राजस्व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण फार्मर आईडी बनाने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि पंचायत सचिवों को मोबाइल आईडी व पासवर्ड देकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन बिहार भूमि पोर्टल पर नाम-खाता-खेसरा में मामूली त्रुटियों के कारण प्रक्रिया अटकी हुई है। जिले में साह- सिंह, मो. मोहम्मद जैसे मामूली अंतर से फार्मर आईडी रुक रही है। कटरा की 22 पंचायतों में पीएम किसान के 20 हजार से अधिक लाभार्थी हैं। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 3,138 लाभार्थी जजुआर के तीनों पंचायतों में हैं, जबकि सबसे कम 182 बेरई दक्षिण में। इनमें करीब 15 हजार किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन फार्मर आईडी केवल 7,269 की ही बन सकी है। बसघट्टा के रामप्रीत साह (पिता- वैधनाथ साह) का पोर्टल पर नाम रामप्रीत सिंह (पिता-वैधनाथ सिंह) दर्ज है। मो. उस्मान (पिता- मो. खलील) को मो. उस्मान (पिता- शेख खलील) दिखाया गया। अकलू साह के पिता दरबेसर साह की बजाय दखेसर साह दर्ज है। योजनाओं के लिए इसे अनिवार्य करने जा रही है। इधर, कटरा में कार्यरत 11 राजस्व कर्मचारी हैं, जो 9 फरवरी से हड़ताल पर हैं। फार्मर आईडी के कार्य को गति देने के लिए डीएम के िनर्देश पर पंचायत सचिव को आर्ईडी और पासवर्ड दे दिया गया है, लेकिन भूमि के संबंध में जानकारी के अभाव में पंचायत सचिव और कार्यपालक सहायता के द्वारा कार्य में प्रगति नहीं देखी जा रही है। अंचल कार्यालय सूत्रों के मुताबिक राजस्व कर्मचारियों को वापस काम पर आने के लिए गुहार लगाई जा रही है। सीओ मधुमिता कुमारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, परिमार्जन आवेदनों में फार्मर आईडी बनाने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होते ही प्रक्रिया तेज की जाएगी। पंचायत सचिवों को ट्रेनिंग देकर वैकल्पिक मोड से काम चलाया जा रहा है।”हालांकि, किसान संगठनों ने मांग की है कि पोर्टल को तत्काल अपडेट किया जाए और विशेष कैंप लगाकर सुधार कराया जाए। राजस्व कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण फार्मर आईडी बनाने की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि पंचायत सचिवों को मोबाइल आईडी व पासवर्ड देकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, लेकिन बिहार भूमि पोर्टल पर नाम-खाता-खेसरा में मामूली त्रुटियों के कारण प्रक्रिया अटकी हुई है। जिले में साह- सिंह, मो. मोहम्मद जैसे मामूली अंतर से फार्मर आईडी रुक रही है। कटरा की 22 पंचायतों में पीएम किसान के 20 हजार से अधिक लाभार्थी हैं। आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 3,138 लाभार्थी जजुआर के तीनों पंचायतों में हैं, जबकि सबसे कम 182 बेरई दक्षिण में। इनमें करीब 15 हजार किसानों का ई-केवाईसी पूरा हो चुका है, लेकिन फार्मर आईडी केवल 7,269 की ही बन सकी है। बसघट्टा के रामप्रीत साह (पिता- वैधनाथ साह) का पोर्टल पर नाम रामप्रीत सिंह (पिता-वैधनाथ सिंह) दर्ज है। मो. उस्मान (पिता- मो. खलील) को मो. उस्मान (पिता- शेख खलील) दिखाया गया। अकलू साह के पिता दरबेसर साह की बजाय दखेसर साह दर्ज है। योजनाओं के लिए इसे अनिवार्य करने जा रही है। इधर, कटरा में कार्यरत 11 राजस्व कर्मचारी हैं, जो 9 फरवरी से हड़ताल पर हैं। फार्मर आईडी के कार्य को गति देने के लिए डीएम के िनर्देश पर पंचायत सचिव को आर्ईडी और पासवर्ड दे दिया गया है, लेकिन भूमि के संबंध में जानकारी के अभाव में पंचायत सचिव और कार्यपालक सहायता के द्वारा कार्य में प्रगति नहीं देखी जा रही है। अंचल कार्यालय सूत्रों के मुताबिक राजस्व कर्मचारियों को वापस काम पर आने के लिए गुहार लगाई जा रही है। सीओ मधुमिता कुमारी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, परिमार्जन आवेदनों में फार्मर आईडी बनाने वाले किसानों को प्राथमिकता दी जा रही है। राजस्व कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होते ही प्रक्रिया तेज की जाएगी। पंचायत सचिवों को ट्रेनिंग देकर वैकल्पिक मोड से काम चलाया जा रहा है।”हालांकि, किसान संगठनों ने मांग की है कि पोर्टल को तत्काल अपडेट किया जाए और विशेष कैंप लगाकर सुधार कराया जाए।


