राजस्थान के भिवाड़ी में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मारे गए सभी मजदूरों की पहचान हो गई है। ये सभी मोतिहारी के रहने वाले थे। धमाका इतना खतरनाक था कि सातों मजदूरों की लाशें 20 से 30 मीटर दूर तक जाकर गिरी थी। किसी का हाथ कहीं और मिला, किसी का पैर दूर जाकर गिरा… जो मिला वो सिर्फ कंकाल जैसे जले हुए टुकड़े थे। दो दिनों तक बॉडी पार्ट्स को जोड़कर सभी के दातों से DNA टेस्ट किया गया। अब यही बचे हुए टुकड़े काली पन्नियों में पैक कर मोतिहारी लाए जाएंगे। शुक्रवार को शव गांव पहुंचेगा। इसके बाद इन्हीं पन्नियों में सभी का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। मजदूरों की मां-पत्नियों और बच्चों के जुबान पर सिर्फ एक ही बात है, अब हम उन्हें अंतिम बार भी नहीं देख पाएंगे। हम अपने बेटे, पति या पिता का चेहरा देखे बिना कैसे पहचान करेंगे? मृतकों का शव कैसे पहुंचेगा गांव? क्या मृत शरीर से भी परिजन नहीं लगा पाएंगे गले? सभी का कैसे होगा अंतिम संस्कार? दरअसल, मृतकों में मोतिहारी के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश और मंटू कुमार शामिल हैं। इनके घरों में पिछले तीन दिनों से चूल्हे तक नहीं जले हैं। घरों में सिर्फ मातम, सन्नाटा और चीखें हैं। परिवार को बंद पॉलिथिन में रखे शवों के आने का इंतजार है। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… बॉडी पाट्स को अलग-अलग काली पन्नी में भरकर लाया जाएगा 16 फरवरी(सोमवार) को राजस्थान के भिवाड़ी में सुबह 9 बजे पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया। इस धमाका में 7 मजदूरों की मौत हो गई। शवों को चिथड़े होने के कारण कई परिवार वालों को DNA मैच किया गया। इसमें से सभी शवों की पहचान बुधवार की शाम मोतिहारी के निवासी के रूप में हुई। हालांकि, बॉडी के टुकड़े-टुकड़े होने की वजह से सभी पाट्स पूरी तरह से नहीं मिल पाएं हैं। किसी शव के 10 टुकड़े हुए हैं, तो किसी का सिर्फ सिर बचा है। बाकी के पाट्स गायब हैं। इस वजह से घटनास्थल से FSL की टीम द्वारा कलेक्ट किए गए बॉडी पाट्स को अलग-अलग काली पन्नी में भरकर परिवार वालों को सौंपा जाएगा। वहीं, शव का इंतजार कर रहे परिवार वालों का कहना है, 3 दिनों से हमारे घर में चूल्ह तक नहीं जला है। परिवार के बच्चे से लेकर बूढ़े तक भूखे-प्यासे बैठे हैं। मासूमों को बिस्किट के सहारे रखा जा रहा है। टुकड़ों में पहुंचे शव की घरवाले कैसे करेंगे पहचान मृतक मंटू के फूफा का कहना है, ‘हमारे घर का हालत बहुत खराब है। भतीजे के शव को पॉलिथिन में भेजा जाएगा। पूरा शरीर नहीं आएगा? अब हम अपने बच्चे को आखिरी बार कैसे देखें?’ मंटू की मां विंदा देवी की स्थिति और भी खराब हो गई है। वे जोर-जोर से रोते हुए कहती हैं, ‘मेरा बेटा एक महीना पहले ही गया था। वहां से फोन पर कहता था कि बारूद के बीच काम होता है, हमारा मन नहीं लगता है। वो काम छोड़कर घर आने वाला था, लेकिन अब टुकड़ों में पॉलिथिन में बंद उसका शव घर आएगा।’ यह कहते-कहते वे बेहोश हो गईं। इसी गांव में दूसरा घर रवि का है, जहां मातम और भय दोनों छाया हुआ है। उसकी मां रीता देवी चीखते हुए बार-बार एक ही बात कहती रहीं, टुकड़ा शरीर आएगा? ई उम्र में हमका का देखे के रह गइल? रवि के पिता रामदत्त राम को संभालना मुश्किल हो रहा था। वह बार-बार कह रहे थे, बच्चा को कंधा देने के लिए शरीर चाहिए… यह कैसी मौत है? दीवारों में धंसे शव गांव के लोग बताते हैं, विस्फोट इतना भीषण था कि मजदूरों के शरीर कई दिशाओं में बिखर गए। कुछ अवशेष दीवारों में धंसे मिले, कुछ मशीनों के ऊपर। शवों की पहचान डीएनए और कपड़ों के टुकड़ों से हुई है। मंटू घर लौटकर अपने पिता के लिए छोटी किराना दुकान खोलना चाहता था। वहीं, रवि एक मोटरसाइकिल खरीदने और अपने बूढ़े मां-बाप के लिए पक्का घर बनाने का सपना देख रहा था। अब वही सपने पॉलिथिन के साथ गांव लौटेंगे। गरीब के बच्चे ही क्यों मरते हैं? इस हादसे को देख कई परिवारों ने तय कर लिया है कि वे अब अपने बच्चों को खतरे वाली मजदूरी पर बाहर नहीं भेजेंगे। लोग बार-बार कह रहे हैं कि यह सिर्फ हादसा नहीं, गरीब मजदूरों के साथ किया गया जुल्म है। गांव में हर तरफ एक ही बात दोहराई जा रही है, सरकार ऐसी फैक्ट्रियों को बंद क्यों नहीं कराती? क्यों गरीब के बच्चे ही मरते हैं? हादसे के बाद की PHOTOS… भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा कारौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह केमिकल फैक्ट्री में 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। केमिकल फैक्ट्री में जले हुए शवों को स्ट्रेचर की मदद से बाहर लाया गया। मजदूरों के कई अंग पूरी तरह जल चुके थे। केमिकल फैक्ट्री में जले शवों को कंबल से ढक कर रखा गया है। इनकी पहचान नहीं हो पा रही है।
रेस्क्यू टीम को केमिकल फैक्ट्री के अंदर से पटाखे और बारूद मिला है। कहा जा रहा है कि यहां अवैध तरीके से पटाखे बनाए जा रहे थे। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 5 मजदूर मोतिहारी (बिहार) के रहने वाले थे, जिनके परिवार वाले यहीं उनके साथ किराए के मकानों में रह रहे थे। राजस्थान के भिवाड़ी में हुए भीषण पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में मारे गए सभी मजदूरों की पहचान हो गई है। ये सभी मोतिहारी के रहने वाले थे। धमाका इतना खतरनाक था कि सातों मजदूरों की लाशें 20 से 30 मीटर दूर तक जाकर गिरी थी। किसी का हाथ कहीं और मिला, किसी का पैर दूर जाकर गिरा… जो मिला वो सिर्फ कंकाल जैसे जले हुए टुकड़े थे। दो दिनों तक बॉडी पार्ट्स को जोड़कर सभी के दातों से DNA टेस्ट किया गया। अब यही बचे हुए टुकड़े काली पन्नियों में पैक कर मोतिहारी लाए जाएंगे। शुक्रवार को शव गांव पहुंचेगा। इसके बाद इन्हीं पन्नियों में सभी का अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा। मजदूरों की मां-पत्नियों और बच्चों के जुबान पर सिर्फ एक ही बात है, अब हम उन्हें अंतिम बार भी नहीं देख पाएंगे। हम अपने बेटे, पति या पिता का चेहरा देखे बिना कैसे पहचान करेंगे? मृतकों का शव कैसे पहुंचेगा गांव? क्या मृत शरीर से भी परिजन नहीं लगा पाएंगे गले? सभी का कैसे होगा अंतिम संस्कार? दरअसल, मृतकों में मोतिहारी के नारायणपुर के सुजांत, घोड़ासहन के मिंटू, मटियरिया गांव के अजीत, रवि, श्याम और मुरारूपुर के अमरेश और मंटू कुमार शामिल हैं। इनके घरों में पिछले तीन दिनों से चूल्हे तक नहीं जले हैं। घरों में सिर्फ मातम, सन्नाटा और चीखें हैं। परिवार को बंद पॉलिथिन में रखे शवों के आने का इंतजार है। अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… बॉडी पाट्स को अलग-अलग काली पन्नी में भरकर लाया जाएगा 16 फरवरी(सोमवार) को राजस्थान के भिवाड़ी में सुबह 9 बजे पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हो गया। इस धमाका में 7 मजदूरों की मौत हो गई। शवों को चिथड़े होने के कारण कई परिवार वालों को DNA मैच किया गया। इसमें से सभी शवों की पहचान बुधवार की शाम मोतिहारी के निवासी के रूप में हुई। हालांकि, बॉडी के टुकड़े-टुकड़े होने की वजह से सभी पाट्स पूरी तरह से नहीं मिल पाएं हैं। किसी शव के 10 टुकड़े हुए हैं, तो किसी का सिर्फ सिर बचा है। बाकी के पाट्स गायब हैं। इस वजह से घटनास्थल से FSL की टीम द्वारा कलेक्ट किए गए बॉडी पाट्स को अलग-अलग काली पन्नी में भरकर परिवार वालों को सौंपा जाएगा। वहीं, शव का इंतजार कर रहे परिवार वालों का कहना है, 3 दिनों से हमारे घर में चूल्ह तक नहीं जला है। परिवार के बच्चे से लेकर बूढ़े तक भूखे-प्यासे बैठे हैं। मासूमों को बिस्किट के सहारे रखा जा रहा है। टुकड़ों में पहुंचे शव की घरवाले कैसे करेंगे पहचान मृतक मंटू के फूफा का कहना है, ‘हमारे घर का हालत बहुत खराब है। भतीजे के शव को पॉलिथिन में भेजा जाएगा। पूरा शरीर नहीं आएगा? अब हम अपने बच्चे को आखिरी बार कैसे देखें?’ मंटू की मां विंदा देवी की स्थिति और भी खराब हो गई है। वे जोर-जोर से रोते हुए कहती हैं, ‘मेरा बेटा एक महीना पहले ही गया था। वहां से फोन पर कहता था कि बारूद के बीच काम होता है, हमारा मन नहीं लगता है। वो काम छोड़कर घर आने वाला था, लेकिन अब टुकड़ों में पॉलिथिन में बंद उसका शव घर आएगा।’ यह कहते-कहते वे बेहोश हो गईं। इसी गांव में दूसरा घर रवि का है, जहां मातम और भय दोनों छाया हुआ है। उसकी मां रीता देवी चीखते हुए बार-बार एक ही बात कहती रहीं, टुकड़ा शरीर आएगा? ई उम्र में हमका का देखे के रह गइल? रवि के पिता रामदत्त राम को संभालना मुश्किल हो रहा था। वह बार-बार कह रहे थे, बच्चा को कंधा देने के लिए शरीर चाहिए… यह कैसी मौत है? दीवारों में धंसे शव गांव के लोग बताते हैं, विस्फोट इतना भीषण था कि मजदूरों के शरीर कई दिशाओं में बिखर गए। कुछ अवशेष दीवारों में धंसे मिले, कुछ मशीनों के ऊपर। शवों की पहचान डीएनए और कपड़ों के टुकड़ों से हुई है। मंटू घर लौटकर अपने पिता के लिए छोटी किराना दुकान खोलना चाहता था। वहीं, रवि एक मोटरसाइकिल खरीदने और अपने बूढ़े मां-बाप के लिए पक्का घर बनाने का सपना देख रहा था। अब वही सपने पॉलिथिन के साथ गांव लौटेंगे। गरीब के बच्चे ही क्यों मरते हैं? इस हादसे को देख कई परिवारों ने तय कर लिया है कि वे अब अपने बच्चों को खतरे वाली मजदूरी पर बाहर नहीं भेजेंगे। लोग बार-बार कह रहे हैं कि यह सिर्फ हादसा नहीं, गरीब मजदूरों के साथ किया गया जुल्म है। गांव में हर तरफ एक ही बात दोहराई जा रही है, सरकार ऐसी फैक्ट्रियों को बंद क्यों नहीं कराती? क्यों गरीब के बच्चे ही मरते हैं? हादसे के बाद की PHOTOS… भिवाड़ी स्थित खुशखेड़ा कारौली इंडस्ट्रियल एरिया में सोमवार सुबह केमिकल फैक्ट्री में 7 मजदूर जिंदा जल गए, जबकि 4 गंभीर रूप से झुलस गए। केमिकल फैक्ट्री में जले हुए शवों को स्ट्रेचर की मदद से बाहर लाया गया। मजदूरों के कई अंग पूरी तरह जल चुके थे। केमिकल फैक्ट्री में जले शवों को कंबल से ढक कर रखा गया है। इनकी पहचान नहीं हो पा रही है।
रेस्क्यू टीम को केमिकल फैक्ट्री के अंदर से पटाखे और बारूद मिला है। कहा जा रहा है कि यहां अवैध तरीके से पटाखे बनाए जा रहे थे। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। 5 मजदूर मोतिहारी (बिहार) के रहने वाले थे, जिनके परिवार वाले यहीं उनके साथ किराए के मकानों में रह रहे थे।


