अचानकमार टाइगर रिजर्व के सारसडोल गांव के करीब जंगल में एक नर बाघ का शव मिला है। बाघ का शव लगभग सड़ चुका था। यह शव उन्हें मिला जिन्हें दो घायल बाघ को तलाशने की जिम्मेदारी दी गई थी। ये दोनों बाघ ट्रैप कैमरा में घायल हालत में दिखाई दिए थे। पिछले 8 दिन से उनकी तलाश की जा रही है लेकिन उनका कोई पता नहीं लग पाया है। जंगल में तैनात टीम उनका पता नहीं लगा सकी है। बाघ के मरने के बाद लाश सड़ चुकी थी और एटीआर के मैदानी अमले को इसकी खबर नहीं लगी। इससे स्पष्ट है कि एटीआर का प्रबंधन पूरी तरह से फेल हाे चुका है। बाघों की गणना के लिए लगाए गए ट्रैप कैमरा के चिप से डाटा निकाल रहे एटीआर प्रबंधन के अफसरों के होश उस समय उड़ गए जब 20 जनवरी की फोटो में दो बाघ घायल हालत में खून से लथपथ दिखाई दिए। दोनों ही कैमरों की फोटो सारसडोल से जल्दा रोड के ही थे लेकिन दोनों की दूरी 5 किलोमीटर से अधिक थी। यह जानकारी 2 जनवरी को अफसरों को हुई। उन्होंने तत्काल एक टीम बनाकर 25 जनवरी को टीम को उस क्षेत्र में रवाना किया जहां पर घायल बाघ दिखाई दिए थे। टीम क्षेत्र में तलाशी ले रही थी तभी उन्हें सारसडोल के परिवृत्त परिसर कुडेरापानी के कक्ष क्रमांक 120 रिजर्व फारेस्ट में दुर्गंध आना शुरू हुई। सभी लोग दुर्गंध की तरफ गए तो वहां पर दूर से एक बाघ लेटा दिखाई दिया करीब पहुंचे तो देखा की दुर्गंध वहीं से आ रही थी। बाघ का शव सड़ने लगा था। इसकी सूचना तत्काल एटीआर प्रबंधन को दी गई। बाघ की उम्र लगभग 2 साल थी। इसकी खबर मिलते ही पूरे महकमें भी हड़कंप मच गया। आनन–फानन में डाक्टरों की टीम मौके पर रवाना की गई।


