Court News: बाड़मेर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फतेह खान को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

Court News: बाड़मेर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फतेह खान को बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़मेर जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष फतेह खान को राहत देते हुए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने मामले में राज्य सरकार व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी किए हैं।

न्यायाधीश मुन्नुरी लक्ष्मण की एकल पीठ ने यह आदेश फतेह खान की ओर से दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विशाल शर्मा ने पैरवी की। याचिका में बाड़मेर के कोतवाली थाने में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई है। यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता की धारा 197(1)(डी) के तहत दर्ज की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक कथित भाषण के जरिए राष्ट्रीय एकता के प्रतिकूल टिप्पणी की गई।

कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर दलीलों को स्वीकारा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि यह शिकायत एक अधिवक्ता की ओर से दर्ज कराई गई है और जिस भाषण का उल्लेख किया गया है, उसके कथित आरोप धारा 197 के तहत कोई अपराध नहीं बनाते। कोर्ट ने प्रारंभिक तौर पर दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया आरोपित अपराध बनता हुआ प्रतीत नहीं होता। ऐसे में याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक लगाते हुए कहा कि एफआईआर के आधार पर जांच व अन्य कार्यवाही जारी रह सकेगी, ताकि यह तय किया जा सके कि मामले में अपराध के तत्व बनते हैं या नहीं।

वन भूमि पर अतिक्रमण मामला

इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जोधपुर के आसपास वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने और नए वन क्षेत्र के विकास की प्रस्तावित योजना पर स्थिति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रेल को निर्धारित की गई है।

न्यायाधीश विनित कुमार माथुर और न्यायाधीश चन्द्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद के तर्क सुने। महाधिवक्ता ने बताया कि विवादित वन क्षेत्र करीब 50 किलोमीटर लंबा है। समय के साथ इस क्षेत्र में कई आवासीय कॉलोनियां और जरूरतमंद लोगों के मकान बन गए हैं। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों पर अतिक्रमण हुआ है, उसके बराबर वन क्षेत्र विकसित करने की योजना पर सरकार विचार कर रही है और इसके लिए विस्तृत सर्वे भी कराया गया है।

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उन्होंने कहा कि जोधपुर के लोगों की पर्यावरणीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए शहर के आसपास वन क्षेत्र विकसित करना सरकार की जिम्मेदारी है। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि हाल ही जिस वन क्षेत्र के चारों ओर बाउंड्री वॉल बनाई गई है, उसे संरक्षित रखा जाएगा। यदि उसके बाद कोई नया अतिक्रमण हुआ है तो उसे कानून के अनुसार हटाया जाएगा। महाधिवक्ता ने बाउंड्री वॉल के भीतर अतिक्रमण हटाने की स्थिति रिपोर्ट और जोधपुर के आसपास प्रस्तावित वनीकरण योजना रिकॉर्ड पर पेश करने के लिए समय देने का आग्रह किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

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