CSVTU PHD Scam: सीएसवीटीयू भिलाई के 9.44 लाख कांड में ‘चिट्ठी बम’, गिरफ्तार सलाहकार ने खोले कई राज… जानें पूरा मामला

CSVTU PHD Scam: सीएसवीटीयू भिलाई के 9.44 लाख कांड में ‘चिट्ठी बम’, गिरफ्तार सलाहकार ने खोले कई राज… जानें पूरा मामला

CSVTU PHD Scam: छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (सीएसवीटीयू) के पीएचडी प्रकोष्ठ में नौ लाख 44 हजार 500 रुपए के कथित गबन मामले में नया मोड़ आ गया है। गिरफ्तार कनिष्ठ सलाहकार सुनील कुमार प्रसाद ने गिरफ्तारी से पहले विवि और पुलिस को डाक से भेजे पत्र में दावा किया है कि उसने जो भी राशि ली, वह पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के निर्देश और दबाव में ली। उसने खुद को मात्र ‘माध्यम’ बताते हुए कहा है कि पूरी राशि संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई थी। पुलिस ने इस दावे की जांच शुरू कर दी है।

पूर्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में

विवि की कार्य परिषद के निर्णय पर नेवई थाना में एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

जांच में सामने आईं गड़बड़ियां

पीएचडी शोधार्थियों से फीस वसूली में अनियमितताओं की शिकायत पर एक दिसंबर 2025 को दो सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। 15 दिसंबर को शुरू हुई जांच में 52 प्रकरणों की पड़ताल की गई।

पत्र में लगाए गंभीर आरोप

आरोपी ने 31 जनवरी को भेजे पत्र में दावा किया कि राशि अधिकारियों के कक्ष में सौंप दी जाती थी। कुछ मामलों में परिचितों के खातों में ट्रांसफर कर बाद में नकद देने की बात भी लिखी गई है, जिन रसीदों को फर्जी बताया गया, उन पर अपने हस्ताक्षर से भी उसने इनकार किया है। उसका कहना है कि 9.44 लाख रुपए संबंधित अधिकारियों के पास हैं और उसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

आरोपी ने गबन में और लोगों के भी शामिल होने की जानकारी दी है। यही चिट्ठी पुलिस को भी मिली है। इसमें पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों का नाम है। विवि की ओर से पुलिस को इस एंगल से भी जांच करने के लिए कहेंगे। – डॉ. अरुण अरोरा कुलपति, सीएसवीटीयू

पुलिस को भी चिट्ठी मिली है। सीएसवीटीयू ने पुलिस को जो विवरण दिया था उसके आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसमें और लोगों के भी संलिप्त होने की बात सामने आ रही है। जांच कर रहे हैं। – अनिल साहू टीआई, नेवई थाना

  • 22 मामलों में अधिकृत खाते में ऑनलाइन भुगतान सही पाया गया।
  • 30 मामलों में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
  • 11 मामलों में नकद रसीदें फर्जी मिलीं।
  • 19 मामलों में भुगतान का कोई प्रमाण नहीं मिला।
  • 16 नकद रसीदों को भी जांच में अवैध बताया गया।
  • 30 दिसंबर 2025 को शोधार्थियों के बयान दर्ज किए गए, जिसके बाद फर्जी रसीदों के जरिए फीस वसूली का मामला उजागर हुआ।

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