दरभंगा के शख्स की कुवैत में ब्रेन हेमरेज से मौत:10 दिन बाद गांव पहुंचा शव, पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल; भाई बोला- परिवार का सहारा छीन गया

दरभंगा के शख्स की कुवैत में ब्रेन हेमरेज से मौत:10 दिन बाद गांव पहुंचा शव, पत्नी-बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल; भाई बोला- परिवार का सहारा छीन गया

दरभंगा जिले के टेकटार गांव निवासी मिथिलेश कुमार दास(48) का शव 10 दिन बाद घर पहुंचा। पिछले 18 साल से कुवैत में रहकर नौकरी कर रहे थे। 8 दिसंबर 2025 को ड्यूटी पर जाते समय अचानक उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। साथियों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना मिलते ही उनके छोटे भाई रंजीत दास, जो कुवैत में ही दूसरे स्थान पर रहते हैं, अस्पताल पहुंचे। तमाम प्रयासों के बावजूद 1 जनवरी 2026 की सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिवार की हर जरूरत बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और भविष्य की योजनाएं, उनकी कमाई पर ही निर्भर थी। मेहनत-मजदूरी कर अपने चार मासूम बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे थे। कुवैत में सभी आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविवार को शव विमान से दिल्ली लाया गया। जहां से दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचाया गया। एयरपोर्ट से एंबुलेंस से डेड बॉडी पैतृक गांव लाया गया। शव पहुंचते ही घर पर लोगों की भीड़ जुट गई। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल मृतक की पत्नी पुनीता देवी सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। कभी पति का नाम पुकारती हैं तो कभी बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ती हैं। चारों बेटे नीरज(18), धीरज (14), आदित्य (12) और दिव्यांशु (8) अपने पिता की तस्वीर से लिपटकर फूट-फूट कर रोते नजर आए। भाई बोला- परिवार का सहारा छीन गया छोटे भाई सुनील कुमार ने रोते हुए बताया, ‘मेरे भैया पिछले 17-18 सालों से कुवैत में रहकर नौकरी कर रहे थे। मेहनत-मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण-पोषण करते थे। आज हमारा सहारा हमसे छिन गया। उनके जाने से पूरा परिवार बिखर गया है।’ भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंपनी और ग्रामीणों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से महज 10 दिनों के अंदर शव कुवैत से गांव तक पहुंच सका। गांव में रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। दूर-दराज से लोग शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंच रहे हैं। दरभंगा जिले के टेकटार गांव निवासी मिथिलेश कुमार दास(48) का शव 10 दिन बाद घर पहुंचा। पिछले 18 साल से कुवैत में रहकर नौकरी कर रहे थे। 8 दिसंबर 2025 को ड्यूटी पर जाते समय अचानक उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया। साथियों ने तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना मिलते ही उनके छोटे भाई रंजीत दास, जो कुवैत में ही दूसरे स्थान पर रहते हैं, अस्पताल पहुंचे। तमाम प्रयासों के बावजूद 1 जनवरी 2026 की सुबह इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिवार की हर जरूरत बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और भविष्य की योजनाएं, उनकी कमाई पर ही निर्भर थी। मेहनत-मजदूरी कर अपने चार मासूम बच्चों का भविष्य संवारने में जुटे थे। कुवैत में सभी आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रविवार को शव विमान से दिल्ली लाया गया। जहां से दरभंगा एयरपोर्ट पहुंचाया गया। एयरपोर्ट से एंबुलेंस से डेड बॉडी पैतृक गांव लाया गया। शव पहुंचते ही घर पर लोगों की भीड़ जुट गई। पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल मृतक की पत्नी पुनीता देवी सदमे में हैं और बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। कभी पति का नाम पुकारती हैं तो कभी बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ती हैं। चारों बेटे नीरज(18), धीरज (14), आदित्य (12) और दिव्यांशु (8) अपने पिता की तस्वीर से लिपटकर फूट-फूट कर रोते नजर आए। भाई बोला- परिवार का सहारा छीन गया छोटे भाई सुनील कुमार ने रोते हुए बताया, ‘मेरे भैया पिछले 17-18 सालों से कुवैत में रहकर नौकरी कर रहे थे। मेहनत-मजदूरी करके पूरे परिवार का भरण-पोषण करते थे। आज हमारा सहारा हमसे छिन गया। उनके जाने से पूरा परिवार बिखर गया है।’ भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंपनी और ग्रामीणों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से महज 10 दिनों के अंदर शव कुवैत से गांव तक पहुंच सका। गांव में रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार किया गया। दूर-दराज से लोग शोक संवेदना व्यक्त करने पहुंच रहे हैं।  

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