बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग की जा रही है। इसको लेकर कला संस्कृति मंच, भाजपा की ओर से नाम परिवर्तन संदेश यात्रा चलाया जा रहा है। ये गुरुवार को राजगीर पहुंचा। यहां मंच के सदस्यों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों से इस मुहिम में समर्थन मांगा। अभियान का नेतृत्व कर रहे मंच के संयोजक अजय कुमार सिंह ने कहा कि बख्तियार खिलजी ने पुराना नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर खंडहर में तब्दील कर दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी उसी के नाम पर जंक्शन का नाम है। मगध द्वार जंक्शन हो नया नाम संयोजक अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र मगध का केंद्र रहा है और राजगीर कभी भारत की राजधानी थी। किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर विवाद हो सकता है, लेकिन क्षेत्र के नाम पर नहीं। इसलिए संगठन ने बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलकर ‘मगध द्वार जंक्शन’ करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर की गई थी। साल 2026 में स्वामी विवेकानंद और सर गणेश दत्त की जयंती पर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। कलंक का टीका है यह नाम अभियान के सह संयोजक ऋतुराज कुमार ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम माथे पर कलंक के टीके जैसा है। 13वीं शताब्दी में जिसने विध्वंस किया, उसका नाम आज तक चल रहा है। जैसे इलाहाबाद का प्रयागराज और मुगलसराय का नाम बदला गया, वैसे ही इसका नाम भी बदलना चाहिए ताकि पर्यटकों को अच्छा संदेश जाए। ज्ञापन सौंपने की तैयारी पूर्व लोकसभा प्रत्याशी चंद्रकांता सिन्हा ने भी इस मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान नाम नालंदा की धरती के लिए शर्मनाक है। संगठन का लक्ष्य है कि हर प्रखंड और गांव में जाकर जन-जागरूकता फैलाई जाए। जल्द ही इस संबंध में बिहार सरकार और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन को उम्मीद है कि साल 2026-27 तक स्टेशन का नाम बदलने में सफलता मिल जाएगी। बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलने की मांग की जा रही है। इसको लेकर कला संस्कृति मंच, भाजपा की ओर से नाम परिवर्तन संदेश यात्रा चलाया जा रहा है। ये गुरुवार को राजगीर पहुंचा। यहां मंच के सदस्यों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर लोगों से इस मुहिम में समर्थन मांगा। अभियान का नेतृत्व कर रहे मंच के संयोजक अजय कुमार सिंह ने कहा कि बख्तियार खिलजी ने पुराना नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर खंडहर में तब्दील कर दिया था, लेकिन दुर्भाग्यवश आज भी उसी के नाम पर जंक्शन का नाम है। मगध द्वार जंक्शन हो नया नाम संयोजक अजय कुमार सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र मगध का केंद्र रहा है और राजगीर कभी भारत की राजधानी थी। किसी व्यक्ति विशेष के नाम पर विवाद हो सकता है, लेकिन क्षेत्र के नाम पर नहीं। इसलिए संगठन ने बख्तियारपुर जंक्शन का नाम बदलकर ‘मगध द्वार जंक्शन’ करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इस अभियान की शुरुआत 25 दिसंबर को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पंडित मदन मोहन मालवीय की जयंती पर की गई थी। साल 2026 में स्वामी विवेकानंद और सर गणेश दत्त की जयंती पर हस्ताक्षर अभियान शुरू किया गया है। कलंक का टीका है यह नाम अभियान के सह संयोजक ऋतुराज कुमार ने कहा कि बख्तियारपुर का नाम माथे पर कलंक के टीके जैसा है। 13वीं शताब्दी में जिसने विध्वंस किया, उसका नाम आज तक चल रहा है। जैसे इलाहाबाद का प्रयागराज और मुगलसराय का नाम बदला गया, वैसे ही इसका नाम भी बदलना चाहिए ताकि पर्यटकों को अच्छा संदेश जाए। ज्ञापन सौंपने की तैयारी पूर्व लोकसभा प्रत्याशी चंद्रकांता सिन्हा ने भी इस मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि वर्तमान नाम नालंदा की धरती के लिए शर्मनाक है। संगठन का लक्ष्य है कि हर प्रखंड और गांव में जाकर जन-जागरूकता फैलाई जाए। जल्द ही इस संबंध में बिहार सरकार और केंद्र सरकार को ज्ञापन सौंपा जाएगा। संगठन को उम्मीद है कि साल 2026-27 तक स्टेशन का नाम बदलने में सफलता मिल जाएगी।


