रूस का खतरनाक हमला! सोते हुए मासूमों पर बरसाई मौत, ड्रोन स्ट्राइक में नन्हे बच्चों और पिता की गई जान

रूस का खतरनाक हमला! सोते हुए मासूमों पर बरसाई मौत, ड्रोन स्ट्राइक में नन्हे बच्चों और पिता की गई जान

Drone Attack: रूस-यूक्रेन युद्ध को चलते हुए लंबा अरसा बीत चुका है, लेकिन 11 फरवरी 2026 की सुबह जो हुआ, उसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है। रूसी सेना की ओर से किए गए एक ताजा ड्रोन हमले (Russian Drone Strike) में उन मासूमों की जान चली गई, जिन्होंने अभी ठीक से दुनिया भी नहीं देखी थी। यह हमला किसी सैन्य ठिकाने पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों के घरों पर किया गया, जहां छोटे बच्चे (Toddlers) अपने माता-पिता के साथ गहरी नींद में सो रहे थे।

खिलौनों के बीच मिले नन्हे शव

घटनास्थल का मंजर इतना भयावह था कि राहत और बचाव कार्य में जुटे कर्मचारियों के भी हाथ कांप गए। रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी ‘कामिकेज़ ड्रोन‘ (Kamikaze Drones) ने सीधे एक रिहायशी इमारत को निशाना बनाया। धमाका इतना जोरदार था कि पूरी बिल्डिंग ताश के पत्तों की तरह ढह गई। जब मलबे को हटाया गया, तो वहां बिखरे हुए खिलौनों के बीच से छोटे बच्चों के शव बरामद हुए। मरने वाले बच्चों की उम्र 2 से 4 साल के बीच बताई जा रही है।

माँ की चीखों से गूंज उठा शहर

इस हमले ने कई परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया है। अपने जिगर के टुकड़ों को खोने वाली माताओं का रो-रोकर बुरा हाल है। एक पीड़ित पिता ने मलबे की ओर इशारा करते हुए कहा, “मेरे बच्चे का क्या कुसूर था? क्या वह कोई सैनिक था? यह युद्ध नहीं, यह कत्लेआम है।” स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि इस हमले में मरने वाले बच्चे (Toddlers Killed) ही मुख्य शिकार बने हैं, जो भागने या बचने में असमर्थ थे।

जानबूझ कर नागरिकों को निशाना बनाया ?

यूक्रेनी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि रूस अब युद्ध के मैदान में पिछड़ने के बाद जानबूझ कर नागरिकों में दहशत फैलाने के लिए ऐसे हमले कर रहा है। रात के अंधेरे में रिहायशी इलाकों पर ड्रोन दागने का मकसद सिर्फ और सिर्फ ‘टेरर’ पैदा करना है। यह घटना ‘जिनेवा कन्वेंशन’ (Geneva Convention) के नियमों की धज्जियां उड़ाती है, जो युद्ध में बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा की बात करता है।

हमला इतिहास में एक ‘काले दिन’ के रूप में दर्ज

युद्ध दो देशों या सेनाओं के बीच होता है, लेकिन उसकी सबसे बड़ी कीमत हमेशा मासूम बच्चों को चुकानी पड़ती है। 11 फरवरी का यह हमला इतिहास में एक ‘काले दिन’ के रूप में दर्ज हो गया है। दुनिया अब सवाल पूछ रही है कि आखिर कब तक सियासी महत्वाकांक्षा की आग में फूल जैसे बच्चे झुलसते रहेंगे?

संयुक्त राष्ट्र (UN) ने की निंदा

इस घटना पर संयुक्त राष्ट्र ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। यूएन के प्रवक्ता ने कहा है कि “सोते हुए बच्चों पर हमला करना कायरता की निशानी है।” मानवाधिकार संगठन: एमनेस्टी इंटरनेशनल और अन्य मानवाधिकार समूहों ने इसे ‘युद्ध अपराध’ (War Crime) की श्रेणी में रखने की मांग की है और अंतरराष्ट्रीय कोर्ट से रूस के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है।

अब इससे संबंधित सुलगते सवाल

क्या यूक्रेन इस हमले का बदला लेने के लिए रूस के भीतर बड़े हमले करेगा?

मलबे के नीचे अभी और कितने लोग दबे हो सकते हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा कब आएगा?

क्या पश्चिमी देश (नाटो) अब यूक्रेन को और अधिक उन्नत एयर डिफेंस सिस्टम देंगे ताकि ऐसे ड्रोन हमलों को रोका जा सके?

अब घर भी सुरक्षित नहीं

यह हमला एक नए खतरे की ओर इशारा करता है-‘ड्रोन वॉरफेयर’। अब दुश्मन को सीमा पार करने की जरूरत नहीं है। हजारों किलोमीटर दूर बैठकर रिमोट से किसी के बेडरूम में तबाही मचाई जा सकती है। सस्ती तकनीक और घातक परिणाम-यही आधुनिक युद्ध का नया और डरावना चेहरा है, जिसने आम आदमी की नींद हराम कर दी है।

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