1000KM दूर रोजी-रोटी कमाने गए 6 मजदूरों की मौत:बहन को दरोगा बनाना चाहता था अमरेश, 10 महीने पहले मिंटू की हुई थी शादी

1000KM दूर रोजी-रोटी कमाने गए 6 मजदूरों की मौत:बहन को दरोगा बनाना चाहता था अमरेश, 10 महीने पहले मिंटू की हुई थी शादी

‘मेरे पति एक महीने पहले इस फैक्ट्री में काम करने आए थे। उन्होंने मुझे कहा था, यहां गलत काम हो रहा है। मुझे यहां काम नहीं करना है। बारूद के बीच काम कराते हैं। मार्च से काम छोड़ने की बात कह रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई।’ इतना कहते ही मिंटू की पत्नी मुस्कान फूट-फूटकर कर रोने लगीं। मृतक मिंटू की शादी 10 महीने पहले अप्रैल 2025 में मोतिहारी की मुस्कान से हुई थी। शादी के बाद पत्नी मुस्कान को मिंटू अपने साथ भिवाड़ी ले आया था। मुस्कान को वो अच्छी जिंदगी देना चाहता था। दरअसल, राजस्थान के भिवाड़ी में सोमवार सुबह 9 बजे हुए भीषण विस्फोट में मोतिहारी के 6 मजदूरों की मौत हो गई। खुशखेड़ा कारोली इंडस्ट्रियल एरिया में कपड़ा फैक्ट्री की आड़ में अवैध रूप से पटाखा फैक्ट्री चलाया जा रहा था। इसी यूनिट में अचानक आग लगी। देखते ही देखते सात सेकंड के अंदर तीन बड़े धमाके हुए। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की फैक्ट्रियों की दीवारें तक कांप उठीं और मजदूर घबराकर बाहर भागने लगे। इस धमाके ने 5 परिवारों के सपनों को खाक कर डाला, जो अच्छी जिंदगी के लिए करीब 1000 किलोमीटर दूर भिवाड़ी मजदूरी करने आए थे। धमाके के बाद मोतिहारी के इन परिवारों को अपनों के शव तक नहीं मिले। जो मिले वो कोयला- कंकाल की हालत में। फैक्ट्री में हमेशा लगा रहता था ताला बता दें कि फैक्ट्री में बारूद के ढेर पर काम करने वाले बिहार के मजदूरों का बीमा तक नहीं था। सभी मजदूरों को फैक्ट्री में बंद कर बाहर से ताला लगाकर पटाखा तैयार कराया जाता था। 20-30 हजार रुपए का लालच देकर दिन-रात काम करवाया जाता था। फैक्ट्री में ही उनके खाने और सोने की व्यवस्था की गई थी, ताकि अवैध रूप से पटाखे बनने का मामला उजागर न हो जाए। हादसा इतना भयानक था कि श्रमिकों की हड्डियां तक पिघल गईं। मौके पर FSL टीम ने काफी मात्रा में पटाखे और बारूद जब्त किए हैं। वहीं, मृतकों में सिकारगंज के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, हरसिद्धि के मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश शामिल हैं। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए खबर… पहले घटना के दौरान की 2 तस्वीरें देखें… सरस्वती पूजा के बाद कमाने गए थे अभिषेक इस घटना की जानकारी मिलने के बाद मोतिहारी से दैनिक भास्कर की टीम उन घरों पर पहुंची, जहां के बेटा-पिता मजदूरी करने राजस्थान गए थे, लेकिन अब लौटकर कभी वापस नहीं आएंगे। सबसे पहले हमारी टीम मृतक अभिषेक के घर पहुंची। इस दौरान घर के बाहर वाले कमरे में पिता-बेटे और कुछ रिश्तेदार बैठे थे। सभी की आंखें नम थी। अभिषेक के बेटे छोटू ने बताया, पापा सरस्वती पूजा तक घर पर ही थे। मोतिहारी में पेंटिंग करते थे। उसी पैसे से पूरा घर चलता था। बहन की शादी के लिए कमाने गया था भाई जनवरी में पापा ने अपनी बहन (बुआ) की शादी पक्की की थी। 4 अप्रैल 2026 को शादी होने वाली थी। शादी के लिए पैसा कमाने के लिए वह बाहर गए थे। गांव के एक व्यक्ति उन्हें कपड़ा फैक्ट्री में काम दिलाने का कहकर राजस्थान ले गए थे। वहां, जाकर पापा को पता चला था कि पटाखा फैक्ट्री में काम करना है। होली में आने वाले थे घर छोटू ने आगे बताया, ‘रविवार की रात 12 बजे मेरी पिता से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि होली या बुआ की शादी पर घर आऊंगा।’ अभिषेक के परिवार से बात करने के बाद हमारी टीम अमरेश कुमार के घर पहुंची। घर के बाहर चीख-पुकार मचा हुआ था। मां-बहन बार-बार बेहोश हो रही थी। भइया कहते थे पढ़ाई कर दरोगा बनना बहन शिवानी कुमारी ने बताया, ‘भइया अक्सर मुझसे कहते थे कि अच्छे से पढ़ाई-लिखाई करो और दरोगा बनो। पूरे घर का नाम रोशन करना। अगर ज्यादा पैसा कमाओगी तो मुझे भी भेज देना।’ इतना बोलते ही शिवानी अपने भाई को याद कर फूट-फूटकर रोने लगती है। शिवानी ने कहा, ‘भइया का फोन जमा होता था। इस वजह से उनसे फोन पर बात नहीं हो पाती थी।’ श्याम की मां नीतू देवी ने बताया, ‘वो इस साल अपनी दोनों बहनों की शादी करना चाहता था। इसी वजह से छठ के बाद बेटा कमाने के लिए निकला था। हमारे गांव के ही चंद-अभिनंद ने कहा था, राजस्थान चलो वहां कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरी करना। जैसे ही वो भिवाड़ी पहुंचा वहां उसे पटाखा फैक्ट्री में ले जाया गया।’ फैक्ट्री का ताला बंद कर मजदूरी करवाया जाता था श्याम की मां ने आगे बताया, ‘सभी मजदूरों से फैक्ट्री में ताला बंद कर काम करवाया जाता था। फैक्ट्री में कपड़ा की जगह पटाखा बनाया जाता था। इसी वजह से शटर हमेशा बंद रहता था। सुबह 6 बजे एंट्री मिलती थी, तभी से सभी मजदूरों का फोन जमा करवा लिया जाता था। इसके बाद रात 9 बजे के बाद फोन मिलता था। 12 घंटे से ज्यादा मजदूरों से काम करवाया जाता था।’ श्याम की मां ने रोते-बिलखते कहा, ‘अब मैं अपनी बेटियों की शादी कैसे करूंगी। घर का इकलौता कमाने वाला बेटा चला गया। पहले वह प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता था। वहां कम सैलरी मिलती थी।’ 2005 में कपड़ा फैक्ट्री के नाम पर शुरू हुआ था काम बताया जा रहा है यह फैक्ट्री उद्योग विभाग में भी रजिस्टर्ड नहीं थी। फैक्ट्री 2005 में राजेंद्र के नाम से आवंटित थी। उसने इसे किसी और को लीज पर दे रखा है। रीको से रेडीमेड गारमेंट के नाम पर लाइसेंस लिया गया था। 2011 में इसका संचालन शुरू हुआ, लेकिन बाद में बंद कर दिया गया। 2017 में मेटल इंडस्ट्री शुरू हुई। वह भी बंद हो गई। अब पटाखा बनाया जा रहा था। रीको भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराएगा। राजस्थान पुलिस ने मैनेजर अभिनंदन तिवारी को हिरासत में ले लिया है। अभिनंदन का कहना है कि 10-15 मजदूर फैक्ट्री में थे। फिलहाल, असली लाइसेंस धारक और लीज पर फैक्ट्री लेने वालों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक जताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने मृतक आश्रितों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। 40-50 कैरेट कच्चा बारूद बरामद हादसे में घायल मजदूर नितेश ने बताया, एक कमरे में मशीन चलती थी। दूसरे में 40-50 कैरेट कच्चा माल (बारूद) रखा था। सोमवार सुबह इसी में अचानक तेज धमाका हुआ तब नितेश पैकिंग एरिया में था। बाहर निकलने से बच गया। नितेश के अनुसार मोतिहारी का एक आदमी बिहार से लेबर लाता था। फैक्ट्री में अंदर-बाहर से ताला लगाकर काम होता था। अंदर 8 से 10 टेबल पर बारूद भरा जाता था। हादसे के समय हर टेबल पर 5 से 10 किलो बारूद का मिश्रण रखा था। पास में 40 से अधिक कट्टे व 10-15 कार्टन तैयार माल रखा था, जो आग में जलकर राख हो गया। इस तरह से तैयार किया जाता था पटाखा फैक्ट्री में काम करने वाले बिहार के एक नाबालिग मजदूर ने अवैध पटाखा बनाने के तौर-तरीकों का खुलासा किया। नाबालिग ने बताया- यहां बजरी को सुखाया जाता है, जिसमें चांदी का घोल भी मिलाया जाता है। फिर उसे मशीन में डालकर पटाखे बनाकर पैक किया जाता है। नाबालिग मजदूर ने कहा- ‘मुझे इस फैक्ट्री में काम करते हुए सात साल हो गए हैं। मैं आज काम पर नहीं गया। मैं खाटू श्यामजी गया था। हमें पैकेट के हिसाब से 100 रुपए मिलते थे। महीने में लगभग 30 हजार रुपए कमा लेता था। फैक्ट्री मालिक को कभी नहीं देखा।’ 27 लोग फैक्ट्री में काम करते थे, बाकी कहां? नाबालिग ने बताया, ‘फैक्ट्री में 27 लोग काम करते थे। उनमें से चार लोग आग लगने के बाद किचन के कमरे से बाहर भागे। बाकी दो-चार छुट्टी पर हो सकते हैं। आशंका है कि फैक्ट्री में काम करने वालों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।’ लाश बनी कंकाल, बॉडी पार्ट्स इकट्ठे किए घटना खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह करीब 9 बजे घटी है। यहां स्थित केमिकल और पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री में धमाका हुआ था। धमाके की आवाज पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में सुनाई दी। आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोग बाहर निकल आए। देखते ही देखते फैक्ट्री से धुआं और आग की लपटें उठने लगीं थी। हालांकि, घटना के करीब 3 घंटे बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक 8 लोगों की जान जा चुकी थी। ‘मेरे पति एक महीने पहले इस फैक्ट्री में काम करने आए थे। उन्होंने मुझे कहा था, यहां गलत काम हो रहा है। मुझे यहां काम नहीं करना है। बारूद के बीच काम कराते हैं। मार्च से काम छोड़ने की बात कह रहे थे, लेकिन इससे पहले ही उनकी मौत हो गई।’ इतना कहते ही मिंटू की पत्नी मुस्कान फूट-फूटकर कर रोने लगीं। मृतक मिंटू की शादी 10 महीने पहले अप्रैल 2025 में मोतिहारी की मुस्कान से हुई थी। शादी के बाद पत्नी मुस्कान को मिंटू अपने साथ भिवाड़ी ले आया था। मुस्कान को वो अच्छी जिंदगी देना चाहता था। दरअसल, राजस्थान के भिवाड़ी में सोमवार सुबह 9 बजे हुए भीषण विस्फोट में मोतिहारी के 6 मजदूरों की मौत हो गई। खुशखेड़ा कारोली इंडस्ट्रियल एरिया में कपड़ा फैक्ट्री की आड़ में अवैध रूप से पटाखा फैक्ट्री चलाया जा रहा था। इसी यूनिट में अचानक आग लगी। देखते ही देखते सात सेकंड के अंदर तीन बड़े धमाके हुए। धमाकों की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की फैक्ट्रियों की दीवारें तक कांप उठीं और मजदूर घबराकर बाहर भागने लगे। इस धमाके ने 5 परिवारों के सपनों को खाक कर डाला, जो अच्छी जिंदगी के लिए करीब 1000 किलोमीटर दूर भिवाड़ी मजदूरी करने आए थे। धमाके के बाद मोतिहारी के इन परिवारों को अपनों के शव तक नहीं मिले। जो मिले वो कोयला- कंकाल की हालत में। फैक्ट्री में हमेशा लगा रहता था ताला बता दें कि फैक्ट्री में बारूद के ढेर पर काम करने वाले बिहार के मजदूरों का बीमा तक नहीं था। सभी मजदूरों को फैक्ट्री में बंद कर बाहर से ताला लगाकर पटाखा तैयार कराया जाता था। 20-30 हजार रुपए का लालच देकर दिन-रात काम करवाया जाता था। फैक्ट्री में ही उनके खाने और सोने की व्यवस्था की गई थी, ताकि अवैध रूप से पटाखे बनने का मामला उजागर न हो जाए। हादसा इतना भयानक था कि श्रमिकों की हड्डियां तक पिघल गईं। मौके पर FSL टीम ने काफी मात्रा में पटाखे और बारूद जब्त किए हैं। वहीं, मृतकों में सिकारगंज के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, हरसिद्धि के मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश शामिल हैं। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए खबर… पहले घटना के दौरान की 2 तस्वीरें देखें… सरस्वती पूजा के बाद कमाने गए थे अभिषेक इस घटना की जानकारी मिलने के बाद मोतिहारी से दैनिक भास्कर की टीम उन घरों पर पहुंची, जहां के बेटा-पिता मजदूरी करने राजस्थान गए थे, लेकिन अब लौटकर कभी वापस नहीं आएंगे। सबसे पहले हमारी टीम मृतक अभिषेक के घर पहुंची। इस दौरान घर के बाहर वाले कमरे में पिता-बेटे और कुछ रिश्तेदार बैठे थे। सभी की आंखें नम थी। अभिषेक के बेटे छोटू ने बताया, पापा सरस्वती पूजा तक घर पर ही थे। मोतिहारी में पेंटिंग करते थे। उसी पैसे से पूरा घर चलता था। बहन की शादी के लिए कमाने गया था भाई जनवरी में पापा ने अपनी बहन (बुआ) की शादी पक्की की थी। 4 अप्रैल 2026 को शादी होने वाली थी। शादी के लिए पैसा कमाने के लिए वह बाहर गए थे। गांव के एक व्यक्ति उन्हें कपड़ा फैक्ट्री में काम दिलाने का कहकर राजस्थान ले गए थे। वहां, जाकर पापा को पता चला था कि पटाखा फैक्ट्री में काम करना है। होली में आने वाले थे घर छोटू ने आगे बताया, ‘रविवार की रात 12 बजे मेरी पिता से आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि होली या बुआ की शादी पर घर आऊंगा।’ अभिषेक के परिवार से बात करने के बाद हमारी टीम अमरेश कुमार के घर पहुंची। घर के बाहर चीख-पुकार मचा हुआ था। मां-बहन बार-बार बेहोश हो रही थी। भइया कहते थे पढ़ाई कर दरोगा बनना बहन शिवानी कुमारी ने बताया, ‘भइया अक्सर मुझसे कहते थे कि अच्छे से पढ़ाई-लिखाई करो और दरोगा बनो। पूरे घर का नाम रोशन करना। अगर ज्यादा पैसा कमाओगी तो मुझे भी भेज देना।’ इतना बोलते ही शिवानी अपने भाई को याद कर फूट-फूटकर रोने लगती है। शिवानी ने कहा, ‘भइया का फोन जमा होता था। इस वजह से उनसे फोन पर बात नहीं हो पाती थी।’ श्याम की मां नीतू देवी ने बताया, ‘वो इस साल अपनी दोनों बहनों की शादी करना चाहता था। इसी वजह से छठ के बाद बेटा कमाने के लिए निकला था। हमारे गांव के ही चंद-अभिनंद ने कहा था, राजस्थान चलो वहां कपड़ा फैक्ट्री में मजदूरी करना। जैसे ही वो भिवाड़ी पहुंचा वहां उसे पटाखा फैक्ट्री में ले जाया गया।’ फैक्ट्री का ताला बंद कर मजदूरी करवाया जाता था श्याम की मां ने आगे बताया, ‘सभी मजदूरों से फैक्ट्री में ताला बंद कर काम करवाया जाता था। फैक्ट्री में कपड़ा की जगह पटाखा बनाया जाता था। इसी वजह से शटर हमेशा बंद रहता था। सुबह 6 बजे एंट्री मिलती थी, तभी से सभी मजदूरों का फोन जमा करवा लिया जाता था। इसके बाद रात 9 बजे के बाद फोन मिलता था। 12 घंटे से ज्यादा मजदूरों से काम करवाया जाता था।’ श्याम की मां ने रोते-बिलखते कहा, ‘अब मैं अपनी बेटियों की शादी कैसे करूंगी। घर का इकलौता कमाने वाला बेटा चला गया। पहले वह प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता था। वहां कम सैलरी मिलती थी।’ 2005 में कपड़ा फैक्ट्री के नाम पर शुरू हुआ था काम बताया जा रहा है यह फैक्ट्री उद्योग विभाग में भी रजिस्टर्ड नहीं थी। फैक्ट्री 2005 में राजेंद्र के नाम से आवंटित थी। उसने इसे किसी और को लीज पर दे रखा है। रीको से रेडीमेड गारमेंट के नाम पर लाइसेंस लिया गया था। 2011 में इसका संचालन शुरू हुआ, लेकिन बाद में बंद कर दिया गया। 2017 में मेटल इंडस्ट्री शुरू हुई। वह भी बंद हो गई। अब पटाखा बनाया जा रहा था। रीको भी आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराएगा। राजस्थान पुलिस ने मैनेजर अभिनंदन तिवारी को हिरासत में ले लिया है। अभिनंदन का कहना है कि 10-15 मजदूर फैक्ट्री में थे। फिलहाल, असली लाइसेंस धारक और लीज पर फैक्ट्री लेने वालों की तलाश में छापेमारी की जा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक जताया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने मृतक आश्रितों को दो-दो लाख रुपए मुआवजा देने का ऐलान किया है। 40-50 कैरेट कच्चा बारूद बरामद हादसे में घायल मजदूर नितेश ने बताया, एक कमरे में मशीन चलती थी। दूसरे में 40-50 कैरेट कच्चा माल (बारूद) रखा था। सोमवार सुबह इसी में अचानक तेज धमाका हुआ तब नितेश पैकिंग एरिया में था। बाहर निकलने से बच गया। नितेश के अनुसार मोतिहारी का एक आदमी बिहार से लेबर लाता था। फैक्ट्री में अंदर-बाहर से ताला लगाकर काम होता था। अंदर 8 से 10 टेबल पर बारूद भरा जाता था। हादसे के समय हर टेबल पर 5 से 10 किलो बारूद का मिश्रण रखा था। पास में 40 से अधिक कट्टे व 10-15 कार्टन तैयार माल रखा था, जो आग में जलकर राख हो गया। इस तरह से तैयार किया जाता था पटाखा फैक्ट्री में काम करने वाले बिहार के एक नाबालिग मजदूर ने अवैध पटाखा बनाने के तौर-तरीकों का खुलासा किया। नाबालिग ने बताया- यहां बजरी को सुखाया जाता है, जिसमें चांदी का घोल भी मिलाया जाता है। फिर उसे मशीन में डालकर पटाखे बनाकर पैक किया जाता है। नाबालिग मजदूर ने कहा- ‘मुझे इस फैक्ट्री में काम करते हुए सात साल हो गए हैं। मैं आज काम पर नहीं गया। मैं खाटू श्यामजी गया था। हमें पैकेट के हिसाब से 100 रुपए मिलते थे। महीने में लगभग 30 हजार रुपए कमा लेता था। फैक्ट्री मालिक को कभी नहीं देखा।’ 27 लोग फैक्ट्री में काम करते थे, बाकी कहां? नाबालिग ने बताया, ‘फैक्ट्री में 27 लोग काम करते थे। उनमें से चार लोग आग लगने के बाद किचन के कमरे से बाहर भागे। बाकी दो-चार छुट्टी पर हो सकते हैं। आशंका है कि फैक्ट्री में काम करने वालों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है।’ लाश बनी कंकाल, बॉडी पार्ट्स इकट्ठे किए घटना खुशखेड़ा करौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह करीब 9 बजे घटी है। यहां स्थित केमिकल और पटाखा बनाने वाली फैक्ट्री में धमाका हुआ था। धमाके की आवाज पूरे इंडस्ट्रियल एरिया में सुनाई दी। आसपास की फैक्ट्रियों में काम कर रहे लोग बाहर निकल आए। देखते ही देखते फैक्ट्री से धुआं और आग की लपटें उठने लगीं थी। हालांकि, घटना के करीब 3 घंटे बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक 8 लोगों की जान जा चुकी थी।  

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