माघ मास की पवित्र मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सिमरिया धाम में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। रविवार सुबह कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद हर-हर गंगे और जयघोष से गूंजता रहा। 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त शुरू होते ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। स्नान करने के लिए सिर्फ बेगूसराय जिले से ही नहीं बल्कि समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी से नेपाल से भक्तों की भीड़ जुटी थी। सिमरिया में नवनिर्मित सीढ़ियों और रिवर फ्रंट के कारण लोगों को काफी सहूलियत हुई। गंगा स्नान से मानसिक तनाव दूर होता है इधर, पुलिस टीम और स्थानीय गोताखोर भी एक्टिव मोड में थे। मान्यता है कि माघ मास की अमावस्या को स्वर्ग के देवता भी गंगा में स्नान के लिए धरती पर आते हैं। इस दिन वाणी पर संयम रखकर (मौन रहकर) स्नान करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। यह आत्म-मंथन और आंतरिक शुद्धिकरण का दिन है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन चंद्रमा और सूर्य का संगम होता है। गंगा स्नान से मानसिक तनाव दूर होता है और कुंडली के दोष शांत होते हैं। स्नान के बाद तिल, गुड़ और वस्त्र दान को अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है, जिसका फल कभी समाप्त नहीं होता। इसी को लेकर कड़ाके की ठंड में भी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। माघ मास की पवित्र मौनी अमावस्या के अवसर पर प्रसिद्ध तीर्थ स्थल सिमरिया धाम में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी है। रविवार सुबह कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के बावजूद हर-हर गंगे और जयघोष से गूंजता रहा। 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त शुरू होते ही स्नान का सिलसिला शुरू हो गया। स्नान करने के लिए सिर्फ बेगूसराय जिले से ही नहीं बल्कि समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी से नेपाल से भक्तों की भीड़ जुटी थी। सिमरिया में नवनिर्मित सीढ़ियों और रिवर फ्रंट के कारण लोगों को काफी सहूलियत हुई। गंगा स्नान से मानसिक तनाव दूर होता है इधर, पुलिस टीम और स्थानीय गोताखोर भी एक्टिव मोड में थे। मान्यता है कि माघ मास की अमावस्या को स्वर्ग के देवता भी गंगा में स्नान के लिए धरती पर आते हैं। इस दिन वाणी पर संयम रखकर (मौन रहकर) स्नान करने से एक हजार अश्वमेध यज्ञ के समान फल मिलता है। यह आत्म-मंथन और आंतरिक शुद्धिकरण का दिन है। ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन चंद्रमा और सूर्य का संगम होता है। गंगा स्नान से मानसिक तनाव दूर होता है और कुंडली के दोष शांत होते हैं। स्नान के बाद तिल, गुड़ और वस्त्र दान को अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है, जिसका फल कभी समाप्त नहीं होता। इसी को लेकर कड़ाके की ठंड में भी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी।


