विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं को जाल में फंसाकर उन्हें साइबर ठगी के अड्डों तक पहुंचाने वाले अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का राज्य साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। खास बात यह है कि मध्यप्रदेश में पहली बार इस तरह के मामले में एमिग्रेशन एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है, जिसमें मानव तस्करी और आईटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। जिस मामले में कार्रवाई हुई है वह तीन महीने पुराना है। शुक्रवार को इसमें साइबर पुलिस ने दो गिरफ्तारी की है।
झांसे से शुरू, बंधक बनाकर खत्म होता था सफर
जांच में सामने आया कि भोपाल के एक युवक को डेटा एंट्री जॉब का लालच देकर पहले ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया और फिर थाईलैंड भेजा गया। वहां से उसे अवैध रूप से सीमा पार कर म्यांमार पहुंचाया गया, जहां साइबर ठगी करने वाले गिरोह के पास उसे बेच दिया गया। यहां उससे मारपीट कर ठगी करवाई जाती थी। बाद में म्यांमार की सेना ने उसे मुक्त कराया। दो राज्यों से जुड़े एजेंटों पर शिकंजा
साइबर पुलिस की कार्रवाई में बिहार और उत्तरप्रदेश से जुड़े दो एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। एक आरोपी को बिहार से पकड़ा गया, जबकि दूसरे को दिल्ली एयरपोर्ट पर लुकआउट सर्कुलर के आधार पर दबोचा गया। इनके कब्जे से मोबाइल, टैबलेट और कई अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस अब इनके नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।
सोशल मीडिया बना जाल, सैलरी का लालच हथियार
गिरोह के सदस्य फेसबुक, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म्स के जरिए बेरोजगार युवाओं से संपर्क करते थे। उन्हें 30 से 40 हजार थाई बाथ तक की सैलरी का झांसा देकर डेटा एंट्री, एचआर या होटल इंडस्ट्री में नौकरी का ऑफर दिया जाता था। फर्जी इंटरव्यू के बाद उन्हें विदेश भेजकर तस्करी की जाती थी। सीमावर्ती इलाकों में ‘साइबर गुलामी’ का जाल
म्यांमार, लाओस और कंबोडिया की सीमाओं पर सक्रिय साइबर स्कैम ठिकानों में भारत समेत कई देशों के युवाओं को बंधक बनाकर काम कराया जा रहा है। इन ठिकानों से 30 से ज्यादा देशों में ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया जा रहा है। भारत, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और अफ्रीकी देशों के युवक भी इस जाल में फंस रहे हैं।
अलर्ट: ऐसे ऑफर दिखें तो तुरंत सावधान
विदेश में नौकरी के नाम पर आने वाले ऑफर्स को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन वाले एजेंट से दूरी बनाएं और जल्दबाजी में पासपोर्ट या यात्रा से जुड़े फैसले न लें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी साइबर हेल्पलाइन 1930 या आधिकारिक पोर्टल पर दी जा सकती है।


