बढ़ती महंगाई और युद्ध के खिलाफ भाकपा-माले का फूटा गुस्सा:बिहार शरीफ में निकाला ‘शांति मार्च’, सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की

बढ़ती महंगाई और युद्ध के खिलाफ भाकपा-माले का फूटा गुस्सा:बिहार शरीफ में निकाला ‘शांति मार्च’, सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की

देश में बेलगाम होती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते युद्ध के संकट को लेकर मंगलवार को नालंदा जिला मुख्यालय स्थित बिहार शरीफ की सड़कें विरोध के नारों से गूंज उठीं। भाकपा-माले (CPIML) के कार्यकर्ताओं ने ‘युद्ध विरोधी शांति मार्च’ के बैनर तले एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पार्टी के सदस्य शामिल हुए। हाथों में लाल झंडे और शांति की अपील वाले पोस्टर लिए कार्यकर्ताओं ने शहर के मुख्य मार्गों का भ्रमण करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिला सचिव ने केंद्र की मोदी सरकार पर उठाए सवाल प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला सचिव नवल किशोर ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल का आपराधिक साम्राज्यवादी गठजोड़ दुनिया भर में अशांति फैला रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम जनता की जेब पर भी पड़ रहा है। साव ने कड़े शब्दों में कहा कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ साठगांठ कर रही है, लेकिन इसका असली खामियाजा देश का गरीब और मध्यम वर्ग भुगत रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में लगी आग ने बाजार की कमर तोड़ दी है और जब तेल महंगा होता है, तो माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे बाजार की हर जरूरी वस्तु के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। सरकार पर पुरानी वादाखिलाफी का आरोप भी लगाया महंगाई के साथ-साथ पार्टी ने सरकार पर पुरानी वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया। किशोर साव ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने गरीबों को जमीन देने और दो-दो लाख रुपए की आर्थिक मदद पहुंचाने का जो भरोसा दिलाया था, वह आज तक हकीकत नहीं बन सका है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ईरान और अन्य देशों के खिलाफ जारी युद्ध पर तत्काल रोक लगाई जाए और अमेरिका-इजराइल के हस्तक्षेप को बंद किया जाए। साथ ही, उन्होंने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने और गरीबों को जमीन व वित्तीय सहायता के वादों को तुरंत पूरा करने की मांग दोहराई। मार्च के समापन पर कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द ही राहतकारी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में इस जन-आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा। देश में बेलगाम होती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहराते युद्ध के संकट को लेकर मंगलवार को नालंदा जिला मुख्यालय स्थित बिहार शरीफ की सड़कें विरोध के नारों से गूंज उठीं। भाकपा-माले (CPIML) के कार्यकर्ताओं ने ‘युद्ध विरोधी शांति मार्च’ के बैनर तले एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और पार्टी के सदस्य शामिल हुए। हाथों में लाल झंडे और शांति की अपील वाले पोस्टर लिए कार्यकर्ताओं ने शहर के मुख्य मार्गों का भ्रमण करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। जिला सचिव ने केंद्र की मोदी सरकार पर उठाए सवाल प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे जिला सचिव नवल किशोर ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए अमेरिका के साथ बढ़ती नजदीकियों पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजराइल का आपराधिक साम्राज्यवादी गठजोड़ दुनिया भर में अशांति फैला रहा है, जिसका सीधा और नकारात्मक असर भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम जनता की जेब पर भी पड़ रहा है। साव ने कड़े शब्दों में कहा कि मोदी सरकार अमेरिका के साथ साठगांठ कर रही है, लेकिन इसका असली खामियाजा देश का गरीब और मध्यम वर्ग भुगत रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि युद्ध की वजह से तेल की कीमतों में लगी आग ने बाजार की कमर तोड़ दी है और जब तेल महंगा होता है, तो माल ढुलाई महंगी हो जाती है, जिससे बाजार की हर जरूरी वस्तु के दाम बढ़ना स्वाभाविक है। सरकार पर पुरानी वादाखिलाफी का आरोप भी लगाया महंगाई के साथ-साथ पार्टी ने सरकार पर पुरानी वादाखिलाफी का भी आरोप लगाया। किशोर साव ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार ने गरीबों को जमीन देने और दो-दो लाख रुपए की आर्थिक मदद पहुंचाने का जो भरोसा दिलाया था, वह आज तक हकीकत नहीं बन सका है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि ईरान और अन्य देशों के खिलाफ जारी युद्ध पर तत्काल रोक लगाई जाए और अमेरिका-इजराइल के हस्तक्षेप को बंद किया जाए। साथ ही, उन्होंने बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने और गरीबों को जमीन व वित्तीय सहायता के वादों को तुरंत पूरा करने की मांग दोहराई। मार्च के समापन पर कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट कर दिया कि यदि सरकार ने जल्द ही राहतकारी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में इस जन-आंदोलन को और अधिक तेज किया जाएगा।  

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