रोहतास में गुरूवार को एक निजी फाउंडेशन ने क्षेत्र के करीब कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पहल के तहत 70 से अधिक ग्रामीणों की आर्थिक मदद की। ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से डालमिया सीमेंट फाउंडेशन द्वारा ‘ग्राम परिवर्तन योजना’ संचालित की जा रही है। किसे कितने की सहायता दी गई फाउंडेशन की इस योजना के अंतर्गत, माइक्रो एंटरप्राइज स्थापना योजना में लाभार्थी ₹40,000 का स्वयं निवेश करते हैं, जबकि फाउंडेशन द्वारा ₹10,000 की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। वहीं, माइक्रो एंटरप्राइज विस्तार योजना के तहत लाभार्थी ₹25,000 का निवेश करते हैं और फाउंडेशन ₹5,000 की सहायता राशि प्रदान करता है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किराना दुकान, कॉस्मेटिक शॉप, कंप्यूटर सेंटर, जनरल स्टोर, फास्ट फूड स्टॉल और पशुपालन जैसे लघु व्यवसायों को बढ़ावा मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो रही है। वन मिल्च (डेयरी) योजना’ की भी शुरूआत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से फाउंडेशन ने ‘वन मिल्च (डेयरी) योजना’ भी शुरू की है। इस योजना के तहत 12 चयनित लाभार्थियों को दुग्ध उत्पादन के लिए सहयोग दिया जा रहा है। प्रत्येक लाभार्थी ₹50,000 का स्वयं निवेश करता है, जबकि फाउंडेशन ₹10,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही नियमित आय का स्रोत भी विकसित हो रहा है। रोहतास में गुरूवार को एक निजी फाउंडेशन ने क्षेत्र के करीब कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) पहल के तहत 70 से अधिक ग्रामीणों की आर्थिक मदद की। ग्रामीण विकास और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से डालमिया सीमेंट फाउंडेशन द्वारा ‘ग्राम परिवर्तन योजना’ संचालित की जा रही है। किसे कितने की सहायता दी गई फाउंडेशन की इस योजना के अंतर्गत, माइक्रो एंटरप्राइज स्थापना योजना में लाभार्थी ₹40,000 का स्वयं निवेश करते हैं, जबकि फाउंडेशन द्वारा ₹10,000 की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है। वहीं, माइक्रो एंटरप्राइज विस्तार योजना के तहत लाभार्थी ₹25,000 का निवेश करते हैं और फाउंडेशन ₹5,000 की सहायता राशि प्रदान करता है। इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किराना दुकान, कॉस्मेटिक शॉप, कंप्यूटर सेंटर, जनरल स्टोर, फास्ट फूड स्टॉल और पशुपालन जैसे लघु व्यवसायों को बढ़ावा मिल रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं और परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि हो रही है। वन मिल्च (डेयरी) योजना’ की भी शुरूआत ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से फाउंडेशन ने ‘वन मिल्च (डेयरी) योजना’ भी शुरू की है। इस योजना के तहत 12 चयनित लाभार्थियों को दुग्ध उत्पादन के लिए सहयोग दिया जा रहा है। प्रत्येक लाभार्थी ₹50,000 का स्वयं निवेश करता है, जबकि फाउंडेशन ₹10,000 की आर्थिक सहायता प्रदान करता है। इससे दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ ही नियमित आय का स्रोत भी विकसित हो रहा है।


