Dark Underarms Causes: कई लोगों को अपने अंडरआर्म्स या प्राइवेट एरिया के डार्क होने की वजह से शर्मिंदगी महसूस होती है। अक्सर लोग तुरंत केमिकल पील या लेजर ट्रीटमेंट कराने का सोचते हैं। लेकिन क्या हर बार ये ट्रीटमेंट जरूरी होते हैं? या फिर बिना वजह कराने से त्वचा को नुकसान भी हो सकता है?
त्वचा रोग विशेषज्ञ Dr Gurveen Waraich Garekar ने Instagram पर इस बारे में जरूरी जानकारी शेयर की और कुछ आम गलतफहमियां दूर कीं।
क्या डार्क अंडरआर्म्स हमेशा समस्या होते हैं?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि अंडरआर्म्स का थोड़ा गहरा रंग होना बिल्कुल सामान्य है। शरीर के कुछ हिस्से जैसे अंडरआर्म्स और प्राइवेट एरिया बाकी त्वचा से थोड़े डार्क होते ही हैं। इसलिए हल्की डार्कनेस कोई बीमारी नहीं है और हर बार इलाज की जरूरत भी नहीं होती।
अंडरआर्म्स डार्क होने के असली कारण
अगर त्वचा जरूरत से ज्यादा काली दिख रही है, तो उसके पीछे कुछ खास कारण हो सकते हैं। इलाज तभी असर करेगा जब असली वजह पता हो।
इंसुलिन रेजिस्टेंस
पीसीओएस, डायबिटीज या वजन बढ़ने से शरीर में इंसुलिन का संतुलन बिगड़ सकता है। इससे त्वचा पर डार्क पैच बनने लगते हैं। ऐसे में क्रीम या लेजर से ज्यादा जरूरी है लाइफस्टाइल सुधारना, हेल्दी डाइट, वजन कंट्रोल और नियमित एक्सरसाइज।
बैक्टीरियल या फंगल इन्फेक्शन
इन्फेक्शन भी त्वचा को काला कर सकता है। इस स्थिति में डॉक्टर दवाइयों या एंटीफंगल क्रीम से इलाज करते हैं। सिर्फ स्किन ट्रीटमेंट कराने से फायदा नहीं मिलता।
एलर्जी या स्किन इरिटेशन
डियोडरेंट, परफ्यूम या कपड़े के फैब्रिक से एलर्जी होने पर त्वचा में जलन और डार्कनेस बढ़ सकती है। ऐसे मामलों में केमिकल पील या लेजर करवाने से समस्या और खराब हो सकती है।
पोस्ट-इन्फ्लेमेटरी हाइपरपिगमेंटेशन
गलत शेविंग, ज्यादा रगड़ या वैक्सिंग से जलने पर त्वचा काली पड़ सकती है। इस स्थिति में डॉक्टर के अनुसार पील या लेजर ट्रीटमेंट असरदार हो सकते हैं।
क्या हर किसी को लेजर या पील की जरूरत होती है?
नहीं। हर डार्क अंडरआर्म का इलाज एक जैसा नहीं होता। कभी यह सामान्य होता है, कभी लाइफस्टाइल से जुड़ा, तो कभी एलर्जी या इन्फेक्शन की वजह से। बिना कारण समझे ट्रीटमेंट करवाने से फायदा कम और नुकसान ज्यादा हो सकता है।
सबसे जरूरी सलाह
अगर अंडरआर्म्स का रंग तेजी से बदल रहा है या आपको चिंता हो रही है, तो खुद से इलाज शुरू करने की बजाय पहले स्किन स्पेशलिस्ट से सलाह लें। सही कारण पता चलेगा, तभी सही इलाज होगा।


