पटना स्थित बिहार विधानसभा के सभागार में आज छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती सह प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सक डॉ. एस. एन. आर्या, समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर पटेल, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी ई. सतीश पटेल, आईएएस अधिकारी श्रीकांत शास्त्री (जिलाधिकारी, बेगूसराय), आईआरटीएस अधिकारी शिव कुमार प्रसाद, आईएएस अधिकारी सी. जे. पटेल और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरविंद कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित रहे। नाटकीय प्रस्तुति ने जीवंत किया शिवाजी महाराज का पराक्रम कार्यक्रम के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, उनके संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति पर आधारित एक नाटकीय प्रस्तुति भी दी गई। कलाकारों ने शिवाजी महाराज के पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और उनकी रणनीतिक कुशलता को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज ने “हिन्दवी स्वराज” की स्थापना कर भारतीय इतिहास में स्वाभिमान और स्वतंत्रता का नया अध्याय लिखा। उन्होंने अपनी अद्भुत युद्धनीति, विशेषकर गोरिल्ला युद्धकला के माध्यम से शक्तिशाली आक्रमणकारियों को चुनौती दी और अपने राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन संदेश देता है कि व्यक्ति को हमेशा आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए—“अपना सिर कभी मत झुकाओ, हमेशा ऊँचा रखो।” विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मिला सम्मान इस अवसर पर समाज, शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को सम्मानित करना ही इस समारोह का मुख्य उद्देश्य है, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर समाज सेवा के कार्यों में आगे आएं। समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर पटेल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा और शासक ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय अस्मिता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी युवाओं को देश और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा देते हैं। बिहार के 38 जिलों में प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा गया। इसमें कहा गया कि बिहार के सभी 38 जिलों के प्रमुख चौक-चौराहों पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। इसके अलावा पटना के मरीन ड्राइव क्षेत्र में शिवाजी महाराज की 100 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी सरकार से की गई। पटना स्थित बिहार विधानसभा के सभागार में आज छत्रपति शिवाजी महाराज की 396वीं जयंती सह प्रतिभा सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों से लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर पद्मश्री से सम्मानित चिकित्सक डॉ. एस. एन. आर्या, समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर पटेल, ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी ई. सतीश पटेल, आईएएस अधिकारी श्रीकांत शास्त्री (जिलाधिकारी, बेगूसराय), आईआरटीएस अधिकारी शिव कुमार प्रसाद, आईएएस अधिकारी सी. जे. पटेल और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अरविंद कुमार सहित कई गणमान्य अतिथि मंच पर उपस्थित रहे। नाटकीय प्रस्तुति ने जीवंत किया शिवाजी महाराज का पराक्रम कार्यक्रम के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, उनके संघर्ष, साहस और राष्ट्रभक्ति पर आधारित एक नाटकीय प्रस्तुति भी दी गई। कलाकारों ने शिवाजी महाराज के पराक्रम, नेतृत्व क्षमता और उनकी रणनीतिक कुशलता को मंच पर जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज ने “हिन्दवी स्वराज” की स्थापना कर भारतीय इतिहास में स्वाभिमान और स्वतंत्रता का नया अध्याय लिखा। उन्होंने अपनी अद्भुत युद्धनीति, विशेषकर गोरिल्ला युद्धकला के माध्यम से शक्तिशाली आक्रमणकारियों को चुनौती दी और अपने राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की। वक्ताओं ने कहा कि शिवाजी महाराज का जीवन संदेश देता है कि व्यक्ति को हमेशा आत्मसम्मान और स्वाभिमान के साथ जीना चाहिए—“अपना सिर कभी मत झुकाओ, हमेशा ऊँचा रखो।” विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिभाओं को मिला सम्मान इस अवसर पर समाज, शिक्षा, चिकित्सा, प्रशासन, सामाजिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया। आयोजकों ने कहा कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को सम्मानित करना ही इस समारोह का मुख्य उद्देश्य है, ताकि अन्य लोग भी प्रेरित होकर समाज सेवा के कार्यों में आगे आएं। समिति के अध्यक्ष डॉ. सुधीर पटेल ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज केवल एक महान योद्धा और शासक ही नहीं थे, बल्कि वे भारतीय अस्मिता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं। उनके आदर्श आज भी युवाओं को देश और समाज के लिए काम करने की प्रेरणा देते हैं। बिहार के 38 जिलों में प्रतिमा स्थापना का प्रस्ताव कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी रखा गया। इसमें कहा गया कि बिहार के सभी 38 जिलों के प्रमुख चौक-चौराहों पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित की जाए, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। इसके अलावा पटना के मरीन ड्राइव क्षेत्र में शिवाजी महाराज की 100 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा स्थापित करने की मांग भी सरकार से की गई।


