बेगूसराय के तेघड़ा में 31 दिसंबर की देर शाम नक्सली दयानंद मालाकार का एनकाउंटर किया गया, उसकी पत्नी भी नक्सली है। एनकाउंटर खत्म होने के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान नक्सली के घर में एक महिला मिली थी। पुलिस ने महिला से पूछताछ की तो उसने अपना नाम सुमन देवी बताया। हालांकि, पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो ममता देवी बताया- वो दयानंद मालाकार की पत्नी है। दयानंद मालाकार और ममता देवी ने इंटरकास्ट मैरिज की थी। दयानंद माली जाति से आता था, जबकि ममता सहनी जाति की है। दोनों के बीच लंबे समय तक अफेयर चला। इसके बाद दोनों ने अपने-अपने परिजन से शादी की बात की, तो घरवालों ने इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ने मंदिर में शादी की थी। एनकाउंटर में मारे गए नक्सली दयानंद की पत्नी ममता देवी पर तेघड़ा और वीरपुर थाने में दो-दो मामले दर्ज हैं। चारों मामले 2007 और 2008 के हैं। दर्ज मामला हत्या, आर्म्स एक्ट, सीएल एक्ट और विस्फोटक जैसे अपराध के है। ममता में वो जेल भी जा चुकी है। पहले जानिए, दयानंद और उसकी पत्नी ममता की प्रेम कहानी साल 1999… बेगूसराय के हामोडीह के रहने वाले योगेंद्र मालाकार का बेटा दयानंद मालाकार 19 साल का था। हामोडीह के पड़ोस में नोनपुर गांव है, जहां उस वक्त कई नक्सली रहते थे। 19 साल की उम्र में ही दयानंद मालाकार पड़ोस के गांव में नक्सलियों के संपर्क में आ गया। दयानंद ने घर परिवार को छोड़ दिया और नक्सलियों के साथ ही रहने लगा। नक्सलियों के साथ रहने के दौरान उसने संगठन के बारे में जाना और समझा। इसके बाद संगठन में शामिल होने के बाद 1999 में पहली हत्या की वारदात को अंजाम दिया। उसने खगड़िया के अलौली में हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। दयानंद मालाकार को संगठन और हथियार की जानकारी देने वाले रामभरोस सहनी को अपना गुरु बनाया। दयानंद का अपने गुरु के घर आना जाना बढ़ा। इस दौरान उसकी मुलाकात रामभरोस सहनी की बेटी ममता सहनी से हुई। चूंकि ममता की उम्र कम थी, लेकिन फिर भी वो नक्सली गतिविधियों में शामिल थी। दयानंद जब रामभरोस के घर आता था तो उसका ख्याल ममता करती थी। इसी दौरान दयानंद ने ममता से शादी की बात पूछी, जिसपर ममता ने कहा कि ये संभव नहीं है। तुम दूसरी जाति से हो, मेरी जाति अलग है। इसके बाद दयानंद ने कहा कि मुझे अपने परिवार से कोई मतलब नहीं है, चूंकि हम दोनों का काम एक ही है, तुम सिर्फ अपने पिता को मना लो, मेरी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, ममता ने अपने पिता से बात की तो उन्होंने मना कर दिया, लेकिन संगठन के अन्य लोगों की सहमति से दोनों ने मंदिर में शादी कर ली। इसके बाद दोनों साथ मिलकर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने लगे। शादी के बाद दोनों ने नोनपुर गांव में एक जमींदार की जमीन पर अपने सहयोगियों के साथ जबरदस्ती लाल झंडा गाड़ कर कब्जा कर लिया और झोपड़ी बनाकर साथ रहने लगे। उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी की कमान संभाल रहा था दयानंद ममता से शादी के बाद दोनों नक्सली गतिविधियों और संगठन में काफी सक्रिय हो गए। फिर संगठन ने दयानंद को उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी की कमान सौंप दी। इसके बाद दयानंद बेगूसराय से लेकर खगड़िया और मुजफ्फरपुर जिलों में नक्सली घटनाओं को अंजाम देने लगा। साल 2024 में दर्ज की गई थी आखिरी FIR दयानंद के खिलाफ आखिरी FIR साल 2024 में छौड़ाही थाने में दर्ज कराई गई थी। दरअसल, दयानंद अपने साथियों के साथ 3 बाइक से छौड़ाही थाने के वरैपुरा गांव में 16 मार्च 2024 की रात पहुंचा था। दयानंद और उसके साथी हथियार से लैस थे और पुलिस की वर्दी में थे। सभी ईंट भट्ठे पर पहुंचे और 1 लाख रुपए लेवी मांगी थी। 10 दिन में नहीं देने पर दो चिमनी को उड़ा देने की धमकी दी थी। ईंट भट्ठे के मालिक ने लेवी न देकर इस संबंध में मामला दर्ज करा दिया, तभी से दयानंद पुलिस के रडार पर था। बेगूसराय को 2018 में नक्सल मुक्त जिला घोषित होने के बाद उसकी इस गतिविधि पर राज्य से लेकर सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी तक की नजर थी। NIA समेत अन्य एजेंसी छौड़ाही में जांच करने आई थी। उसे लगातार रडार पर रखा जा रहा था। नक्सली दयानंद के पास से पर्ची मिली थी, जिस पर खर्च का हिसाब-किताब लिखा था दयानंद पर 20 से अधिक मामले, 50 से अधिक में शामिल, लेकिन नामजद नहीं दयानंद के खिलाफ बरौनी थाना, तेघड़ा थाना, चेरिया बरियारपुर थाना, नावकोठी थाना, वीरपुर थाना, खगड़िया जिला के अलौली थाना और मुजफ्फरपुर रेल थाने में अलग-अलग कुल 20 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 50 से अधिक अपराधी गतिविधियां वो शामिल था। लेकिन उसमें नामजद प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। एनकाउंटर के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उसके हिसाब किताब भी बरामद किया है। 27 दिसंबर 2025 को लिखे लेटर कामरेड घुटु जी एवं जोनल सेक्रेटरी शंभू जी को लाल सलाम करते हुए लिखा गया था, जिसमें दिनकर के 4 सितंबर 2025 को जेल से बाहर आने और चुनाव के दौरान पुलिस की गतिविधि तेज होने के कारण जेल से निकलने में देरी होने के लिए माफी मांगी गई है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए एनकाउंटर वाले रात क्या हुआ था? मुठभेड़ में शामिल एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 31 दिसंबर को STF को सूचना मिली थी कि वांटेड नक्सली दयानंद अपने घर पर आया हुआ है। दयानंद अपने साथी नक्सलियों के साथ मिलकर किसी बड़े वारदात को अंजाम देने की प्लानिंग कर रहा है। गुप्त सूचना को वेरिफाई किया गया। जब सूचना की पुष्टि हो गई तो STF के ARG, SOG-3, कमांडो, बेगूसराय जिला DIU अभियान आदि की स्पेशल टीम बनाई गई। दयानंद के घर से करीब 1 किलोमीटर पहले मैदावभनगामा-पकठौल सड़क पर टीम 2 हिस्सों में बंट गई। एक टीम के 9 पुलिसकर्मी तीन बाइक पर सवार होकर खेत के रास्ते से नक्सली दयानंद के घर के नजदीक पहुंचे। दूसरी टीम गांव के मुख्य सड़क से अंदर दाखिल हुई। कारबाइन, पिस्टल और इंसास से फायरिंग करने लगे नक्सली पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जैसे ही दयानंद और उसके साथी नक्सलियों ने पुलिस की टीम को देखा, ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। नक्सलियों के पास कारबाइन, पिस्टल और इंसास राइफल थी। नक्सलियों की ओर से की गई फायरिंग के बाद पुलिसकर्मी संभले और पुलिस की एक टीम ने उत्तर-पूर्व जबकि दूसरी टीम ने दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर से मोर्चा थाम लिया। पुलिस ने नक्सलियों को जब कानून हाथ में नहीं लेने और गोलीबारी बंद कर आत्मसमर्पण करने को कहा तो सभी नक्सली ‘लाल सलाम जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगे। एनकाउंटर में मारा गया दयानंद मालाकार कारबाइन से फायरिंग कर रहा था। पुलिस की जवाबी कार्रवाई के बीच गांव के लोगों ने ‘गोली मारो’ चिल्लाने लगे पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हम लोगों ने एके-47 और अत्याधुनिक हथियारों के साथ जवाबी कार्रवाई करना शुरू किया। इसके तुरंत बाद गांव के लोगों ने नक्सलियों से हमें निशाना बनाने की बात कहकर ‘गोली मारो, गोली मारो’ कहकर चिल्लाने लगे। हम लोगों ने बिना किसी परवाह के ताबड़तोड़ फायरिंग की। इसी दौरान 3-4 नक्सली सरसों के खेत और बगीचे का फायदा उठाकर भाग निकले और फायरिंग बंद हो गई। इसके बाद पुलिस की टीम जब दयानंद के घर में पहुंची तो वह खून से लथपथ मरा पड़ा था। इस बीच सूचना मिलते ही आसपास की पुलिस और अधिकारी भी पहुंच चुके थे। घटनास्थल की घेराबंदी कर दिया गया। डॉक्टर, FSL की टीम और मजिस्ट्रेट आदि पहुंचे। दयानंद को लगी दो गोलियां, मौके से 17 खोखा बरामद पुलिस अधिकारी के मुताबिक, घटनास्थल से 17 खोखा बरामद किया गया। दयानंद को दो गोलियां लगी थी, दोनों गोलियां शरीर के आरपार हो गई थी। सीना में गोली लगने से लंग्स और हर्ट डैमेज हो गया। गोली इस दोनों अंग को डैमेज करते हुए पीछे से निकल गई पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दयानंद की लाश के पास से कारबाइन, दो मैगजीन, पिस्टल, इंसास और गोलियां बरामद की गई। जब लाश की तलाशी ली गई तो उसके पॉकेट से नक्सली लेवी का पर्चा और लेवी के पैसे का हिसाब-किताब बरामद किया गया। लाश बरामदगी के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान फूस एवं एस्बेस्टस वाले घर से एक महिला और एक पुरुष की बरामदगी की गई। महिला ने अपना नाम सुमन देवी तो पुरुष ने अपना नाम रंजीत मालाकार बताया। आसपास के लोगों से महिला के संबंध में पूछताछ किया गया तो पता चला कि इसका नाम सुमन नहीं ममता देवी है और दयानंद मालाकार की पत्नी है। पूछताछ में नक्सली दयानंद की पत्नी ने कबूला अपना जुर्म पुलिस ने दयानंद की पत्नी ममता से पूछताछ की तो पता चला कि ये भी कई नक्सली कांड में शामिल रही है और जेल भी जा चुकी है। ममता देवी स्वीकार किया है कि नक्सलियों के भागने में मदद की है। ममता के साथ नक्सली रंजीत भी गिरफ्तार है, जिससे पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। बेगूसराय के तेघड़ा में 31 दिसंबर की देर शाम नक्सली दयानंद मालाकार का एनकाउंटर किया गया, उसकी पत्नी भी नक्सली है। एनकाउंटर खत्म होने के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान नक्सली के घर में एक महिला मिली थी। पुलिस ने महिला से पूछताछ की तो उसने अपना नाम सुमन देवी बताया। हालांकि, पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो ममता देवी बताया- वो दयानंद मालाकार की पत्नी है। दयानंद मालाकार और ममता देवी ने इंटरकास्ट मैरिज की थी। दयानंद माली जाति से आता था, जबकि ममता सहनी जाति की है। दोनों के बीच लंबे समय तक अफेयर चला। इसके बाद दोनों ने अपने-अपने परिजन से शादी की बात की, तो घरवालों ने इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों ने मंदिर में शादी की थी। एनकाउंटर में मारे गए नक्सली दयानंद की पत्नी ममता देवी पर तेघड़ा और वीरपुर थाने में दो-दो मामले दर्ज हैं। चारों मामले 2007 और 2008 के हैं। दर्ज मामला हत्या, आर्म्स एक्ट, सीएल एक्ट और विस्फोटक जैसे अपराध के है। ममता में वो जेल भी जा चुकी है। पहले जानिए, दयानंद और उसकी पत्नी ममता की प्रेम कहानी साल 1999… बेगूसराय के हामोडीह के रहने वाले योगेंद्र मालाकार का बेटा दयानंद मालाकार 19 साल का था। हामोडीह के पड़ोस में नोनपुर गांव है, जहां उस वक्त कई नक्सली रहते थे। 19 साल की उम्र में ही दयानंद मालाकार पड़ोस के गांव में नक्सलियों के संपर्क में आ गया। दयानंद ने घर परिवार को छोड़ दिया और नक्सलियों के साथ ही रहने लगा। नक्सलियों के साथ रहने के दौरान उसने संगठन के बारे में जाना और समझा। इसके बाद संगठन में शामिल होने के बाद 1999 में पहली हत्या की वारदात को अंजाम दिया। उसने खगड़िया के अलौली में हत्या की वारदात को अंजाम दिया था। दयानंद मालाकार को संगठन और हथियार की जानकारी देने वाले रामभरोस सहनी को अपना गुरु बनाया। दयानंद का अपने गुरु के घर आना जाना बढ़ा। इस दौरान उसकी मुलाकात रामभरोस सहनी की बेटी ममता सहनी से हुई। चूंकि ममता की उम्र कम थी, लेकिन फिर भी वो नक्सली गतिविधियों में शामिल थी। दयानंद जब रामभरोस के घर आता था तो उसका ख्याल ममता करती थी। इसी दौरान दयानंद ने ममता से शादी की बात पूछी, जिसपर ममता ने कहा कि ये संभव नहीं है। तुम दूसरी जाति से हो, मेरी जाति अलग है। इसके बाद दयानंद ने कहा कि मुझे अपने परिवार से कोई मतलब नहीं है, चूंकि हम दोनों का काम एक ही है, तुम सिर्फ अपने पिता को मना लो, मेरी तरफ से कोई दिक्कत नहीं है। हालांकि, ममता ने अपने पिता से बात की तो उन्होंने मना कर दिया, लेकिन संगठन के अन्य लोगों की सहमति से दोनों ने मंदिर में शादी कर ली। इसके बाद दोनों साथ मिलकर नक्सली गतिविधियों में शामिल होने लगे। शादी के बाद दोनों ने नोनपुर गांव में एक जमींदार की जमीन पर अपने सहयोगियों के साथ जबरदस्ती लाल झंडा गाड़ कर कब्जा कर लिया और झोपड़ी बनाकर साथ रहने लगे। उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी की कमान संभाल रहा था दयानंद ममता से शादी के बाद दोनों नक्सली गतिविधियों और संगठन में काफी सक्रिय हो गए। फिर संगठन ने दयानंद को उत्तर बिहार मध्य जोनल कमेटी की कमान सौंप दी। इसके बाद दयानंद बेगूसराय से लेकर खगड़िया और मुजफ्फरपुर जिलों में नक्सली घटनाओं को अंजाम देने लगा। साल 2024 में दर्ज की गई थी आखिरी FIR दयानंद के खिलाफ आखिरी FIR साल 2024 में छौड़ाही थाने में दर्ज कराई गई थी। दरअसल, दयानंद अपने साथियों के साथ 3 बाइक से छौड़ाही थाने के वरैपुरा गांव में 16 मार्च 2024 की रात पहुंचा था। दयानंद और उसके साथी हथियार से लैस थे और पुलिस की वर्दी में थे। सभी ईंट भट्ठे पर पहुंचे और 1 लाख रुपए लेवी मांगी थी। 10 दिन में नहीं देने पर दो चिमनी को उड़ा देने की धमकी दी थी। ईंट भट्ठे के मालिक ने लेवी न देकर इस संबंध में मामला दर्ज करा दिया, तभी से दयानंद पुलिस के रडार पर था। बेगूसराय को 2018 में नक्सल मुक्त जिला घोषित होने के बाद उसकी इस गतिविधि पर राज्य से लेकर सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी तक की नजर थी। NIA समेत अन्य एजेंसी छौड़ाही में जांच करने आई थी। उसे लगातार रडार पर रखा जा रहा था। नक्सली दयानंद के पास से पर्ची मिली थी, जिस पर खर्च का हिसाब-किताब लिखा था दयानंद पर 20 से अधिक मामले, 50 से अधिक में शामिल, लेकिन नामजद नहीं दयानंद के खिलाफ बरौनी थाना, तेघड़ा थाना, चेरिया बरियारपुर थाना, नावकोठी थाना, वीरपुर थाना, खगड़िया जिला के अलौली थाना और मुजफ्फरपुर रेल थाने में अलग-अलग कुल 20 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 50 से अधिक अपराधी गतिविधियां वो शामिल था। लेकिन उसमें नामजद प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी। एनकाउंटर के बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस को उसके हिसाब किताब भी बरामद किया है। 27 दिसंबर 2025 को लिखे लेटर कामरेड घुटु जी एवं जोनल सेक्रेटरी शंभू जी को लाल सलाम करते हुए लिखा गया था, जिसमें दिनकर के 4 सितंबर 2025 को जेल से बाहर आने और चुनाव के दौरान पुलिस की गतिविधि तेज होने के कारण जेल से निकलने में देरी होने के लिए माफी मांगी गई है। अब सिलसिलेवार तरीके से जानिए एनकाउंटर वाले रात क्या हुआ था? मुठभेड़ में शामिल एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, 31 दिसंबर को STF को सूचना मिली थी कि वांटेड नक्सली दयानंद अपने घर पर आया हुआ है। दयानंद अपने साथी नक्सलियों के साथ मिलकर किसी बड़े वारदात को अंजाम देने की प्लानिंग कर रहा है। गुप्त सूचना को वेरिफाई किया गया। जब सूचना की पुष्टि हो गई तो STF के ARG, SOG-3, कमांडो, बेगूसराय जिला DIU अभियान आदि की स्पेशल टीम बनाई गई। दयानंद के घर से करीब 1 किलोमीटर पहले मैदावभनगामा-पकठौल सड़क पर टीम 2 हिस्सों में बंट गई। एक टीम के 9 पुलिसकर्मी तीन बाइक पर सवार होकर खेत के रास्ते से नक्सली दयानंद के घर के नजदीक पहुंचे। दूसरी टीम गांव के मुख्य सड़क से अंदर दाखिल हुई। कारबाइन, पिस्टल और इंसास से फायरिंग करने लगे नक्सली पुलिस अधिकारी के मुताबिक, जैसे ही दयानंद और उसके साथी नक्सलियों ने पुलिस की टीम को देखा, ताबड़तोड़ फायरिंग करने लगे। नक्सलियों के पास कारबाइन, पिस्टल और इंसास राइफल थी। नक्सलियों की ओर से की गई फायरिंग के बाद पुलिसकर्मी संभले और पुलिस की एक टीम ने उत्तर-पूर्व जबकि दूसरी टीम ने दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर से मोर्चा थाम लिया। पुलिस ने नक्सलियों को जब कानून हाथ में नहीं लेने और गोलीबारी बंद कर आत्मसमर्पण करने को कहा तो सभी नक्सली ‘लाल सलाम जिंदाबाद’ का नारा लगाने लगे। एनकाउंटर में मारा गया दयानंद मालाकार कारबाइन से फायरिंग कर रहा था। पुलिस की जवाबी कार्रवाई के बीच गांव के लोगों ने ‘गोली मारो’ चिल्लाने लगे पुलिस अधिकारी के मुताबिक, हम लोगों ने एके-47 और अत्याधुनिक हथियारों के साथ जवाबी कार्रवाई करना शुरू किया। इसके तुरंत बाद गांव के लोगों ने नक्सलियों से हमें निशाना बनाने की बात कहकर ‘गोली मारो, गोली मारो’ कहकर चिल्लाने लगे। हम लोगों ने बिना किसी परवाह के ताबड़तोड़ फायरिंग की। इसी दौरान 3-4 नक्सली सरसों के खेत और बगीचे का फायदा उठाकर भाग निकले और फायरिंग बंद हो गई। इसके बाद पुलिस की टीम जब दयानंद के घर में पहुंची तो वह खून से लथपथ मरा पड़ा था। इस बीच सूचना मिलते ही आसपास की पुलिस और अधिकारी भी पहुंच चुके थे। घटनास्थल की घेराबंदी कर दिया गया। डॉक्टर, FSL की टीम और मजिस्ट्रेट आदि पहुंचे। दयानंद को लगी दो गोलियां, मौके से 17 खोखा बरामद पुलिस अधिकारी के मुताबिक, घटनास्थल से 17 खोखा बरामद किया गया। दयानंद को दो गोलियां लगी थी, दोनों गोलियां शरीर के आरपार हो गई थी। सीना में गोली लगने से लंग्स और हर्ट डैमेज हो गया। गोली इस दोनों अंग को डैमेज करते हुए पीछे से निकल गई पुलिस अधिकारी के मुताबिक, दयानंद की लाश के पास से कारबाइन, दो मैगजीन, पिस्टल, इंसास और गोलियां बरामद की गई। जब लाश की तलाशी ली गई तो उसके पॉकेट से नक्सली लेवी का पर्चा और लेवी के पैसे का हिसाब-किताब बरामद किया गया। लाश बरामदगी के बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान फूस एवं एस्बेस्टस वाले घर से एक महिला और एक पुरुष की बरामदगी की गई। महिला ने अपना नाम सुमन देवी तो पुरुष ने अपना नाम रंजीत मालाकार बताया। आसपास के लोगों से महिला के संबंध में पूछताछ किया गया तो पता चला कि इसका नाम सुमन नहीं ममता देवी है और दयानंद मालाकार की पत्नी है। पूछताछ में नक्सली दयानंद की पत्नी ने कबूला अपना जुर्म पुलिस ने दयानंद की पत्नी ममता से पूछताछ की तो पता चला कि ये भी कई नक्सली कांड में शामिल रही है और जेल भी जा चुकी है। ममता देवी स्वीकार किया है कि नक्सलियों के भागने में मदद की है। ममता के साथ नक्सली रंजीत भी गिरफ्तार है, जिससे पूछताछ कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।


