उदयपुर से सूरत-मुंबई और साउथ के लिए ट्रेन की मांग:सांसदों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा प्रस्ताव, असारवा रूट से नई ट्रेनें चलीं तो प्रवासियों और व्यापारियों को होगा बड़ा फायदा

उदयपुर से सूरत-मुंबई और साउथ के लिए ट्रेन की मांग:सांसदों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को सौंपा प्रस्ताव, असारवा रूट से नई ट्रेनें चलीं तो प्रवासियों और व्यापारियों को होगा बड़ा फायदा

उदयपुर से सूरत, मुंबई और दक्षिण भारत के लिए सीधी रेल सेवा की बरसों पुरानी मांग तेज हो गई है। हाल ही में उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत और चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी ने इस जनभावना को रेल मंत्री तक पहुंचाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ हुई सकारात्मक चर्चा ने इन उम्मीद को बढ़ा दिया है। हालांकि अभी आधिकारिक मुहर लगना बाकी है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की सक्रियता और मंत्रालय के संकेतों से साफ है कि मेवाड़ को जल्द ही पश्चिम और दक्षिण भारत से जोड़ने वाली नई ट्रेनों की सौगात मिल सकती है। मेवाड़-वागड़ के लाखों प्रवासी और व्यापारी लंबे समय से इस रूट पर बेहतर कनेक्टिविटी का इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें फिलहाल निजी बसों के महंगे सफर या लंबी दूरी की कनेक्टिंग ट्रेनों पर निर्भर रहना पड़ता है। मुलाकात के बाद रेल मंत्री का रुख
उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर मेवाड़ की रेल समस्याओं को बताया था। सांसद ने स्पष्ट मांग रखी है कि उदयपुर से चलने वाली असारवा वंदे भारत ट्रेन का विस्तार सीधे दक्षिण भारत तक किया जाए ताकि प्रवासियों को सुगम सफर मिल सके। रेल मंत्री ने इस प्रस्ताव पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यवहार्यता जांचने के निर्देश दिए हैं। वहीं चित्तौड़गढ़ सांसद सी.पी. जोशी भी लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि नई रेल लाइनों का काम पूरा होते ही इस रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। दोनों सांसदों की सक्रियता बताती है कि अब यह मुद्दा केवल मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना के स्तर पर पहुंच चुका है। नया रूट और समय की बड़ी बचत
इस पूरी योजना का सबसे मजबूत आधार उदयपुर-अहमदाबाद (असारवा) रेल खंड है। यह नया रूट पुराने अजमेर-अहमदाबाद मार्ग की तुलना में लगभग 100 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी कम करता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि ट्रेनें डूंगरपुर और असारवा होकर वडोदरा और सूरत की तरफ बढ़ती हैं, तो मुंबई तक के सफर में 3 से 4 घंटे की सीधी बचत होगी। यह रूट न केवल छोटा है, बल्कि इस पर ट्रैफिक का दबाव भी मुख्य लाइन के मुकाबले कम रहेगा, इससे ट्रेनों की रफ्तार भी बेहतर रह सकती है। यदि रेलवे मंत्रालय इस छोटे रूट को हरी झंडी देता है, तो उदयपुर से सूरत और मुंबई पहुंचना पहले के मुकाबले काफी तेज और आरामदायक हो जाएगा। व्यापार और प्रवासियों को सीधा लाभ
मेवाड़ का आर्थिक ढांचा काफी हद तक गुजरात और महाराष्ट्र के व्यापारिक केंद्रों से जुड़ा है। उदयपुर और राजसमंद का मार्बल और टेक्सटाइल बिजनेस सीधे तौर पर सूरत और मुंबई के बाजारों पर निर्भर है। सीधी ट्रेन मिलने से माल की आवाजाही सस्ती होगी और व्यापारियों का समय बचेगा। इसके अलावा, बेंगलुरु, पुणे और चेन्नई जैसे शहरों में लाखों मेवाड़ी प्रवासी रहते हैं, जो फिलहाल त्यौहारों के समय निजी बस संचालकों की मनमानी और महंगे किरायों से परेशान रहते हैं। रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से इन प्रवासियों को राहत मिलेगी और उदयपुर के पर्यटन उद्योग को भी दक्षिण भारत से नए सैलानी मिलने से बड़ा बूस्ट मिलेगा। अभी यह प्रस्ताव चर्चा में है, लेकिन इसकी इस रूट पर रेल की मंजूरी उदयपुर संभाग के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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