पानी में खतरनाक फ्लोराइड और नाइट्रेट मिला:प्रदेश के 6 हजार से ज्यादा गांवों के पानी में हानिकारक रसायन

पानी में खतरनाक फ्लोराइड और नाइट्रेट मिला:प्रदेश के 6 हजार से ज्यादा गांवों के पानी में हानिकारक रसायन

प्रदेश के 6 हजार से ज्यादा गांवों का पानी गुणवत्ता में खराब पाया गया है। उसमें कई प्रकार के हानिकारक रसायनों की मात्रा मिली है। सबसे ज्यादा गांवों में स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक फ्लोराइड और नाइट्रेट मिला है। इसका टीडीएस बढ़ा हुआ है। जलशक्ति मंत्रालय की वर्ष 2025–26 की गुणवत्ता रिपोर्ट में 6211 गांवों से लिए पानी के सैंपल में रासायनिक और बैक्टीरिया मिले हैं। पूरे प्रदेश में 1193 गांवों में फ्लोराइड और 1708 गांवों में नाइट्रेट की मात्रा अधिक पाई गई है। 62 गांवों में पीएच, 1198 गांवों में टीडीएस बढ़ा हुआ, 21 गांवों से लिए गए नमूनों में अन्य प्रकार की गंदगी पाई गई। नागौर, डीडवाना-कुचामन और बाड़मेर में इनकी संख्या सबसे ज्यादा है। नागौर जिले के 32 गांवों के पानी में पीएच, 171 में टीडीएस, 147 में क्लोराइड, 115 में फ्लोराइड और 134 में नाइट्रेट मिला है। डीडवाना के 133 गांवों में टीडीएस, 103 में क्लोराइड, 120 में फ्लोराइड और 135 गांवों के पानी में नाइट्रेट की मात्रा मिली है। इसी तरह बाड़मेर के 171 गांवों में टीडीएस, 132 गांवों में क्लोराइड, 113 गांवों में फ्लोराइड व 160 गांवों के पानी में नाइट्रेट की मात्रा पाई गई है। बाड़मेर से ही अलग होकर बने नए जिले बालोतरा के भी 200 गांवों के पानी से लिए नमूनों में हानिकारक पदार्थ मिले हैं। टोंक के 272 गांवों में पानी अशुद्ध मिला है। इसी तरह बीकानेर के 52 गांवों में खारापन और 69 में नाइट्रेट की समस्या है, जबकि चूरू के 68 गांवों में नाइट्रेट और 51 में फ्लोराइड पाया गया। सीकर जिला पूरे प्रदेश में नाइट्रेट के मामले में सबसे खराब है। यहां सर्वाधिक 204 गांवों का पानी इस रसायन से दूषित है। अन्य जिलों में दौसा, झुंझुनूं, जयपुर, जालोर, कोटा, टोंक इत्यादि जिलों के भी दर्जनों गांवों में इस तरह की समस्या है। कोटा के 98 गांवों में नाइट्रेट और 43 में टीडीएस की समस्या मिली है। बारां के 46 गांव, टोंक के 66 गांव, झुंझुनूं के 170 गांव, पाली के 32 गांव, जालोर के 71 गांव, जोधपुर के 24 गांव के लोग पानी में नाइट्रेट की समस्या से परेशान हैं। उदयपुर के 42 गांवों में फ्लोराइड का असर है। यह रिपोर्ट उन्हीं गांवों के सर्वे की है, जहां से केंद्रीय टीम ने सैंपल लिए थे। 12 जिलों के गांवों के पानी में जीरो टीडीएस प्रदेश के 41 जिलों में अजमेर, बांसवाड़ा, ब्यावर, बूंदी, डूंगरपुर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, जैसलमेर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली बहरोड़, प्रतापगढ़ ऐसे जिले हैं, जहां के गांवों में पानी के नमूनों में बिल्कुल टीडीएस नहीं मिला है। अन्य हानिकारक तत्व भी नहीं मिले हैं। इसी तरह धौलपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ जैसे जिलों में भी टीडीएस या फ्लोराइड की मात्रा बहुत कम मिली है।

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