दरभंगा में वाणेश्वरी महोत्सव में उमड़ी आस्था की भीड़:महाआरती में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, महाआरती में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब

दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड स्थित मिथिलांचल के प्रसिद्ध सिद्धपीठ वाणेश्वरी भगवती स्थान में एक दिवसीय वाणेश्वरी महोत्सव 2026 का शांतिपूर्ण आयोजन हुआ। महोत्सव को लेकर क्षेत्र में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे। महोत्सव का मुख्य आकर्षण संध्या समय आयोजित भव्य महाआरती रही। पूरी रात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर विधिवत किया गया। इसके बाद महाआरती में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया। महाआरती का संचालन मोनू उपाध्याय के नेतृत्व में किया गया। पूरी रात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें श्रोताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। स्टूडेंट्स को मिला सम्मान, कलाकारों ने दी परफार्मेंस इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मैट्रिक एवं इंटर के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नटराज डांस एकेडमी के कलाकारों के साथ आयुष्मान कुमार चौधरी, किशोरी कुमारी और गोविंद पंजियार ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। मिथिला पेंटिंग के कलाकारों ने चित्र भी प्रदर्शित किया जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि, महोत्सव को सफल बनाने के लिए पार्किंग, साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, कलाकारों के ठहराव सहित सभी आवश्यक तैयारियां की गई थीं। वहीं, मिथिला पेंटिंग के कलाकारों द्वारा वाणेश्वरी माता एवं भगवान श्रीराम पर आधारित आकर्षक चित्र भी प्रदर्शित किए गए। दरभंगा राज परिवार के सदस्य, विधायक रहे मौजूद वाणेश्वरी न्यास समिति के सचिव संजीव कुमार झा ने कहा कि, रामनवमी के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को और सशक्त करता है। कार्यक्रम में दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ,स्थानीय विधायक ईश्वर मंडल भी शामिल हुए और आयोजकों का उत्साहवर्धन किया। आस्था का केंद्र: वाणेश्वरी भगवती स्थान
मनीगाछी प्रखंड मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम स्थित भंडारिसम गांव में अवस्थित वाणेश्वरी भगवती स्थान मिथिलांचल का प्रमुख आस्था केंद्र है। यह मंदिर एक प्राचीन विशाल भूखंड पर स्थित है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र और रामनवमी जैसे अवसरों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र तीर्थस्थल जैसा रूप ले लेता है। लगभग 600 वर्ष पुरानी है मूर्ति स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां वाणेश्वरी की यह मूर्ति लगभग 600 वर्ष पुरानी है, जिसकी स्थापना मिथिला के राजा भैरव सह के काल में एक मैथिल ब्राह्मण द्वारा की गई थी। बाद में दरभंगा महाराज सर लक्ष्मेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानी लक्ष्मीवती ने वर्ष 1915 में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वाणेश्वरी भगवती स्थान मनीगाछी रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर तथा जगदीशपुर स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से दरभंगा-बाजितपुर पथ के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सिमरिया से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने की परंपरा ग्रामीण परिवेश में स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मां वाणेश्वरी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। रामनवमी के अवसर पर सिमरिया से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने की परंपरा भी यहां विशेष महत्व रखती है। दरभंगा के मनीगाछी प्रखंड स्थित मिथिलांचल के प्रसिद्ध सिद्धपीठ वाणेश्वरी भगवती स्थान में एक दिवसीय वाणेश्वरी महोत्सव 2026 का शांतिपूर्ण आयोजन हुआ। महोत्सव को लेकर क्षेत्र में सुबह से ही उत्साह का माहौल रहा। देर रात तक बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे। महोत्सव का मुख्य आकर्षण संध्या समय आयोजित भव्य महाआरती रही। पूरी रात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर विधिवत किया गया। इसके बाद महाआरती में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय माहौल में सराबोर हो गया। महाआरती का संचालन मोनू उपाध्याय के नेतृत्व में किया गया। पूरी रात सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें श्रोताओं की भारी भीड़ देखने को मिली। स्टूडेंट्स को मिला सम्मान, कलाकारों ने दी परफार्मेंस इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मैट्रिक एवं इंटर के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नटराज डांस एकेडमी के कलाकारों के साथ आयुष्मान कुमार चौधरी, किशोरी कुमारी और गोविंद पंजियार ने अपनी शानदार प्रस्तुतियां दीं। मिथिला पेंटिंग के कलाकारों ने चित्र भी प्रदर्शित किया जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी चंदन कुमार ने बताया कि, महोत्सव को सफल बनाने के लिए पार्किंग, साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, कलाकारों के ठहराव सहित सभी आवश्यक तैयारियां की गई थीं। वहीं, मिथिला पेंटिंग के कलाकारों द्वारा वाणेश्वरी माता एवं भगवान श्रीराम पर आधारित आकर्षक चित्र भी प्रदर्शित किए गए। दरभंगा राज परिवार के सदस्य, विधायक रहे मौजूद वाणेश्वरी न्यास समिति के सचिव संजीव कुमार झा ने कहा कि, रामनवमी के अवसर पर आयोजित यह महोत्सव क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को और सशक्त करता है। कार्यक्रम में दरभंगा राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह ,स्थानीय विधायक ईश्वर मंडल भी शामिल हुए और आयोजकों का उत्साहवर्धन किया। आस्था का केंद्र: वाणेश्वरी भगवती स्थान
मनीगाछी प्रखंड मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम स्थित भंडारिसम गांव में अवस्थित वाणेश्वरी भगवती स्थान मिथिलांचल का प्रमुख आस्था केंद्र है। यह मंदिर एक प्राचीन विशाल भूखंड पर स्थित है, जहां वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। नवरात्र और रामनवमी जैसे अवसरों पर यहां हजारों की संख्या में भक्त पहुंचते हैं, जिससे पूरा क्षेत्र तीर्थस्थल जैसा रूप ले लेता है। लगभग 600 वर्ष पुरानी है मूर्ति स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, मां वाणेश्वरी की यह मूर्ति लगभग 600 वर्ष पुरानी है, जिसकी स्थापना मिथिला के राजा भैरव सह के काल में एक मैथिल ब्राह्मण द्वारा की गई थी। बाद में दरभंगा महाराज सर लक्ष्मेश्वर सिंह की धर्मपत्नी महारानी लक्ष्मीवती ने वर्ष 1915 में यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया। वाणेश्वरी भगवती स्थान मनीगाछी रेलवे स्टेशन से करीब 3 किलोमीटर तथा जगदीशपुर स्टेशन से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग से दरभंगा-बाजितपुर पथ के जरिए यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
सिमरिया से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने की परंपरा ग्रामीण परिवेश में स्थित यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यहां सच्चे मन से पूजा करने पर मां वाणेश्वरी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। रामनवमी के अवसर पर सिमरिया से गंगाजल लाकर जलाभिषेक करने की परंपरा भी यहां विशेष महत्व रखती है।  

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