छत्तीसगढ़ में तंत्र-सिद्धि, शक्ति पाने की सनक, अमीर बनने और पैसों की बारिश के लालच में हत्याओं को लेकर पार्ट- 1 में आपने 8 खौफनाक मर्डर की स्टोरी पढ़ी, जिसमें हमने बताया था कि तंत्र-मंत्र के नाम पर मर्डर क्यों हो रहे हैं, किस-किस पैटर्न पर तांत्रिक हत्याएं कर रहे और करवा रहे हैं ? आज हम आपको अंधविश्वास में मर्डर इन्वेस्टिगेशन के पार्ट-2 में बताएंगे कैसे तंत्र-विद्या के नाम पर इंसान अपने ही रिश्तों का गला घोंट रहा है। हर केस में कहानी एक जैसी है। किसी ने तांत्रिक बनने, किसी ने गुरु की शक्ति हासिल करने हत्या की। किसी को बताया गया कि खून से शक्ति मिलेगी, किसी को कहा गया कि बलि से धन बरसेगा। पहली कहानी जशपुर की है। यहां तंत्र-सिद्धि के लिए एक चाचा ने मासूम बच्ची का सिर धड़ से अलग कर दिया। धमतरी में शिष्य ने गुरु को काट डाला, खून पीया और शव को जला दिया, ताकि ‘सिद्धि’ मिल सके।कोरबा में बेटे ने अपनी ही मां को कुल्हाड़ी से काटा। शव के टुकड़े किए। खून पीया। वहीं रायगढ़ में रक्षाबंधन से पहले बेटे ने अपनी मां की बलि चढ़ाई। शव को ड्रम डाला। शव के टुकड़े किए। खून को सिद्धि का साधन माना। रक्षाबंधन के दिन बहन ने तंत्र पूजा करते पकड़ा। वहीं दुर्ग में तांत्रिक पति-पत्नी ने पड़ोसी के बच्चे की बलि चढ़ाई। लोटे में खून भरा और तंत्र पूजा की। 7 लोगों को फांसी की सजा भी हुई। इस रिपोर्ट में पढ़िए तांत्रिकों का नेटवर्क कैसे डर, लालच और अंधविश्वास से लोगों को कातिल बना रहा है, लोग डॉक्टर से पहले बैगा और तांत्रिकों के पास क्यों जा रहे, तांत्रिकों के इस जाल से कैसे बचें, क्या करें, क्या न करें ? अब पढ़िए छत्तीसगढ़ के 5 जिलों में किस-किस पैटर्न पर हुईं 5 हत्याएं छत्तीसगढ़ के 5 जिले जशपुर, धमतरी कोरबा, रायगढ़ और दुर्ग में हत्याएं तंत्र विद्या के नाम पर हुईं हैं। इनमें पहला और सबसे खतरनाक पैटर्न ‘बलि’ का है। इस पैटर्न में मासूम बच्चा, महिलाओं या करीबी रिश्तेदारों को तंत्र-सिद्धि, धन-वर्षा और शक्ति पाने के नाम पर मारा गया। इन मामलों में हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध थी। तारीख, स्थान और विधि पहले से तय थी। अपराध के बाद तांत्रिक क्रिया की गई। वहीं दूसरा पैटर्न शक्ति छीनने की दिखी। शिष्य ने अपने गुरु को इसलिए काट डाला क्योंकि उसे बताया गया था कि गुरु की मौत से उसकी शक्ति शिष्य में आ जाएगी। हत्या के बाद खून पीना, शव को जलाना और मंत्रों का उच्चारण तांत्रिक पैटर्न की पहचान है। ये हत्या आवेग में नहीं, बल्कि लंबे मानसिक ब्रेनवॉश के बाद की गई थी। जशपुर में मई 2025 में चाचा ने बच्ची का सिर और धड़ अलग किया, बलि चढ़ाई दरअसल, जशपुर जिले में चाचा ने अपनी 3 साल की भतीजी की हत्या कर दी। उसने बच्ची का सिर काटा। बलि चढ़ाई और शव को चूल्हे में फेंक दिया। आरोपी रामप्रसाद नाग (35 साल) का उसके भाई राजाराम नागघर और परिवार में पहले से विवाद चल रहा था। आरोपी आए दिन अपने भाई से झगड़ा करता था। 5 मार्च को बच्ची खुशी नाग (3 साल) का पिता मवेशी चराने गया था। घर पर कोई भी नहीं था। इसी दौरान, रामप्रसाद ने धारदार हथियार से बच्ची का सिर धड़ से अलग कर दिया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। धमतरी में फरवरी 2023 में शिष्य ने तंत्र विद्या के लिए गुरु को काटा, खून को पीया, जिंदा जलाया दरअसल, धमतरी जिले में युवक ने अपने गुरू की हत्या कर दी। उसका खून पी लिया। आरोपी ने इसलिए ऐसा किया, क्योंकि उसे किसी दूसरे साधु ने बताया था कि ऐसा करने से उसे अपनी गुरु की सारी सिद्धि हासिल हो जाएगी। मामला जिले के करेली बड़ी चौकी क्षेत्र का है। आरोपी ने हत्या कर शव को नदी किनारे छोड़ दिया था। आस-पास के लोगों ने उसका शव देखा था। आरोपी रौनक छाबड़ा ने बताया कि गरियाबंद जिले के नवापारा के रहने वाले 50 वर्षीय बसंत साहू की हत्या उसने किसी साधु के कहने पर की थी। वह बसंत के साथ ही तंत्र-मंत्र सीखता था। आरोपी उसे गुरु भी मानता था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। रायगढ़ में अगस्त 2026 में बेटे ने मां की बलि चढ़ाई, रक्षाबंधन के दिन बहन ने पकड़ा दरअसल, रायगढ़ जिले के बरमकेला के सांडा गांव में एक युवक ने अपनी मां की हत्या कर दी। शव को ड्रम में डालकर भाग गया। जब आरोपी की बहन राखी बांधने घर आई तो ड्रम में मां की लाश देखी तब घटना का खुलासा हुआ। पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने पूजा-साधना के दौरान कब मां की हत्या कर दी उसे पता नहीं। मृतका की बेटी रामबाई ने बताया कि वह ससुराल भीखमपुर से भाई मिट्ठू बेहरा को राखी बांधने के लिए आई थी। जब वह घर पहुंची तो घर का दरवाजा खुला था। इस दौरान घर पर न तो मां सुखमती बाई (55) थी और ना ही भाई। देर तक वह घर के दरवाजे पर बैठे इंतजार करती रही। वह अंदर घुसी तो कमरे से बदबू आ रही थी। अनहोनी के शक पर उसने पड़ोसियों को बुला लिया। लोगों ने इधर-उधर देखा तो नीले रंग के प्लास्टिक ड्रम में सुखमती का शव पड़ा मिला। कोरबा में जनवरी 2019 में मां को कुल्हाड़ी से काटा और खून पी गया, टुकड़े-टुकड़े किए दरअसल, कोरबा जिले के ग्राम रामाकछार में दिलीप (25) ने मां सुमरिया (50) की धारदार हथियार से हत्या कर दी। ऐसा दिलीप ने इसलिए किया क्योंकि उसने सपने में देखा था कि मां टोनही है और पिता व छोटे भाई की मौत की जिम्मेदार है। दिलीप के पिता रामलाल और छोटे बेटे संदीप की कुछ साल के अंतराल में ही मौत हुई थी। दोनों की मौत के बाद दिलीप तंत्र-मंत्र के चक्कर में पड़ गया था। घर में एक जगह उसने साधना स्थली बना ली थी। 31 दिसंबर 2018 को सुबह करीब 10.30 बजे उसने मां की घर पर ही हत्या कर दी। शव से जमीन पर बह रहा खून वो पीने लगा। इस दौरान पड़ोस में रहने वाली समारिन (65) वहां पहुंच जाती है, उन्होंने दिलीप को नरभक्षी जैसी हरकत करते देख लिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। दुर्ग में नवंबर 2011 में तांत्रिक पति-पत्नी ने पड़ोसी के बच्चे को मार डाला, बच्चे के खून को लोटे में भरा, फिर बलि चढ़ाई। सुप्रीम कोर्ट ने फांसी की सजाई सुनाई। दुर्ग में तंत्र साधना के लिए मासूम की बलि दी गई। अदालत ने अपराधियों को फांसी की सजा सुनाई थी। नरबलि की घटना 23 नवंबर 2011 की दोपहर दो बजे हुई। सात लोगों ने मिलकर चिराग राजपूत की बलि दी। चिराग के लापता होने से परिजन एवं मोहल्लेवासी तलाश कर रहे थे। दंपति के घर गाना बजने से लोगों को आशंका हुई। ताबीज में लगे खून की जांच से मासूम की पहचान हुई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर तांत्रिक, उसकी पत्नी और चेलों को हिरासत में ले लिया। तांत्रिक की पत्नी किरण बाई ने पुलिस पूछातछ में बताया कि उसे सपना आया था कि बच्चे की बलि देना है। इसके बाद मासूम चिराग का अपहरण कर नरबलि दी गई। तांत्रिक लोगों का ब्रेनवॉश कर देता है, इसलिए खून पीने लगते हैं लोग डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि जब कोई इंसान मां का खून पीता है या बच्चे की बलि देता है, तो वह सामान्य सोच में नहीं होता। ऐसे मामलों में सवाल सिर्फ अंधविश्वास का नहीं होता। सवाल मानसिक हालत का होता है। लगातार डर, नशा और तांत्रिक की भाषा मिलकर दिमाग को इस कदर तोड़ देते हैं कि सही-गलत की समझ खत्म हो जाती है। डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि यह अक्सर अकेले नहीं, समूह में होने वाला अपराध होता है। एक-दूसरे के डर को बढ़ाया जाता है, धार्मिक शब्दों से अपराध को सही ठहराया जाता है और नशा हिम्मत बढ़ाता है। यही मिलकर सामूहिक मानसिक टूटन पैदा करते हैं, जहां अपराध को भी “पूजा” या “उपाय” मान लिया जाता है। सोशल मीडिया पर भी तांत्रिकों की एंट्री डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि तांत्रिक अब डिजिटल दुनिया में भी घुस गए हैं। तांत्रिक गुरुओं के वीडियो YouTube पर आजादी से घूम रहे हैं। Instagram रील्स पर ‘पैसे कमाने के टोटके’ प्रमोट किए जा रहे हैं। झाड़-फूंक के वीडियो WhatsApp पर शेयर किए जा रहे हैं। लोग इन वीडियो को देख रहे हैं। बिना किसी जांच के उन पर आंख मूंदकर विश्वास कर रहे हैं। बीमारी, बांझपन, मानसिक तनाव से लोग तांत्रिक के पास जाते हैं- डॉ. दिनेश मिश्रा डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि बीमारी, बांझपन, मानसिक तनाव या अचानक मौत के डर में लोग सबसे पहले अस्पताल नहीं, बल्कि बैगा और तांत्रिक के पास पहुंच रहे हैं। वजह है डर, झटपट इलाज का भरोसा और यह विश्वास कि ‘काला जादू’ है। गांवों में डॉक्टर दूर हैं, दवाइयां महंगी लगती हैं, जबकि तांत्रिक तुरंत समाधान का दावा करता है। शहरी इलाकों में भी हालात अलग नहीं हैं। सोशल मीडिया, WhatsApp और यूट्यूब पर चमत्कार के वीडियो लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। विज्ञान धैर्य मांगता है, इलाज समय लेता है, लेकिन तांत्रिक एक रात में ठीक करने का वादा करता है। यही वादा लोगों को डॉक्टर से पहले उसके दरवाजे तक ले जाता है। तांत्रिक चमत्कार नहीं, लोगों के डर के कारण असरदार बनता है- मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष तिवारी मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष तिवारी ने बताया कि तांत्रिक किसी चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि लोगों के डर के कारण असरदार बनता है। जब बीमारी ठीक नहीं होती, पैसा खत्म हो जाता है या मामला कोर्ट-कचहरी में फंस जाता है, तब लोग डॉक्टर या कानून से पहले तांत्रिक के पास चले जाते हैं, क्योंकि वह तुरंत समाधान का भरोसा देता है। डॉ. आशुतोष तिवारी ने बताया कि इन मामलों में एक बात साफ दिखती है कि हत्या से पहले डर होता है। बीमारी का डर, गरीबी का डर, बदनामी या असफलता का डर। तांत्रिक इसी डर को चमत्कार और पूजा-पाठ की बातों में बदल देता है, और लोग गलत कदम उठा बैठते हैं। उन्होंने बताया कि ज्यादातर मामलों में आरोपी खुद ‘तांत्रिक’ नहीं बल्कि ऐसा व्यक्ति है, जिसने धार्मिक भाषा सीखकर समुदाय के डर पर कब्जा कर लिया। लोगों के मन में डर पैदा करता है, ताकि लोग तांत्रिक की ओर खींचे चले आएं। तांत्रिक ब्रेनवॉश कर लोगों को भरोसे में लेता है। बलि देने से समस्या खत्म हो जाएगी बोलते हैं तथाकथित तांत्रिक- डॉ. दिनेश मिश्रा डॉ. दिनेश मिश्रा ने बताया कि आज के समय में तांत्रिकों और तथाकथित बाबाओं के झांसे में आकर लोग मानसिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण का शिकार हो रहे हैं। बलि देने से समस्या खत्म हो जाएगी, पैसों की बारिश होगी, या किसी विशेष सिद्धि-साधना से चमत्कार हो जाएगा। इस तरह के झांसे से बचाव के लिए तर्क, विज्ञान और जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी बीमारी या मानसिक परेशानी के इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाना ही सही और सुरक्षित रास्ता है, न कि तांत्रिक क्रियाओं पर भरोसा करना। अब पढ़िए छत्तीसगढ़ में किस साल अंधविश्वास और तंत्र मंत्र में कितनी हत्याएं छत्तीसगढ़ में मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि 2021-2025 के बीच अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ी हत्याओं में कुल 83 (अनुमानित) मौतें हुईं। सबसे ज्यादा मामले 2022 (22 मौतें) और 2021 (20 मौतें) में दर्ज हुए, जबकि 2024 में घटकर 10 रह गए। मीडिया रिपोर्ट्स और पुलिस की कार्रवाई के आंकड़े बताते हैं कि उतार-चढ़ाव के बावजूद अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र से जुड़ी प्रवृत्ति जारी है। पुलिस कार्रवाई और जागरूकता से कमी आई है, लेकिन अंधविश्वास के नाम पर हत्याएं पूरी तरह थमी नहीं हैं। अब पढ़िए छत्तीसगढ़ में इस तरह की वारदात पर सजा छत्तीसगढ़ में जादू‑टोना, तंत्र‑मंत्र और पैसों की बारिश जैसी गतिविधियों के खिलाफ राज्य ने टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम 2005 लागू किया है। इसके तहत किसी को टोनही या डायन बताकर डराना, झाड़‑फूंक करना या ठगी करना अपराध माना जाता है। इसके अलावा, मानव बलि, हत्या, अपहरण और धोखाधड़ी जैसी वारदातों के लिए सीधे IPC / BNS की गंभीर धाराएं लागू होती हैं, जिनमें उम्रकैद या फांसी तक की सजा का प्रावधान है। डिजिटल ठगी या ऑनलाइन झांसे के मामलों में IT Act भी लागू होता है। पुलिस जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक खेल चलता रहेगा- एडवोकेट समीर सिंह बिलासपुर हाईकोर्ट के एडवोकेट समीर सिंह ने बताया कि छत्तीसगढ़ में इन दिनों तंत्र मंत्र की बहुत घटनाएं सुनने को मिल रही हैं। नरबलि तक के केसेस आ रहे हैं, जिसमें देखा जा रहा है कि लोग तांत्रिकों और बैगाओं के बहकावे में आ रहे हैं। तंत्र मंत्र से पैसों की बारिश करने, स्वास्थ्य ठीक करने का झांसा देते हैं। ये सब जागरूकता की कमी है। आज के समय में इनका कोई स्थान नहीं है। सजा तो उम्रकैद तक की है, लेकिन जागरूक करने के लिए प्रशासन को ग्राउंड पर आना पड़ेगा। पुलिस जब तक कड़ी कार्रवाई नहीं करेगी, तब तक तंत्र-मंत्र और तंत्र विद्या सिद्धि का खेल चलता रहेगा। एडवोकेट समीर सिंह ने बताया कि आज कल लोग डॉक्टर को छोड़कर तांत्रिक-बैगाओं के चक्कर में पड़ जाते हैं। ये सब पुलिस और प्रशासन के नाक के नीचे होता है। पुलिस-प्रशासन को एक्टिव होकर रोकना चाहिए, ताकि जो झाड़-फूंक करने वाले और झोलाझाप डॉक्टर हैं, उनसे लोगों को बचाया जा सके। 2014 से 2021 के बीच भारत में 500 से ज्यादा लोगों की हत्याएं NCRB के आंकड़ों के अनुसार 2014 से 2021 के बीच भारत में मानव बलि और जादू-टोने से जुड़ी हत्याएं लगातार दर्ज होती रहीं। इस दौरान मानव बलि के लिए हर साल 4 से 24 के बीच हत्याएं हुईं, जबकि जादू-टोने के नाम पर मर्डर कहीं ज्यादा रहे। 2017 में जादू-टोने से जुड़े मर्डर अचानक 73 तक पहुंचे और 2019 में यह आंकड़ा 102 के पीक पर रहा। रिकॉर्ड बताता है कि 2014 से 2021 के बीच भारत में मानव बलि और जादू-टोने के नाम पर कुल मिलाकर करीब 500 से ज्यादा लोगों की हत्या हुई। 2020 और 2021 में मामूली गिरावट के बावजूद जादू-टोने से जुड़े मर्डर 88 और 68 रहे। ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि अंधविश्वास भारत में अब भी एक गंभीर और जानलेवा सामाजिक समस्या बना हुआ है। अब पढ़िए भारत में मानव बलि के बारे में…. भारत में भी मानव बलि आधुनिक दौर में भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। NCRB और राज्य पुलिस रिकॉर्ड्स के मुताबिक झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, असम और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में तांत्रिकों के बहकावे में अंधविश्वास, तंत्र-मंत्र, सिद्धि, धन-लाभ और संतान प्राप्ति के नाम पर हत्याएं हो रही हैं। दुनिया के कई देशों में आज भी अंधविश्वास और काले जादू के नाम पर हत्याएं दुनिया के कई हिस्सों में मानव बलि ऐतिहासिक रूप से धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ी रही है, जैसे प्राचीन एज्टेक, माया और इंका सभ्यताएं। आधुनिक समय में यह अफ्रीका के कुछ देशों (युगांडा, तंजानिया, नाइजीरिया), लैटिन अमेरिका और एशिया के हिस्सों में अंधविश्वास और काले जादू के नाम पर अब भी दर्ज होती है। ……………………………………….. पार्ट-1 अननेचुरल-सेक्स…तांत्रिक ने सिर काटकर चढ़ाई बलि: पैसों की बारिश कराने ट्रिपल-मर्डर, मां ने बेटों को मार डाला, छत्तीसगढ़ में तंत्र-विद्या के नाम पर 8 कत्ल 10 जनवरी 2026। रात का वक्त। जगह बलौदाबाजार का दरचुरा गांव। शराब की बोतलें खाली हो चुकी थीं। तांत्रिक के घर में कुछ लोग नशे में झूम रहे थे। पत्नी अपने पति से अननेचुरल सेक्स का बदला लेना चाहती थी। मामा और 2 कॉन्ट्रैक्ट किलर्स से पति को तलवार से कटवा दिया। पढ़ें पूरी खबर…


