गोपालगंज जिले में मकर संक्रांति को लेकर लोगों में भारी उत्साह है। इस विशेष अवसर पर ‘दही-चूड़ा’ खाने की सदियों पुरानी परंपरा के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में दूध और दही की मांग काफी बढ़ गई है। सुबह से ही लोग डेयरी की दुकानों पर दूध और दही खरीदने के लिए पहुंचते नजर आए। गोपालगंज शहर के पोस्ट ऑफिस चौक, मौनिया चौक और जनता सिनेमा रोड सहित विभिन्न डेयरियों पर सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतारें देखी गईं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले ही लोगों ने दही का इंतजाम करना शुरू कर दिया था। दुकानों पर दूध के पैकेट और खुले दूध की बिक्री में भारी उछाल आया है। खपत चार से पांच गुना बढ़ गई
दुकानदारों के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में दूध की खपत चार से पांच गुना बढ़ गई है। मिठाई की दुकानों पर तैयार दही की भी अच्छी मांग है, लेकिन गोपालगंज के अधिकांश घरों में लोग शुद्ध दूध खरीदकर खुद दही जमाना पसंद कर रहे हैं। गृहणियों का मानना है कि घर की जमी हुई दही ताजी और अधिक स्वादिष्ट होती है। इसके लिए लोग खास तौर पर ‘जोड़न’ का इंतजाम पहले से ही कर लेते हैं। दही के साथ-साथ बाजारों में चूड़ा और गुड़ की भी खूब बिक्री हो रही है। मशहूर तिल के लड्डू भी खरीद रहे
मकर संक्रांति के भोज को पूरा करने के लिए लोग गया के मशहूर तिलकुट और तिल के लड्डू भी खरीद रहे हैं। जिले के बरौली, हथुआ और मीरगंज जैसे विभिन्न प्रखंडों में दूध की कमी न हो, इसके लिए सुधा और अन्य स्थानीय डेयरी संस्थानों ने अतिरिक्त स्टॉक की व्यवस्था की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। गोपालगंज में दही-चूड़ा और तिल खाना न केवल धार्मिक बल्कि सेहत के लिहाज से भी उत्तम माना जाता है। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं है और हर कोई अपने परिवार के साथ इस पारंपरिक व्यंजन का आनंद लेने की तैयारी में है। गोपालगंज जिले में मकर संक्रांति को लेकर लोगों में भारी उत्साह है। इस विशेष अवसर पर ‘दही-चूड़ा’ खाने की सदियों पुरानी परंपरा के कारण शहरी और ग्रामीण इलाकों में दूध और दही की मांग काफी बढ़ गई है। सुबह से ही लोग डेयरी की दुकानों पर दूध और दही खरीदने के लिए पहुंचते नजर आए। गोपालगंज शहर के पोस्ट ऑफिस चौक, मौनिया चौक और जनता सिनेमा रोड सहित विभिन्न डेयरियों पर सुबह से ही ग्राहकों की लंबी कतारें देखी गईं। मकर संक्रांति से एक दिन पहले ही लोगों ने दही का इंतजाम करना शुरू कर दिया था। दुकानों पर दूध के पैकेट और खुले दूध की बिक्री में भारी उछाल आया है। खपत चार से पांच गुना बढ़ गई
दुकानदारों के अनुसार, सामान्य दिनों की तुलना में दूध की खपत चार से पांच गुना बढ़ गई है। मिठाई की दुकानों पर तैयार दही की भी अच्छी मांग है, लेकिन गोपालगंज के अधिकांश घरों में लोग शुद्ध दूध खरीदकर खुद दही जमाना पसंद कर रहे हैं। गृहणियों का मानना है कि घर की जमी हुई दही ताजी और अधिक स्वादिष्ट होती है। इसके लिए लोग खास तौर पर ‘जोड़न’ का इंतजाम पहले से ही कर लेते हैं। दही के साथ-साथ बाजारों में चूड़ा और गुड़ की भी खूब बिक्री हो रही है। मशहूर तिल के लड्डू भी खरीद रहे
मकर संक्रांति के भोज को पूरा करने के लिए लोग गया के मशहूर तिलकुट और तिल के लड्डू भी खरीद रहे हैं। जिले के बरौली, हथुआ और मीरगंज जैसे विभिन्न प्रखंडों में दूध की कमी न हो, इसके लिए सुधा और अन्य स्थानीय डेयरी संस्थानों ने अतिरिक्त स्टॉक की व्यवस्था की है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिससे शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। गोपालगंज में दही-चूड़ा और तिल खाना न केवल धार्मिक बल्कि सेहत के लिहाज से भी उत्तम माना जाता है। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं है और हर कोई अपने परिवार के साथ इस पारंपरिक व्यंजन का आनंद लेने की तैयारी में है।


