प्रेम प्रसाद को न्याय दिलाने की मांग:बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार पर धरना शुरू, परिवार के सदस्य को सेल में नौकरी की मांग

प्रेम प्रसाद को न्याय दिलाने की मांग:बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार पर धरना शुरू, परिवार के सदस्य को सेल में नौकरी की मांग

बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार स्थित इस्पात भवन एटीएम बिल्डिंग के सामने शुक्रवार को विस्थापित एकता एवं अप्रेंटिस संघ के बैनर तले सैकड़ों विस्थापित महिला-पुरुष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। धरना स्थल पर माहौल भावुक और आक्रोश से भरा हुआ था। लोग अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शहीद प्रेम प्रसाद को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। दरअसल, 3 अप्रैल 2025 को एडीएम बिल्डिंग के सामने विस्थापितों का धरना चल रहा था। उसी दौरान पुलिस लाठीचार्ज में प्रेम महतो की मौत हो गई थी। आंदोलनकारी उन्हें अब “शहीद प्रेम प्रसाद” के नाम से याद करते हैं और उनके सम्मान में न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। धरना स्थल पर मौजूद लोगों की आंखों में गुस्से के साथ-साथ दर्द भी साफ दिखाई दे रहा था। शहीद प्रेम प्रसाद पार्क के निर्माण की मांग
धरना दे रहे लोगों की प्रमुख मांगों में सेक्टर-4 से नया मोड़ के बीच 20 डिसमिल जमीन देकर शहीद प्रेम प्रसाद पार्क का निर्माण, शहीद के परिवार के सदस्य को सेल में तुरंत नौकरी, 1500 अप्रेंटिस कर चुके अभ्यर्थियों की सीधी बहाली, 7000 की मेरिट लिस्ट में बचे 4328 अभ्यर्थियों को अप्रेंटिस कराकर सेल में नौकरी देने की मांग शामिल है। इसके अलावा चतुर्थ वर्ग की बहाली को पहले की तरह शुरू करने और 19 रैयत गांवों की ऑनलाइन रसीद काटने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग भी की जा रही है। विस्थापित नेता अजय महतो ने धरना स्थल पर कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “हम लोग शहीद हो जाएंगे, हजारों प्रेम भक्त बनेंगे, लेकिन यह धरना खत्म नहीं होगा। अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले सेक्टर-4 से नया मोड़ के बीच जमीन देने की बात हुई थी ताकि शहीद पार्क बनाया जा सके, लेकिन बाद में सेक्टर-11 में जमीन देने की बात कही गई, जो आंदोलनकारियों को स्वीकार नहीं है। धरना दे रहे विस्थापितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन देकर बोकारो स्टील प्लांट को बसाया, लेकिन आज उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे प्लांट के विस्तार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने हक और सम्मान के लिए यह लड़ाई अंत तक जारी रखेंगे। धरना स्थल पर गूंजते नारों के बीच न्याय की यह मांग और भी बुलंद होती जा रही है। बोकारो स्टील प्लांट के मुख्य द्वार स्थित इस्पात भवन एटीएम बिल्डिंग के सामने शुक्रवार को विस्थापित एकता एवं अप्रेंटिस संघ के बैनर तले सैकड़ों विस्थापित महिला-पुरुष अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। धरना स्थल पर माहौल भावुक और आक्रोश से भरा हुआ था। लोग अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शहीद प्रेम प्रसाद को न्याय दिलाने की मांग कर रहे थे। दरअसल, 3 अप्रैल 2025 को एडीएम बिल्डिंग के सामने विस्थापितों का धरना चल रहा था। उसी दौरान पुलिस लाठीचार्ज में प्रेम महतो की मौत हो गई थी। आंदोलनकारी उन्हें अब “शहीद प्रेम प्रसाद” के नाम से याद करते हैं और उनके सम्मान में न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। धरना स्थल पर मौजूद लोगों की आंखों में गुस्से के साथ-साथ दर्द भी साफ दिखाई दे रहा था। शहीद प्रेम प्रसाद पार्क के निर्माण की मांग
धरना दे रहे लोगों की प्रमुख मांगों में सेक्टर-4 से नया मोड़ के बीच 20 डिसमिल जमीन देकर शहीद प्रेम प्रसाद पार्क का निर्माण, शहीद के परिवार के सदस्य को सेल में तुरंत नौकरी, 1500 अप्रेंटिस कर चुके अभ्यर्थियों की सीधी बहाली, 7000 की मेरिट लिस्ट में बचे 4328 अभ्यर्थियों को अप्रेंटिस कराकर सेल में नौकरी देने की मांग शामिल है। इसके अलावा चतुर्थ वर्ग की बहाली को पहले की तरह शुरू करने और 19 रैयत गांवों की ऑनलाइन रसीद काटने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग भी की जा रही है। विस्थापित नेता अजय महतो ने धरना स्थल पर कहा कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने भावुक स्वर में कहा, “हम लोग शहीद हो जाएंगे, हजारों प्रेम भक्त बनेंगे, लेकिन यह धरना खत्म नहीं होगा। अब सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पहले सेक्टर-4 से नया मोड़ के बीच जमीन देने की बात हुई थी ताकि शहीद पार्क बनाया जा सके, लेकिन बाद में सेक्टर-11 में जमीन देने की बात कही गई, जो आंदोलनकारियों को स्वीकार नहीं है। धरना दे रहे विस्थापितों का कहना है कि उन्होंने अपनी जमीन देकर बोकारो स्टील प्लांट को बसाया, लेकिन आज उनकी मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि वे प्लांट के विस्तार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने हक और सम्मान के लिए यह लड़ाई अंत तक जारी रखेंगे। धरना स्थल पर गूंजते नारों के बीच न्याय की यह मांग और भी बुलंद होती जा रही है।  

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