जवानों की वीरता और साहस के लिए दिया जाने वाला राष्ट्रपति का पुलिस वीरता पदक (गैलेंट्री मेडल) पहली बार राज्य की झोली में नहीं आया। जबकि पिछले साल राज्य के जवानों ने अपनी बहादुरी का लोहा मनवाते हुए नक्सली संगठन के महासचिव नंबाला केशव राव उर्फ बसवा राजू, सीसी मेंबर मोडेम बालाकृष्णा, गौतम दादा, सुधाकर जैसे कई बड़े नक्सली लीडर को मार गिराया था। सुरक्षा बलों ने कई बड़े ऑपरेशन किए। बीजापुर, नारायणपुर और कांकेर में 30-35 नक्सली एक साथ मारे गए। बस्तर लगभग नक्सल मुक्ति की ओर है। अधिकांश जिलों से एसपी ने अपने बहादुर जवानों की सूची बनाकर पुलिस वीरता पदक के लिए पुलिस मुख्यालय को भेजा। पुलिस मुख्यालय से यह सूची गृह विभाग भेजी गई और वहां से केंद्रीय गृह मंत्रालय भेजी जानी थी। लेकिन इसे भेजने में लेटलतीफी हो गई। इसी वजह से इस साल छत्तीसगढ़ इस महत्वपूर्ण पदक से चूक गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिलों से पदक के लिए आवेदन पुलिस मुख्यालय को भेजा गया। वहां दस्तावेजों की जांच और नामांकित व्यक्ति की पड़ताल के बाद इन्हें गृह विभाग भेजा गया। गृह विभाग ने इन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया। जिलों से पुलिस मुख्यालय में तय समय पर सभी आवेदन पहुंच गए थे, लेकिन यहां से गृह विभाग भेजने में देरी हुई। इसके बाद गृह विभाग में भी कागजी कार्रवाई में समय लग गया। जब तक केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास आवेदन पहुंचे, तब तक नाम तय हो चुके थे। इसलिए इस साल राज्य के किसी भी अधिकारी या जवान को पुलिस वीरता पदक नहीं मिल पाया। इस साल 11 अधिकारियों को मिला सेवा पदक केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा इस साल राज्य के 11 पुलिस अधिकारियों को विशिष्ट सेवा पदक और सराहनीय सेवा पदक के लिए चुना गया है। इसमें आईजी रामगोपाल गर्ग, डीआईजी शशि मोहन सिंह, आईपीएस श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा, राजश्री मिश्रा, कमांडेंट निवेदिता पाल, मनीषा ठाकुर रावटे, एएसपी तारकेश्वर पटेल, उनैजा खातून अंसारी समेत अन्य शामिल हैं। इस बार वीरता पदक के लिए एक भी नाम शामिल नहीं है। जबकि पिछले साल नक्सल ऑपरेशन के लिए आईपीएस सुनील शर्मा, टीआई संदीप माडिले, शहीद जवान रामूराम नाग, कुंजाम जोगा, वंजाम भीमा सहित 14 लोगों को पुलिस पदक के लिए चुना गया था। इन्हें 26 जनवरी को पदक दिया गया। 12 साल बाद राज्य में हिस्ट्रीशीटर का एनकाउंटर
राज्य में 12 साल बाद बस्तर के बाहर मैदानी इलाके में एनकाउंटर हुआ। डीएसपी हेमप्रकाश नायक की टीम ने भिलाई में मुठभेड़ में हिस्ट्रीशीटर अमित जोश को मार गिराया। इसकी दंडाधिकारी जांच पूरी हो चुकी है। इस मामले में भी वीरता पदक मिलने की संभावना थी। इसी तरह एक साथ 31 नक्सलियों को मारने वाली तीन जिलों की डीआरजी टीम, बीजापुर की टीम, कांकेर, नारायणपुर और सुकमा के एसपी व उनकी टीम भी वीरता पुरस्कार की हकदार मानी जा रही है। पिछले साल जवानों ने मुठभेड़ों में 286 नक्सलियों को मार गिराया, 700 से ज्यादा नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 1600 से अधिक नक्सलियों ने सरेंडर किया है।


