सहरसा के महिषी में पुलिस चौकी की मांग:बोले–21KM के दायरे में सुरक्षा व्यवस्था ठप, अपराध और नशेड़ियों की गतिविधि बढ़ी

सहरसा के महिषी में पुलिस चौकी की मांग:बोले–21KM के दायरे में सुरक्षा व्यवस्था ठप, अपराध और नशेड़ियों की गतिविधि बढ़ी

सहरसा के महिषी विधानसभा क्षेत्र में पुलिस चौकी की स्थापना को लेकर सोमवार को बिहार विधानसभा में जोरदार बहस हुई। महिषी के विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने सदन में कहा कि चंद्रयान चौक से सहरसा जिला मुख्यालय की दूरी करीब 21 किलोमीटर है और इस पूरे घनी आबादी वाले क्षेत्र में एक भी पुलिस चौकी नहीं है। उन्होंने इसे स्थानीय लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर कमी बताया। घनी आबादी, बढ़ती जनसंख्या, लेकिन पुलिस चौकी गायब विधायक ने कहा कि महिषी क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। आबादी बढ़ रही है, बाजार बढ़ रहे हैं और सड़कों पर आवाजाही भी तेज हो गई है। बावजूद इसके, सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। उन्होंने सदन को बताया, जब 21 किलोमीटर की आबादी में एक भी पुलिस चौकी नहीं होगी, तो अपराधियों और नशेड़ियों का मनोबल बढ़ना ही है। स्थानीय लोग हमेशा असुरक्षित महसूस करते हैं और घटनाओं पर पुलिस का हस्तक्षेप देर से होता है। डॉ. गौतम कृष्ण ने आरोप लगाया कि अधिकारी जमीनी हकीकत को सही रूप में सरकार के सामने पेश नहीं करते। अधिकारी जो जवाब कागज पर तैयार कर देते हैं, मंत्री वही सदन में पढ़ देते हैं। जबकि वास्तविक तस्वीर इससे पूरी तरह अलग है। पांच साल में सिर्फ पांच मामले दर्ज- सम्राट चौधरी विधानसभा में उठाई गई इस मांग पर जवाब देते हुए बिहार के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 5 सालों में उस क्षेत्र में मात्र पांच आपराधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें दो चोरी और तीन छिनतई के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा, अपराध आंकड़ों के आधार पर वहां तत्काल पुलिस चौकी की आवश्यकता स्पष्ट नहीं होती है। फिर भी स्थानीय विधायक की चिंता उचित है, इसलिए विभाग इस मामले की जांच कराएगा। यदि सुरक्षा जरूरतें बढ़ी हुई पाई गईं तो उचित कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी और स्थानीय विधायक ने सवाल उठाया कि क्षेत्र में दर्ज घटनाओं की संख्या वास्तविकता को नहीं दर्शाती, क्योंकि कई मामले शिकायत तक नहीं पहुंच पाते। कितनी घटनाएं दर्ज हों तब बनेगी चौकी? सदन में मुद्दा उठने के बाद महिषी और आसपास के गांवों में इस पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस चौकी नहीं होने के कारण अधिकांश घटनाएं औपचारिक शिकायत के रूप में दर्ज ही नहीं होतीं। चंद्रयान चौक, सुखासन, खजूरी, बलवाहा और आसपास के इलाकों के लोगों का कहना है कि दर्ज मामलों की संख्या कम है, इसका मतलब यह नहीं कि घटनाएं कम होती हैं। हम रोजाना नशेड़ियों की आवाजाही, छेड़खानी, छोटे अपराध और रात में संदिग्ध गतिविधियां देखते हैं। पुलिस चौकी जरूरी है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि रात होते ही कई जगहों पर शराब और नशे के सेवन की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उनका कहना है कि एक चौकी स्थापित होने से न सिर्फ गश्त बढ़ेगी, बल्कि घटनाओं में भी कमी आएगी। महिषी इलाके का भूगोल भी चुनौती महिषी एक बड़ा प्रखंड है, जहां कई गांव सड़कों, नदी और दलदली इलाकों से जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी घटना पर सहरसा से पुलिस के पहुंचने में समय लगता है। यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि चंद्रयान चौक या उसके आसपास एक स्थायी पुलिस चौकी स्थापित हो। विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने यह भी कहा कि कभी-कभी तो ग्रामीणों को खुद ही पकड़कर अपराधियों को पुलिस के हवाले करना पड़ता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। अब सरकार के अध्ययन और रिपोर्ट पर टिकी निगाहें गृह मंत्री ने जांच का आदेश देकर संकेत दे दिया है कि मामला फिलहाल खुला है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन क्षेत्र का दौरा कर क्या रिपोर्ट देता है। स्थानीय थाने की कार्यप्रणाली में सुधार होगा या नहीं और क्या वास्तव में महिषी में पुलिस चौकी की स्थापना को मंजूरी मिलेगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सदन में मुद्दा उठने के बाद सरकार क्षेत्र की सुरक्षा जरूरतों को अनदेखा नहीं करेगी। सहरसा के महिषी विधानसभा क्षेत्र में पुलिस चौकी की स्थापना को लेकर सोमवार को बिहार विधानसभा में जोरदार बहस हुई। महिषी के विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने सदन में कहा कि चंद्रयान चौक से सहरसा जिला मुख्यालय की दूरी करीब 21 किलोमीटर है और इस पूरे घनी आबादी वाले क्षेत्र में एक भी पुलिस चौकी नहीं है। उन्होंने इसे स्थानीय लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर कमी बताया। घनी आबादी, बढ़ती जनसंख्या, लेकिन पुलिस चौकी गायब विधायक ने कहा कि महिषी क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। आबादी बढ़ रही है, बाजार बढ़ रहे हैं और सड़कों पर आवाजाही भी तेज हो गई है। बावजूद इसके, सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है। उन्होंने सदन को बताया, जब 21 किलोमीटर की आबादी में एक भी पुलिस चौकी नहीं होगी, तो अपराधियों और नशेड़ियों का मनोबल बढ़ना ही है। स्थानीय लोग हमेशा असुरक्षित महसूस करते हैं और घटनाओं पर पुलिस का हस्तक्षेप देर से होता है। डॉ. गौतम कृष्ण ने आरोप लगाया कि अधिकारी जमीनी हकीकत को सही रूप में सरकार के सामने पेश नहीं करते। अधिकारी जो जवाब कागज पर तैयार कर देते हैं, मंत्री वही सदन में पढ़ देते हैं। जबकि वास्तविक तस्वीर इससे पूरी तरह अलग है। पांच साल में सिर्फ पांच मामले दर्ज- सम्राट चौधरी विधानसभा में उठाई गई इस मांग पर जवाब देते हुए बिहार के डिप्टी सीएम सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले 5 सालों में उस क्षेत्र में मात्र पांच आपराधिक घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें दो चोरी और तीन छिनतई के मामले शामिल हैं। उन्होंने कहा, अपराध आंकड़ों के आधार पर वहां तत्काल पुलिस चौकी की आवश्यकता स्पष्ट नहीं होती है। फिर भी स्थानीय विधायक की चिंता उचित है, इसलिए विभाग इस मामले की जांच कराएगा। यदि सुरक्षा जरूरतें बढ़ी हुई पाई गईं तो उचित कार्रवाई की जाएगी। गृह मंत्री के इस बयान के बाद विपक्षी और स्थानीय विधायक ने सवाल उठाया कि क्षेत्र में दर्ज घटनाओं की संख्या वास्तविकता को नहीं दर्शाती, क्योंकि कई मामले शिकायत तक नहीं पहुंच पाते। कितनी घटनाएं दर्ज हों तब बनेगी चौकी? सदन में मुद्दा उठने के बाद महिषी और आसपास के गांवों में इस पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस चौकी नहीं होने के कारण अधिकांश घटनाएं औपचारिक शिकायत के रूप में दर्ज ही नहीं होतीं। चंद्रयान चौक, सुखासन, खजूरी, बलवाहा और आसपास के इलाकों के लोगों का कहना है कि दर्ज मामलों की संख्या कम है, इसका मतलब यह नहीं कि घटनाएं कम होती हैं। हम रोजाना नशेड़ियों की आवाजाही, छेड़खानी, छोटे अपराध और रात में संदिग्ध गतिविधियां देखते हैं। पुलिस चौकी जरूरी है। स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि रात होते ही कई जगहों पर शराब और नशे के सेवन की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। उनका कहना है कि एक चौकी स्थापित होने से न सिर्फ गश्त बढ़ेगी, बल्कि घटनाओं में भी कमी आएगी। महिषी इलाके का भूगोल भी चुनौती महिषी एक बड़ा प्रखंड है, जहां कई गांव सड़कों, नदी और दलदली इलाकों से जुड़े हैं। ऐसे में किसी भी घटना पर सहरसा से पुलिस के पहुंचने में समय लगता है। यही वजह है कि लोग चाहते हैं कि चंद्रयान चौक या उसके आसपास एक स्थायी पुलिस चौकी स्थापित हो। विधायक डॉ. गौतम कृष्ण ने यह भी कहा कि कभी-कभी तो ग्रामीणों को खुद ही पकड़कर अपराधियों को पुलिस के हवाले करना पड़ता है। यह स्थिति ठीक नहीं है। सरकार को गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। अब सरकार के अध्ययन और रिपोर्ट पर टिकी निगाहें गृह मंत्री ने जांच का आदेश देकर संकेत दे दिया है कि मामला फिलहाल खुला है। अब यह देखना होगा कि प्रशासन क्षेत्र का दौरा कर क्या रिपोर्ट देता है। स्थानीय थाने की कार्यप्रणाली में सुधार होगा या नहीं और क्या वास्तव में महिषी में पुलिस चौकी की स्थापना को मंजूरी मिलेगी। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सदन में मुद्दा उठने के बाद सरकार क्षेत्र की सुरक्षा जरूरतों को अनदेखा नहीं करेगी।  

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