मथुरा के कलेक्ट्रेट सभागार में रविवार को प्रभारी मंत्री संदीप सिंह ने एक पत्रकार वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने संसद द्वारा हाल ही में पारित “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025” को ग्रामीण भारत के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया। प्रभारी मंत्री ने जानकारी दी कि इस नए अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को मिलने वाले रोजगार के दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है। उनका कहना था कि इससे मेहनतकश ग्रामीण समाज को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि अब बेरोजगारी भत्ता एक वास्तविक कानूनी अधिकार बन गया है। यदि काम मांगने पर रोजगार उपलब्ध नहीं होता है, तो बेरोजगारी भत्ता स्वतः प्राप्त होगा। पहले की व्यवस्था में यह प्रावधान लगभग असंभव था। मंत्री ने स्पष्ट किया कि मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन का मुआवजा मजदूरी के साथ दिया जाएगा। इस प्रावधान से पारदर्शिता बढ़ेगी और श्रमिकों को उनका पूरा हक समय पर मिल सकेगा। अधिनियम के तहत कार्यों की योजना अब ग्राम सभा स्तर पर तय की जाएगी। इसके साथ ही, ग्राम पंचायतें अपनी विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी। इस अधिनियम में चार प्रमुख श्रेणियों के कार्यों पर विशेष जोर दिया गया है। इनमें जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले कार्य शामिल हैं। प्रभारी मंत्री ने बताया कि विभिन्न विभागों के एकीकरण से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और विकास कार्यों में अपेक्षित गति आएगी। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि मनरेगा के तहत चल रहे सभी कार्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी भी कार्य में रुकावट नहीं आएगी। नए अधिनियम के लागू होने से रोजगार के अवसर और मजदूरी दरें दोनों में वृद्धि होने की उम्मीद है। विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर जवाब देते हुए संदीप सिंह ने कहा कि एसआईआर का कार्य पूरी तरह सही ढंग से चल रहा है। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग इस पर पैनी नजर बनाए हुए है और विपक्ष केवल आमजन को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है, जबकि कहीं भी किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है।


