सीतामढ़ी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की मौत:स्टूडेंट्स ने प्रिंसिपल पर लापरवाही का लगाया आरोप, कहा- अगर गाड़ी दे देते तो जान बच सकती थी

सीतामढ़ी इंजीनियरिंग कॉलेज की छात्रा की मौत:स्टूडेंट्स ने प्रिंसिपल पर लापरवाही का लगाया आरोप, कहा- अगर गाड़ी दे देते तो जान बच सकती थी

सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की एक छात्रा की मौत के बाद कॉलेज परिसर में हंगामा मच गया है। छात्रों का आरोप है कि अगर कॉलेज में समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था होती और प्रिंसिपल अपनी गाड़ी उपलब्ध करा देते, तो छात्रा की जान बचाई जा सकती थी। मृत छात्रा की पहचान मेघा पराशर (22) के रूप में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा को हार्ट अटैक आया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। यह मामला सीतामढ़ी जिले के डुमरा थाना क्षेत्र अंतर्गत गोसाईपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SIT) कॉलेज का है। घटना के बाद गुस्साए छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे से कॉलेज के सभी स्टूडेंट्स प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर मेघा की फोटो हाथ में लिए विरोध जता रहे हैं। प्रिंसिपल से इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… 2022 बैच की थी मेघा पराशर मेघा पराशर भागलपुर के सुल्तानगंज की रहने वाली थी। साल 2022 में मेघा ने सीतामढ़ी के SIT कॉलेज में एडमिशन लिया था। वो कॉलेज के ही गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। स्टूडेंट्स के अनुसार, मेघा पढ़ने में अच्छी थी। 4 महीने बाद वो इंजीनियर बनने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी 22 जनवरी गुरुवार को उसकी जान चली गई। हॉस्टल में रह रहीं छात्राओं ने बताया, मेघा 3 दिन से बीमार थी। वो 3 दिनों से अपने कमरे से बाहर भी नहीं निकली थी। फीवर रहने के कारण उसकी रूममेट ही खाना लेकर कमरे में जाती थी। हालांकि, इस बीच न तो वॉर्डन उसे देखने के लिए आई और न ही मेघा के पेरेंट्स को घटना की जानकारी दी गई। वॉर्डन ने मेघा का हेल्प करने से किया इनकार थर्ड ईयर की छात्रा जानवी ने बताया, गुरुवार को मेघा ने सुबह में ब्रेकफास्ट किया। इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बीपी हाई होने के कारण उन्हें घबराहट होने लगा। हम तुरंत पहले वॉर्डन के पास गए, लेकिन उन्होंने हमारी कोई मदद नहीं की। वॉर्डन ने हमसे कहा, तुमलोग मेघा को लेकर प्रिंसिपल के पास जाओ। मैं इसमें कोई मदद नहीं कर सकती हूं। प्रिंसिपल ने कहा- गाड़ी गंदी होगी तो कौन साफ करेगा जब मेघा की ज्यादा तबीयत बिगड़ने लगी तो हम उन्हें प्रिंसिपल ऑफिस लेकर गए। 10 मिनट इंतजार के बाद हम प्रिंसिपल से मिले। हमने कहा, आप अपनी पर्सन कार दे दीजिए तो मेघा को अस्पताल लेकर चले जाएंगे। इस दौरान उन्होंने तुरंत कहा, कार नहीं दे सकते हैं। गाड़ी गंदी हो जाएगी। अगर मेघा ने उल्टी किया तो उसे साफ कौन करेगा। इस वजह से तुमलोग कोई और गाड़ी से चली जाओ। जानवी ने आगे बताया, अगर प्रिंसिपल सर गाड़ी दे देते तो हमलोग मेघा को बचा सकते थे। उनकी लापरवाही और जिद के कारण उसकी मौत हो गई है। प्रिंसिपल सर को अपनी गाड़ी से प्यार था, स्टूडेंट से नहीं… इलाज में देरी से मौत का आरोप छात्रों का दावा है कि कॉलेज के पास न तो एम्बुलेंस की व्यवस्था थी और न ही तत्काल किसी वाहन की व्यवस्था की गई। इसी वजह से उसे अस्पताल ले जाने में करीब 2 घंटे लग गए। इस दौरान मेघा को सांस में भी दिक्कत होने लगी थी। हमने किसी तरह कॉलेज के बाहर से प्राइवेट गाड़ी की और मेघा को अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद स्टूडेंट्स ने ही मेघा के परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। परिजन 22 जनवरी को कॉलेज पहुंचे और शव को अपने साथ भागलपुर ले गए। मेघा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। हालांकि, परिवार वालों ने कॉलेज के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं की है। उन्होंने कॉलेज प्रबंधक के खिलाफ न ही कोई FIR दर्ज करवाया है। घटना को लेकर कॉलेज स्टूडेंट्स ने शनिवार को हंगामा शुरू कर दिया है। स्टूडेंट्स ने मेधा का फोटो पोस्टर में लगवाया है। उसमें लिखा है- JUSTICE FOR MEDHA PRASHAR…इसके साथ ही लिखा है- कॉलेज प्रशासन मुर्दाबाद, एंबुलेंस सुविधा कहां है, मेधा को न्याय दो… कॉलेज में मेडिकल सुविधा पर सवाल प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि SIT जैसे तकनीकी संस्थान में प्राथमिक चिकित्सा तक की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। न तो कॉलेज परिसर में कोई मेडिकल रूम है और न ही प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती। छात्रों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार बीमार छात्रों को निजी व्यवस्था से अस्पताल ले जाना पड़ा है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। छात्रों का यह भी आरोप है कि हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधन पूरी तरह उदासीन है। मेधा की मौत ने इस लापरवाही को उजागर कर दिया है। छह घंटे से ज्यादा चला प्रदर्शन घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन करीब छह घंटे से अधिक समय तक चला। छात्रों ने कॉलेज गेट को जाम कर दिया और मेधा को न्याय दिलाने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों की प्रमुख मांगों में मृतक छात्रा के परिजनों को उचित मुआवजा, कॉलेज में 24 घंटे मेडिकल सुविधा और एंबुलेंस की व्यवस्था, कॉलेज प्राचार्य को निलंबित करने, हॉस्टल वार्डन को हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शामिल है। प्रशासन मौके पर, हालात तनावपूर्ण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम और डीएसपी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने छात्रों को निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि देर शाम तक कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई। सीतामढ़ी में इंजीनियरिंग की फाइनल ईयर की एक छात्रा की मौत के बाद कॉलेज परिसर में हंगामा मच गया है। छात्रों का आरोप है कि अगर कॉलेज में समय पर एम्बुलेंस की व्यवस्था होती और प्रिंसिपल अपनी गाड़ी उपलब्ध करा देते, तो छात्रा की जान बचाई जा सकती थी। मृत छात्रा की पहचान मेघा पराशर (22) के रूप में हुई है। डॉक्टरों के मुताबिक, छात्रा को हार्ट अटैक आया था, जिसके चलते उसकी मौत हो गई। यह मामला सीतामढ़ी जिले के डुमरा थाना क्षेत्र अंतर्गत गोसाईपुर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SIT) कॉलेज का है। घटना के बाद गुस्साए छात्रों ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। करीब एक घंटे से कॉलेज के सभी स्टूडेंट्स प्रिंसिपल ऑफिस के बाहर मेघा की फोटो हाथ में लिए विरोध जता रहे हैं। प्रिंसिपल से इस्तीफा की मांग कर रहे हैं। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… 2022 बैच की थी मेघा पराशर मेघा पराशर भागलपुर के सुल्तानगंज की रहने वाली थी। साल 2022 में मेघा ने सीतामढ़ी के SIT कॉलेज में एडमिशन लिया था। वो कॉलेज के ही गर्ल्स हॉस्टल में रहती थी। स्टूडेंट्स के अनुसार, मेघा पढ़ने में अच्छी थी। 4 महीने बाद वो इंजीनियर बनने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही उसकी 22 जनवरी गुरुवार को उसकी जान चली गई। हॉस्टल में रह रहीं छात्राओं ने बताया, मेघा 3 दिन से बीमार थी। वो 3 दिनों से अपने कमरे से बाहर भी नहीं निकली थी। फीवर रहने के कारण उसकी रूममेट ही खाना लेकर कमरे में जाती थी। हालांकि, इस बीच न तो वॉर्डन उसे देखने के लिए आई और न ही मेघा के पेरेंट्स को घटना की जानकारी दी गई। वॉर्डन ने मेघा का हेल्प करने से किया इनकार थर्ड ईयर की छात्रा जानवी ने बताया, गुरुवार को मेघा ने सुबह में ब्रेकफास्ट किया। इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। बीपी हाई होने के कारण उन्हें घबराहट होने लगा। हम तुरंत पहले वॉर्डन के पास गए, लेकिन उन्होंने हमारी कोई मदद नहीं की। वॉर्डन ने हमसे कहा, तुमलोग मेघा को लेकर प्रिंसिपल के पास जाओ। मैं इसमें कोई मदद नहीं कर सकती हूं। प्रिंसिपल ने कहा- गाड़ी गंदी होगी तो कौन साफ करेगा जब मेघा की ज्यादा तबीयत बिगड़ने लगी तो हम उन्हें प्रिंसिपल ऑफिस लेकर गए। 10 मिनट इंतजार के बाद हम प्रिंसिपल से मिले। हमने कहा, आप अपनी पर्सन कार दे दीजिए तो मेघा को अस्पताल लेकर चले जाएंगे। इस दौरान उन्होंने तुरंत कहा, कार नहीं दे सकते हैं। गाड़ी गंदी हो जाएगी। अगर मेघा ने उल्टी किया तो उसे साफ कौन करेगा। इस वजह से तुमलोग कोई और गाड़ी से चली जाओ। जानवी ने आगे बताया, अगर प्रिंसिपल सर गाड़ी दे देते तो हमलोग मेघा को बचा सकते थे। उनकी लापरवाही और जिद के कारण उसकी मौत हो गई है। प्रिंसिपल सर को अपनी गाड़ी से प्यार था, स्टूडेंट से नहीं… इलाज में देरी से मौत का आरोप छात्रों का दावा है कि कॉलेज के पास न तो एम्बुलेंस की व्यवस्था थी और न ही तत्काल किसी वाहन की व्यवस्था की गई। इसी वजह से उसे अस्पताल ले जाने में करीब 2 घंटे लग गए। इस दौरान मेघा को सांस में भी दिक्कत होने लगी थी। हमने किसी तरह कॉलेज के बाहर से प्राइवेट गाड़ी की और मेघा को अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद स्टूडेंट्स ने ही मेघा के परिवार वालों को घटना की जानकारी दी। परिजन 22 जनवरी को कॉलेज पहुंचे और शव को अपने साथ भागलपुर ले गए। मेघा का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। हालांकि, परिवार वालों ने कॉलेज के खिलाफ किसी तरह की शिकायत नहीं की है। उन्होंने कॉलेज प्रबंधक के खिलाफ न ही कोई FIR दर्ज करवाया है। घटना को लेकर कॉलेज स्टूडेंट्स ने शनिवार को हंगामा शुरू कर दिया है। स्टूडेंट्स ने मेधा का फोटो पोस्टर में लगवाया है। उसमें लिखा है- JUSTICE FOR MEDHA PRASHAR…इसके साथ ही लिखा है- कॉलेज प्रशासन मुर्दाबाद, एंबुलेंस सुविधा कहां है, मेधा को न्याय दो… कॉलेज में मेडिकल सुविधा पर सवाल प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने आरोप लगाया कि SIT जैसे तकनीकी संस्थान में प्राथमिक चिकित्सा तक की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है। न तो कॉलेज परिसर में कोई मेडिकल रूम है और न ही प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी की तैनाती। छात्रों का कहना है कि इससे पहले भी कई बार बीमार छात्रों को निजी व्यवस्था से अस्पताल ले जाना पड़ा है, लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया। छात्रों का यह भी आरोप है कि हॉस्टल में रह रहे छात्र-छात्राओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रबंधन पूरी तरह उदासीन है। मेधा की मौत ने इस लापरवाही को उजागर कर दिया है। छह घंटे से ज्यादा चला प्रदर्शन घटना के बाद आक्रोशित छात्रों ने कॉलेज परिसर में जमकर नारेबाजी की और प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन करीब छह घंटे से अधिक समय तक चला। छात्रों ने कॉलेज गेट को जाम कर दिया और मेधा को न्याय दिलाने की मांग पर अड़े रहे। छात्रों की प्रमुख मांगों में मृतक छात्रा के परिजनों को उचित मुआवजा, कॉलेज में 24 घंटे मेडिकल सुविधा और एंबुलेंस की व्यवस्था, कॉलेज प्राचार्य को निलंबित करने, हॉस्टल वार्डन को हटाने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच शामिल है। प्रशासन मौके पर, हालात तनावपूर्ण स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सदर एसडीएम और डीएसपी मौके पर पहुंचे। उन्होंने आक्रोशित छात्रों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया। अधिकारियों ने छात्रों को निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि देर शाम तक कॉलेज परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना रहा और पुलिस बल की तैनाती कर दी गई।  

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