ईरान के साथ जंग छिड़ी तो इजराइल में सब कुछ बदल गया। अदालतें भी बंद हो गईं, या यूं कहें कि सिर्फ जरूरी मामलों तक सिमट गईं।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ चल रहा भ्रष्टाचार का मुकदमा भी हफ्तों से ठप था। लेकिन अब इमरजेंसी हट गई है और रविवार को फिर से कोर्ट में सुनवाई होगी। इस दौरान नेतन्याहू अदालत में पेश हो सकते हैं।
क्या है पूरा मामला?
नेतन्याहू पर तीन बड़े भ्रष्टाचार के केस हैं जिन्हें केस 1000, केस 2000 और केस 4000 के नाम से जाना जाता है। 2019 में उन पर चार्जशीट दाखिल हुई थी। उन्होंने हर आरोप से इनकार किया है और खुद को बेगुनाह बताया है।
दिसंबर 2024 में कुछ खास हुआ। नेतन्याहू खुद अदालत में गवाही देने के लिए खड़े हुए। ऐसा करने वाले वे इजराइल के पहले बैठे हुए प्रधानमंत्री बने। यानी देश चलाते हुए कटघरे में खड़े होना पड़ा।
अभी मुकदमा किस मोड़ पर है?
जून 2025 में सरकारी वकीलों ने नेतन्याहू से जिरह शुरू की थी। इससे पहले बचाव पक्ष के वकील महीनों तक उनसे सीधे सवाल पूछते रहे थे। जब जंग की वजह से अदालत बंद हुई, तब सुनवाई केस 4000 पर केंद्रित थी जिसे बेज़ेक-वाल्ला मामला कहते हैं।
यह तीनों में सबसे गंभीर केस माना जाता है क्योंकि इसमें रिश्वतखोरी के आरोप हैं। सरकारी वकीलों ने नेतन्याहू से बेज़ेक और येस के विलय, कारोबारी शौल एलोविच से उनके संबंधों और एक कथित बैठक के बारे में सवाल पूछे थे जिसे नेतन्याहू ने सिरे से नकार दिया।
रविवार को क्या होगा?
यरुशलम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में सुबह साढ़े नौ बजे सुनवाई होगी। इस बार बचाव पक्ष का एक गवाह अपनी बात रखेगा। सोमवार से बुधवार तक की सुनवाई तेल अवीव डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में होगी।
न्याय मंत्रालय ने जो इमरजेंसी व्यवस्था लागू की थी, उसके तहत सिर्फ जरूरी मामलों पर ही सुनवाई हो रही थी। वह व्यवस्था गुरुवार को खत्म हो गई और अब अदालतें सामान्य ढर्रे पर लौट रही हैं।
यह मुकदमा इतना अहम क्यों है?
इजराइल की राजनीति में नेतन्याहू का मुकदमा एक लंबी लड़ाई की तरह चल रहा है। बार-बार देरी हुई, कभी राजनीतिक उठापटक की वजह से, कभी जंग की वजह से। लेकिन हर बार मुकदमा रुकने के बाद फिर शुरू भी हुआ।
एक तरफ देश युद्ध में है, दूसरी तरफ उसके प्रधानमंत्री कोर्ट में जवाब दे रहे हैं। यही वजह है कि दुनियाभर की नजरें इस मुकदमे पर टिकी हैं।


