किशनगंज में सिविल कोर्ट के प्रवेश द्वार पर NH-27 के चलते गंभीर ट्रैफिक समस्या उत्पन्न हो गई है। तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहनों के कारण यहां पैदल यात्रियों, अधिवक्ताओं, कोर्ट स्टाफ और आम नागरिकों की जान जोखिम में है। इस मसले को लेकर अधिवक्ता रविकांत ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है और स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुनवाई की अपील की है। सिविल कोर्ट के सामने का हाईवे बना मौत का फाटक किशनगंज की सिविल कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने NH-27 गुजरता है। यह मार्ग पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है और हमेशा भारी वाहनों, ट्रक और तेज रफ्तार वाले बसों से भरा रहता है। कोर्ट गेट के पास न तो ट्रैफिक पुलिस तैनात है, न कोई ट्रैफिक सिग्नल, न स्पीड ब्रेकर और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की सुविधा। अधिवक्ता रविकांत ने पत्र में लिखा है कि वे स्वयं कई बार हाईवे पार करते समय बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने कई ऐसे हादसों का उल्लेख किया, जहां पैदल चल रहे लोगों को गंभीर खतरा पैदा हुआ। उनका कहना है कि पीक आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में सड़क पर पैदल आवागमन और वाहनों का प्रवाह अत्यधिक होता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। जिला बार एसोसिएशन ने पहले भी शिकायत की थी अधिवक्ता रविकांत ने पत्र में बताया कि किशनगंज जिला बार एसोसिएशन ने 31 जुलाई 2025 को जिला मजिस्ट्रेट को लिखित शिकायत दी थी। इसमें पीक आवर्स में ट्रैफिक पुलिस तैनात करने, सिग्नल और स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की गई थी। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है। सरकारी कार्यालयों के बीच हाईवे की चुनौती सिविल कोर्ट के आसपास कई सरकारी कार्यालय हैं, जैसे बस स्टैंड, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, नगर परिषद, पोस्ट ऑफिस, BSNL ऑफिस, डीटीओ, DM और SP कार्यालय, पुलिस स्टेशन, जिला जेल और जिला परिषद। ये सभी NH-27 के किनारे या इसके पार 500-700 मीटर के दायरे में स्थित हैं। रोजाना हजारों लोग इन कार्यालयों और कोर्ट गेट पर आते-जाते हैं, लेकिन सुरक्षित क्रॉसिंग की कोई सुविधा नहीं होने के कारण हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। अधिवक्ता ने पटना HC से की तुरंत हस्तक्षेप की अपील पत्र में अधिवक्ता रविकांत ने पटना हाईकोर्ट से अपील की है कि वे स्वत: संज्ञान लें और तत्काल निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा कि कोर्ट गेट पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए। सिस्टेमेटिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएं। स्पीड ब्रेकर स्थापित किए जाएं। पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित जेब्रा क्रॉसिंग या फुटओवर ब्रिज का प्रबंध किया जाए। अधिवक्ता का कहना है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। जनहित का मामला और सुरक्षा की आवश्यकता सिविल कोर्ट गेट के पास न सिर्फ अधिवक्ता और कोर्ट स्टाफ, बल्कि आम जनता भी रोजाना आवागमन करती है। किसी भी समय तेज रफ्तार वाले वाहनों के कारण हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को PIL के रूप में उठाना जरूरी है। किशनगंज में NH-27 के इस हिस्से पर सुरक्षा उपायों के अभाव में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। अधिवक्ता रविकांत की अपील को हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार किया गया, तो यह कदम न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए राहत होगा बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। किशनगंज में सिविल कोर्ट के प्रवेश द्वार पर NH-27 के चलते गंभीर ट्रैफिक समस्या उत्पन्न हो गई है। तेज रफ्तार और अनियंत्रित वाहनों के कारण यहां पैदल यात्रियों, अधिवक्ताओं, कोर्ट स्टाफ और आम नागरिकों की जान जोखिम में है। इस मसले को लेकर अधिवक्ता रविकांत ने पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है और स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुनवाई की अपील की है। सिविल कोर्ट के सामने का हाईवे बना मौत का फाटक किशनगंज की सिविल कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने NH-27 गुजरता है। यह मार्ग पूर्वोत्तर राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है और हमेशा भारी वाहनों, ट्रक और तेज रफ्तार वाले बसों से भरा रहता है। कोर्ट गेट के पास न तो ट्रैफिक पुलिस तैनात है, न कोई ट्रैफिक सिग्नल, न स्पीड ब्रेकर और न ही पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग की सुविधा। अधिवक्ता रविकांत ने पत्र में लिखा है कि वे स्वयं कई बार हाईवे पार करते समय बाल-बाल बचे हैं। उन्होंने कई ऐसे हादसों का उल्लेख किया, जहां पैदल चल रहे लोगों को गंभीर खतरा पैदा हुआ। उनका कहना है कि पीक आवर्स (सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक) में सड़क पर पैदल आवागमन और वाहनों का प्रवाह अत्यधिक होता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है। जिला बार एसोसिएशन ने पहले भी शिकायत की थी अधिवक्ता रविकांत ने पत्र में बताया कि किशनगंज जिला बार एसोसिएशन ने 31 जुलाई 2025 को जिला मजिस्ट्रेट को लिखित शिकायत दी थी। इसमें पीक आवर्स में ट्रैफिक पुलिस तैनात करने, सिग्नल और स्पीड ब्रेकर लगाने की मांग की गई थी। लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है। सरकारी कार्यालयों के बीच हाईवे की चुनौती सिविल कोर्ट के आसपास कई सरकारी कार्यालय हैं, जैसे बस स्टैंड, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय, नगर परिषद, पोस्ट ऑफिस, BSNL ऑफिस, डीटीओ, DM और SP कार्यालय, पुलिस स्टेशन, जिला जेल और जिला परिषद। ये सभी NH-27 के किनारे या इसके पार 500-700 मीटर के दायरे में स्थित हैं। रोजाना हजारों लोग इन कार्यालयों और कोर्ट गेट पर आते-जाते हैं, लेकिन सुरक्षित क्रॉसिंग की कोई सुविधा नहीं होने के कारण हादसों का खतरा हमेशा बना रहता है। अधिवक्ता ने पटना HC से की तुरंत हस्तक्षेप की अपील पत्र में अधिवक्ता रविकांत ने पटना हाईकोर्ट से अपील की है कि वे स्वत: संज्ञान लें और तत्काल निर्देश जारी करें। उन्होंने कहा कि कोर्ट गेट पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए। सिस्टेमेटिक ट्रैफिक सिग्नल लगाए जाएं। स्पीड ब्रेकर स्थापित किए जाएं। पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित जेब्रा क्रॉसिंग या फुटओवर ब्रिज का प्रबंध किया जाए। अधिवक्ता का कहना है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो गंभीर दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ सकता है। जनहित का मामला और सुरक्षा की आवश्यकता सिविल कोर्ट गेट के पास न सिर्फ अधिवक्ता और कोर्ट स्टाफ, बल्कि आम जनता भी रोजाना आवागमन करती है। किसी भी समय तेज रफ्तार वाले वाहनों के कारण हादसा हो सकता है। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे को PIL के रूप में उठाना जरूरी है। किशनगंज में NH-27 के इस हिस्से पर सुरक्षा उपायों के अभाव में सड़क दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। अधिवक्ता रविकांत की अपील को हाईकोर्ट द्वारा स्वीकार किया गया, तो यह कदम न केवल स्थानीय नागरिकों के लिए राहत होगा बल्कि ट्रैफिक प्रबंधन की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा।


