पंजाब मोर्चा के कन्वीनर और जल अधिकार कार्यकर्ता गौरव राणा ने स्वां नदी को व्यवस्थित रूप से चैनेलाइज करने तथा नंगल डैम के बाद सतलुज-स्वां संगम पर एक छोटा बांध बनाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि रिपेरियन एक्ट के तहत पंजाब और इस क्षेत्र के लोगों का नदी के पानी पर कानूनी अधिकार है, लेकिन किसी भी सरकार ने सतलुज और स्वां नदी के विकास पर गंभीरता नहीं दिखाई। पत्रकारों से बात करते हुए राणा ने बताया कि स्वां और सतलुज नदियों में उपलब्ध प्राकृतिक मिट्टी और सामग्री का उपयोग कर इन्हें चैनेलाइज किया जा सकता है। इससे बाढ़ नियंत्रण के साथ-साथ सिंचाई की स्थायी व्यवस्था भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण दिया, जहां स्वां नदी और अन्य सहायक नदियों को इंजीनियरिंग विधियों से चैनेलाइज कर बाढ़ पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है। इसके विपरीत, पंजाब में हर साल यह बहुमूल्य पानी बिना उपयोग के बह जाता है। पंजाब के निचले हिस्सों को पहुंचता है नुकसान : राणा राणा ने बताया कि बाढ़ के दौरान स्वां नदी से भारी मात्रा में पानी और गाद बहकर पंजाब के निचले इलाकों को नुकसान पहुंचाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि काहनपुर खूही क्षेत्र के पास नंगल डैम की तर्ज पर एक छोटा बांध बनाया जाए, तो बीत क्षेत्र के लगभग 25 गांवों और काहनपुर खूही क्षेत्र के करीब 15 गांवों की सिंचाई समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। गौरव राणा ने नूरपुर बेदी इलाके के लिए एक और मांग रखी। उन्होंने नंगल के मोजोवाल डैम से रामपुर धाम सबोर, हियातपुर, झांडियां और टिब्बा टपियां तक एक छोटी नहर के निर्माण की बात दोहराई। उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर स्थानीय निवासी कई बार सरकार और मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं। उन्होंने जोर दिया कि नदियों के चैनेलाइजेशन से अवैध खनन पर भी काफी हद तक अंकुश लगेगा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित होगा। राणा ने शिक्षा मंत्री और क्षेत्रीय विधायक हरजोत सिंह बैंस से इस मुद्दे पर ठोस पहल करने की अपील की है।


