्यक्षता में पटना के बीआईए सभागार में महान किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती समारोह मनाई गई। इस दौरान बिहार भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री भिखूभाई दालसानिया ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रासंगिकता कल भी थी, आज भी है और रहेगी भी। सहजानंद ने पहली बार किसानों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने का कार्य किया था। उनके कार्यों का ही नतीजा था कि किसान भारतीय राजनीति की मुख्य धारा से जुड़ पाए। सहजानंद के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में किसानों ने भाग लिया जिससे स्वतंत्रता आंदोलन की धारा व्यापक हुई। उनके कार्यों की वजह से ही देश भर से जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और देश भर कि किसान अपने खेतों के मालिक बहाल हो पाए। आजीवन गरीबों, दलितों और किसानों की लड़ाई लड़ी भीखूभाई दलसानिया ने यह भी कहा कि सहजानंद को न सिर्फ उनके किसान आंदोलन के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उनके धार्मिक सुधार और सामाजिक न्याय का उल्लेख भी प्रासंगिक बना रहेगा। सहजानंद ने आजीवन गरीबों, दलितों और किसानों की लड़ाई लड़ी। सहजानंद की कार्यशैली से आज के राजनेताओं को प्रेरणा लेना चाहिए। सहजानंद त्याग के प्रतीक पुरुष थे। वहीं समारोह के अध्यक्षीय भाषण के दौरान स्वामी सहजानंद किसान वाहिनी के अध्यक्ष व भाजपा नेता रवींद्र रंजन ने कहा कि स्वामी जी एक ऐसे युग पुरुष हैं, जो ऐतिहासिक अंधकार में हैं जबकि उनकी बातें आज भी व्यावहारिक रूप से लागू होती है। सहजानंद सरस्वती को भारत रत्न देने की मांग अपनी पुरानी मांग को दुहराते हुए सहजानंद के जन्मोत्सव या पुण्यतिथि के अवसर में से किसी एक तारीख को राष्ट्रीय किसान दिवस के तौर घोषित करने तथा सहजानंद को भारत रत्न देने कि मांग की। साथ ही सहजानंद के विचारों को पाठय पुस्तक में शामिल करने और उनके उनके नाम कृषि विश्वविद्यालय खोलने की मांग भी सरकार से की। किसान निधि को बढ़ाने की मांग सरकार से की। समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा एक साजिश की तहत भारत के महापुरुषों को हमारे स्मरण से मिटाने की कोशिश वर्षों से ही रही थी, जिसका नतीजा है कि लोग देश की अधिकांश आबादी सहजानंद जैसे नाम से परिचित नहीं है। जबकि सहजानंद का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान गांधी, तिलक, बोस के बराबरी का है, लेकिन अब सहजानंद पर बहुत कार्य हो रहा है। सहजानंद के योगदान का बखान सराहनीय है। समारोह के मुख्य वक्ता वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सहजानंद ने भारत के सामाजिक एकीकरण का कार्य किया। उनके प्रयास से ऊंच नीच का भेदभाव मिटा। सहजानंद ने भेदभाव को खत्म करने के लिए अपनी ही जाति के ऊंचे लोगों से भी संघर्ष किया। आज के समय में भी सहजानंद के विचार बहुत प्रासंगिक हैं और समाज को उसकी जरूरत है। सहजानंद के बताए आचरण को अपने जीवन में उतरने की जरूरत है। समारोह को वीरेंद्र यादव, कौशलेंद्र सुमन, अंकित गांधी, रीता शर्मा, उपेंद्र सिंह, कंचन कुमारी, पूजा ऋतुराज व अन्य गणमान्य लोगों ने संबोधित किया। स्वामी सहजानंद किसान वाहिनी की ओर से रवींद्र रंजन की अध्यक्षता में पटना के बीआईए सभागार में महान किसान नेता स्वामी सहजानंद सरस्वती की जयंती समारोह मनाई गई। इस दौरान बिहार भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री भिखूभाई दालसानिया ने कहा कि स्वामी सहजानंद सरस्वती की प्रासंगिकता कल भी थी, आज भी है और रहेगी भी। सहजानंद ने पहली बार किसानों को राष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने का कार्य किया था। उनके कार्यों का ही नतीजा था कि किसान भारतीय राजनीति की मुख्य धारा से जुड़ पाए। सहजानंद के आह्वान पर स्वतंत्रता आंदोलन में किसानों ने भाग लिया जिससे स्वतंत्रता आंदोलन की धारा व्यापक हुई। उनके कार्यों की वजह से ही देश भर से जमींदारी प्रथा का उन्मूलन हुआ और देश भर कि किसान अपने खेतों के मालिक बहाल हो पाए। आजीवन गरीबों, दलितों और किसानों की लड़ाई लड़ी भीखूभाई दलसानिया ने यह भी कहा कि सहजानंद को न सिर्फ उनके किसान आंदोलन के लिए याद किया जाएगा, बल्कि उनके धार्मिक सुधार और सामाजिक न्याय का उल्लेख भी प्रासंगिक बना रहेगा। सहजानंद ने आजीवन गरीबों, दलितों और किसानों की लड़ाई लड़ी। सहजानंद की कार्यशैली से आज के राजनेताओं को प्रेरणा लेना चाहिए। सहजानंद त्याग के प्रतीक पुरुष थे। वहीं समारोह के अध्यक्षीय भाषण के दौरान स्वामी सहजानंद किसान वाहिनी के अध्यक्ष व भाजपा नेता रवींद्र रंजन ने कहा कि स्वामी जी एक ऐसे युग पुरुष हैं, जो ऐतिहासिक अंधकार में हैं जबकि उनकी बातें आज भी व्यावहारिक रूप से लागू होती है। सहजानंद सरस्वती को भारत रत्न देने की मांग अपनी पुरानी मांग को दुहराते हुए सहजानंद के जन्मोत्सव या पुण्यतिथि के अवसर में से किसी एक तारीख को राष्ट्रीय किसान दिवस के तौर घोषित करने तथा सहजानंद को भारत रत्न देने कि मांग की। साथ ही सहजानंद के विचारों को पाठय पुस्तक में शामिल करने और उनके उनके नाम कृषि विश्वविद्यालय खोलने की मांग भी सरकार से की। किसान निधि को बढ़ाने की मांग सरकार से की। समारोह के मुख्य अतिथि पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा एक साजिश की तहत भारत के महापुरुषों को हमारे स्मरण से मिटाने की कोशिश वर्षों से ही रही थी, जिसका नतीजा है कि लोग देश की अधिकांश आबादी सहजानंद जैसे नाम से परिचित नहीं है। जबकि सहजानंद का राष्ट्रीय आंदोलन में योगदान गांधी, तिलक, बोस के बराबरी का है, लेकिन अब सहजानंद पर बहुत कार्य हो रहा है। सहजानंद के योगदान का बखान सराहनीय है। समारोह के मुख्य वक्ता वन एवं पर्यावरण मंत्री ने कहा कि सहजानंद ने भारत के सामाजिक एकीकरण का कार्य किया। उनके प्रयास से ऊंच नीच का भेदभाव मिटा। सहजानंद ने भेदभाव को खत्म करने के लिए अपनी ही जाति के ऊंचे लोगों से भी संघर्ष किया। आज के समय में भी सहजानंद के विचार बहुत प्रासंगिक हैं और समाज को उसकी जरूरत है। सहजानंद के बताए आचरण को अपने जीवन में उतरने की जरूरत है। समारोह को वीरेंद्र यादव, कौशलेंद्र सुमन, अंकित गांधी, रीता शर्मा, उपेंद्र सिंह, कंचन कुमारी, पूजा ऋतुराज व अन्य गणमान्य लोगों ने संबोधित किया।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *