पत्थरों-झाड़ियों के नीचे ढका शव डेढ़ महीने बाद मिला:ग्रामीणों ने ढूंढी सूखी हुई बॉडी, प्रयागराज में दर्ज थी गुमशुदगी की रिपोर्ट, पुलिस रही नाकाम

पत्थरों-झाड़ियों के नीचे ढका शव डेढ़ महीने बाद मिला:ग्रामीणों ने ढूंढी सूखी हुई बॉडी, प्रयागराज में दर्ज थी गुमशुदगी की रिपोर्ट, पुलिस रही नाकाम

प्रयागराज में कोरांव थाना क्षेत्र के छापर हरदौन गांव में एक महीने पहले लापता हुए युवक का शव तैमूर पहाड़ी के जंगल में पत्थरों और झाड़ियों से ढका हुआ मिला है। जितेंद्र कुमार पुत्र लोलर आदिवासी, निवासी छापर हरदौन, 3 जनवरी की रात से घर से लापता था। मंगलवार शाम को उसका शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। घटना से जुड़ी तस्वीरें चरवाहों ने बताई दुर्गंध आने की बात परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार को जंगल में जितेंद्र की तलाश शुरू की थी। इसी दौरान बकरी चराने वाले चरवाहों ने एक खदान से दुर्गंध आने की सूचना दी। जब ग्रामीण और परिजन खदान के पास पहुंचे, तो वहां से तेज दुर्गंध आ रही थी। पुलिस की मौजूदगी में पत्थरों और झाड़ियों को हटाकर जितेंद्र का कंकालनुमा शव बाहर निकाला गया। निकाला कंकालनुमा सूखा शव शव पूरी तरह से सूख चुका था और उस पर चोट के निशान भी थे। शव के पास मृतक का कोट और एक पैर में जूता भी बरामद हुआ। इन परिस्थितियों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि जितेंद्र की हत्या लगभग एक महीने पहले कर दी गई थी और उसके शव को जंगल की खदान में पत्थरों व झाड़ियों से ढक दिया गया था। मजदूरी करता था जितेन्द्र जितेंद्र चार भाइयों में तीसरे नंबर का था और उसकी शादी नहीं हुई थी। चारों भाई मजदूरी करके गुजारा करते थे। जबकि पिता लोलर एक किसान है। पुलिस पर छानबीन न करने का आरोप शव मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस के प्रति आक्रोश व्यक्त किया। मां और बहन सहित अन्य परिजनों का कहना था कि सोमवार को भी पुलिस से बात हुई थी, तब पुलिस ने बेटे के जिंदा होने की बात कही थी। सूखा हुआ शव मिलने से परिजनों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी देखी गई। 15 दिन पहले मामले में गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई थी। पुलिस और परिजन दोनों उसकी तलाश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाया गया है-राकेश कुमार वर्मा, थाना प्रभारी कोरांव समाचार लिखे जाने तक परिजन शव पुलिस को नहीं सौंप रहे थे और देर शाम तक हंगामा जारी रहा।

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