वन भूमि के पास 250 मीटर में ईंटभट्टों पर शिकंजा, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

वन भूमि के पास 250 मीटर में ईंटभट्टों पर शिकंजा, 7 दिन में मांगी रिपोर्ट

भास्कर संवाददाता | रायसेन वन विभाग ने वन सीमा से सटे क्षेत्रों में संचालित ईंट-भट्टों पर सख्ती शुरू कर दी है। उप वन मंडलाधिकारी (एसडीओ) ने जिले की सभी वन रेंजों को पत्र जारी कर 250 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में चल रहे भट्टों की जानकारी 7 दिन में देने के निर्देश दिए हैं। आदेश के मुताबिक सामान्य पूर्व, पश्चिम, गढ़ी और बेगमगंज रेंज के परिक्षेत्राधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में ऐसे भट्टों की सूची तैयार करेंगे। ये भट्टे वन भूमि के भीतर या 250 मीटर के दायरे में संचालित हो रहे हैं। इसमें पट्टाधारी, वन अधिकार पत्रधारी और नोटिफाइड अतिक्रमण श्रेणी के प्रकरण भी शामिल रहेंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट मिलने के बाद नियमविरुद्ध पाए गए भट्टों पर विधिवत कार्रवाई की जाएगी। वन क्षेत्र के आसपास हो रहे उत्खनन और प्रदूषण को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसकी सूचना वन मंडलाधिकारी (डीएफओ) को भी भेजी गई है। ईंटभट्‌टा। वन सीमाओं के आसपास 250 मीटर का बफर जोन पर्यावरण और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए तय किया गया है। ईंट-भट्टों से निकलने वाला धुआं और महीन धूल कण (पार्टिकुलेट मैटर) जंगल की हवा को प्रदूषित करते हैं। इससे पेड़ों की बढ़वार प्रभावित होती है। भट्टों की चिमनियों से निकलने वाली गर्मी और लगातार शोर वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास में खलल डालते हैं। इससे जंगली जानवर अपने क्षेत्र से बाहर निकलकर रिहायशी इलाकों की ओर रुख करते हैं। ईंट निर्माण में आसपास की उपजाऊ ऊपरी मिट्टी का उपयोग होता है। इससे वन क्षेत्र से सटी जमीन की गुणवत्ता घटती है। भूमि बंजर होने लगती है। भट्टों से आग का खतरा बढ़ता है। मानवीय गतिविधियां बढ़ती हैं। ये इन्हीं कारणों से राष्ट्रीय हरित अधिकरण और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वन क्षेत्रों के आसपास बफर जोन अनिवार्य किया है।

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