पेट का संक्रमण पूरे शरीर में, मल्टी ऑर्गन फेल्योर से थम नहीं रही मौतें

पेट का संक्रमण पूरे शरीर में, मल्टी ऑर्गन फेल्योर से थम नहीं रही मौतें

लवीन राव ओव्हाल की रिपोर्ट भागीरथपुरा में हुई मौतों के बाद पोस्टमॉर्टम से जुड़े डॉक्टरों ने बताया, कुछ मामलों में सेप्टिक शॉक और मल्टी ऑर्गन फेल्योर के संकेत दिखे हैं। सेप्सिस की स्थिति में संक्रमण खून में फैल जाता है और शरीर की रक्षा प्रणाली ही अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती है। यही वजह है कि मरीज अचानक गंभीर हो जाता है और इलाज के बावजूद उसे बचाना मुश्किल हो जाता है। मौतें केवल दस्त या उल्टी से नहीं हुईं। यह एक ऐसी मेडिकल प्रक्रिया थी, जिसमें शरीर का पूरा सिस्टम धीरे-धीरे जवाब देता चला गया और आखिर में जान चली गई। डॉक्टरों के अनुसार दूषित पानी पीने के बाद सबसे पहले आंतों में संक्रमण होता है। पानी में मौजूद बैक्टीरिया या अन्य पैथोजन आंतों की कार्यप्रणाली को बिगाड़ देते हैं, जिससे तेज दस्त और उल्टी शुरू हो जाती है। बाहर से यह बीमारी सामान्य लग सकती है, लेकिन भीतर शरीर तेजी से कमजोर होने लगता है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का सीधा असर किडनी, हार्ट पर हुआ एमजीएम के मेडिसिन विभाग अध्यक्ष डॉ. एडी भटनागर ने बताया तेज दस्त और उल्टी के कारण कुछ ही घंटों में शरीर से बड़ी मात्रा में पानी और जरूरी मिनरल बाहर निकल जाते हैं। इसे मेडिकल भाषा में गंभीर डिहाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन कहा जाता है। यही वह मोड़ होता है, जहां बीमारी खतरनाक बन जाती है। शरीर का तापमान, ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट असंतुलित होने लगते हैं। जब इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बिगड़ता है, तो इसका सीधा असर किडनी और हार्ट पर पड़ता है। किडनी पर्याप्त मात्रा में खून को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं। वहीं हार्ट की धड़कन अनियमित हो सकती है। कई मामलों में यही स्थिति कर्डियक अरेस्ट या ऑर्गन फेल्योर तक पहुंच जाती है। खतरा बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा इस तरह के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों, बच्चों और पहले से बीमार मरीजों को होता है। इनकी बॉडी रिजर्व क्षमता कम होती है, यानी शरीर लंबे समय तक डिहाइड्रेशन और इन्फेक्शन का दबाव नहीं झेल पाता। कई बार मरीज अस्पताल पहुंचता है, तब तक अंदरूनी नुकसान जानलेवा स्तर तक पहुंच चुका होता है। पानी और मरीजों के सैंपल की मल्टीप्लेक्स पीसीआर जांच अरबिंदो अस्पताल के फाउंडर चेयरमैन डॉ. विनोद भंडारी ने बताया भागीरथपुरा से लिए गए पेयजल के सैंपल की अत्याधुनिक मल्टीप्लेक्स पीसीआर जांच की जा रही है। इसके जरिए पानी में साल्मोनेला, ई-कोलाई 0157, वीटीईसी और कैंपाइलोबैक्टर जैसे बैक्टीरिया की मौजूदगी का आकलन किया जा रहा है। साथ ही भर्ती मरीजों के स्टूल सैंपल्स की भी बैक्टीरियल पैथोजन जांच की जा रही है। पानी और मरीज, दोनों स्तर पर जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संक्रमण किस स्तर तक पहुंचा और किस वजह से मरीजों में सेप्सिस व ऑर्गन फेल्योर जैसी स्थितियां बनीं।

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