प्रदेश में तेंदुओं की सबसे ज्यादा आबादी वाले उदयपुर जिले में आए दिन वन्यजीव और इंसानों के टकराव के मामले सामने आ रहे हैं। तेंदुए के हमले में इंसान की मौत होने पर अभी 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जा रहा है। जबकि, देश के कई अन्य राज्यों में 15 से 25 लाख रुपए तक का मुआवजा दिया जा रहा है। कई राज्य तो पीड़ित के इलाज के लिए भी लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि प्रदेश में दी जाने वाली यह राशि पीड़ित परिवारों के उम्रभर के घावों पर मरहम लगाने के लिए भी पर्याप्त नहीं है। उदयपुर में वर्ष 2024 में आदमखोर तेंदुए के हमले में अब तक की सर्वाधिक 9 मौतें हुई थीं। इनमें 8 मौतें एक माह में गोगुंदा क्षेत्र में हुई थीं। झाड़ोल क्षेत्र में भी एक मौत हुई थी। साल 2024 में उदयपुर में 9 लोगों ने गंवाई जान, 8 गोगुंदा में गत वर्ष नवंबर में घायल मां व बेटी, मदद का अब तक इंतजार पिछले साल 2 नवंबर को कुराबड़ रेंज के बेमला गांव में तेंदुए के हमले में मां-बेटी घायल हो गई थीं। इन्हें अब तक मदद नहीं मिल पाई है। विभाग का कहना है कि प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर इन्हें मुआवजा मिलेगा। गत वर्ष पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में अनुग्रह राशि बढ़ाई थी। इसके तहत मौत या स्थायी अपंगता पर 10 लाख रुपए, गंभीर चोट पर 2 लाख रुपए, मामूली चोट पर इलाज के लिए 25 हजार रुपए तक की सहायता राशि तय की गई। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रदेश में भी न्यूनतम 10 लाख रुपए मुआवजा तत्काल लागू किया जाना चाहिए, ताकि पीड़ित परिवारों को वास्तविक राहत मिल सके। इन राज्यों में ये मुआवजा


