उत्तर भारत की नाट्य संस्था ‘बफ्टा’ द्वारा आयोजित तीन दिवसीय ‘नाट्य निर्वाण’ उत्सव के दूसरे दिन भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। यह मंचन संत गाडगे प्रेक्षागृह में किया गया। शनिवार को दर्शकों से खचाखच भरे प्रेक्षागृह में दास्तानगोई के नए कलेवर और चंबल की महिलाओं के संघर्ष ने लोगों को झकझोर दिया। दिन की शुरुआत मशहूर शायर फैज अहमद फैज के जीवन पर आधारित दास्तान ‘हम देखेंगे’ से हुई। युवा निर्देशक शुभम तिवारी के निर्देशन में अजय जैन और गुंजन जैन ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से फैज की रूहानियत और उनकी क्रांतिकारी सोच को मंच पर जीवंत कर दिया। गायकी के बेजोड़ तालमेल पेश की यह प्रस्तुति परंपरागत दास्तानगोई से हटकर नए अंदाज और वेशभूषा में पेश की गई। फैज की गजलों और नज्मों के जरिए दर्शकों को भाव विभोर कर दिया गया। संगीत और गायकी के बेजोड़ तालमेल के बीच दर्शकों ने खड़े होकर कलाकारों का अभिवादन किया। यह अभिनय भोपाल के विख्यात रंगकर्मी आशीष पाठक द्वारा लिखित नाटक ‘अगरबत्ती’ का मंचन हुआ। 1981 के बहुचर्चित बहमई कांड की पृष्ठभूमि पर आधारित इस नाटक ने चंबल की महिलाओं के संघर्ष, उनकी पीड़ा और न्याय पाने की जिद्द को संजीदगी से दर्शाया। बड़ी कास्ट वाले इस नाटक ने जातिवाद और लैंगिक भेदभाव जैसे कड़वे सच पर तीखे सवाल उठाए। रोंगटे खड़े कर देने वाले दृश्यों, सटीक प्रकाश व्यवस्था और शानदार ध्वनि संयोजन ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कलाकारों के अभिनय ने लोगों की आंखें नम कर दीं। नाट्य उत्सव का समापन रविवार को होगा उत्सव के दूसरे दिन रंगमंच और फिल्मों की कई दिग्गज हस्तियां मौजूद रहीं। इनमें जावेद सिद्दीकी, सलीम आरिफ, अनिल रंजन भौमिक, बफ्टा के संस्थापक तारिक खान, अध्यक्ष डॉ. अफरोज जहां और लखनऊ के कई वरिष्ठ नाटककार शामिल थे। उनकी उपस्थिति ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।तीन दिवसीय नाट्य उत्सव का समापन रविवार को होगा, जिसमें जावेद सिद्दीकी और नादिरा बब्बर को सम्मानित किया जाएगा।


