डीग नगर परिषद ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जारी एक आवासीय पट्टे को निरस्त कर दिया है। यह कार्रवाई राजस्थान स्टेट ग्रांट एक्ट 1961 और राजस्थान नगर पालिका अधिनियम 2009 की धारा 73-ख के तहत की गई है। जानकारी के अनुसार गोवर्धन मोड़, डीग निवासी बलवीर पुत्र चुन्नीलाल को ‘प्रशासन शहरों के संग अभियान-2012’ के तहत 10 अप्रैल 2013 को पट्टा क्रमांक 121 जारी किया गया था। बाद में कॉलोनीवासियों ने शिकायत की कि बलवीर ने गलत दस्तावेज प्रस्तुत कर सरकारी भूमि पर यह पट्टा प्राप्त किया है। शिकायत के बाद जांच कमेटी का हुआ गठन
शिकायत के बाद नगर परिषद ने 13 फरवरी 2026 को एक जांच कमेटी का गठन किया, जिसमें कनिष्ठ अभियंता और वरिष्ठ प्रारूपकार शामिल थे। कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि संबंधित भूखंड मौके पर खाली है और उस पर कोई स्थायी निर्माण या निवास नहीं है। नियमानुसार 30 प्रतिशत से अधिक निर्माण भी नहीं पाया गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि यह भूमि नगर परिषद के स्वामित्व वाली सरकारी जमीन है। वर्ष 2014-15 में इस स्थान पर बाउंड्री वॉल निर्माण के लिए भुगतान भी किया जा चुका था, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पट्टा गलत तरीके से प्राप्त किया गया था। नगर परिषद डीग के आयुक्त कुलदीप सिंह ने 30 मार्च सोमवार को पट्टा क्रमांक 121 (दिनांक 10.04.2013) को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके साथ ही, संबंधित दानपत्र, रिलीज डीड और वयनामा (बयान) को भी निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। नगर परिषद ने उप पंजीयन कार्यालय डीग को संबंधित दस्तावेज निरस्त करने का निर्देश दिया है। इसके अतिरिक्त, कोतवाली डीग थानाधिकारी को संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार एफआईआर दर्ज कर उसकी प्रति परिषद को भेजने के लिए कहा गया है।


