भटेरा ओवरब्रिज निर्माण में देरी, डायवर्सन मार्ग चुनौती:8 फरवरी के बाद मुआवजा बांटा जाएगा, फिर हटेंगे चिन्हित भवन

भटेरा ओवरब्रिज निर्माण में देरी, डायवर्सन मार्ग चुनौती:8 फरवरी के बाद मुआवजा बांटा जाएगा, फिर हटेंगे चिन्हित भवन

बालाघाट के भटेरा मार्ग पर बन रहे ओवरब्रिज का काम कछुआ चाल से चल रहा है। भूमिपूजन हुए कई साल बीत गए, लेकिन अब तक गिने-चुने खंभे ही खड़े हो पाए हैं। रास्ते में आ रही दुकानें, मकान और आवाजाही के लिए वैकल्पिक रास्ता न होना इस देरी की सबसे बड़ी वजह बनी हुई है। ओवरब्रिज के रास्ते में करीब 224 भवन और दुकानें आ रही हैं, जिन्हें हटाने की प्रक्रिया बीते एक साल से कागजों में ही उलझी है। राजस्व विभाग ने पिछले साल इनका सर्वे तो कर लिया था, लेकिन कार्रवाई अब शुरू हुई है। एसडीएम गोपाल सोनी के मुताबिक, 8 जनवरी को इस संबंध में सूचना जारी की गई थी, जिसकी समय सीमा 8 फरवरी को खत्म हो रही है। इसके बाद प्रभावित लोगों को मुआवजे की राशि बांटी जाएगी, जिसके बाद ही निर्माण वाली जगह को खाली कराया जा सकेगा। खर्च और समय दोनों का बढ़ा बोझ करीब 38 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे इस रेलवे ओवरब्रिज को अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य था। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती को देखते हुए इस समय सीमा में काम पूरा होना नामुमकिन लग रहा है। लगभग 1313 मीटर लंबे इस पुल के लिए कुल 42 खंभे बनने हैं। खास बात यह है कि जितने का पुल बन रहा है, लगभग उतनी ही राशि (35 करोड़ रुपए) तो प्रभावित संपत्तियों के मुआवजे में खर्च होने का अनुमान है। जब तक तोड़फोड़ का काम पूरा नहीं होता, तब तक ब्रिज के निर्माण में तेजी आना मुश्किल है।

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