दिल्ली के लाल किला में किया गया था कोर्ट मार्शल

दिल्ली के लाल किला में किया गया था कोर्ट मार्शल

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिंद फौज से जुड़कर भारत से सिंगापुर तक अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी एक मात्र सिविलियन थे जिनका दिल्ली के लाल किले में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा कोर्ट मार्शल किया गया था। महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी का जन्म पटना जिला के बख्तियारपुर में किसान परिवार में 22 मार्च 1906 को हुआ था। उनके पिता शिवटहल याजी किसान थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे छात्र जीवन में ही देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। 1922 के असहयोग आंदोलन में शामिल हुए आैर 1928 में भगत सिंह की नौजवान सभा से जुड़े। वहीं स्वामी सहजानंद के किसान आंदोलन में भी भाग लिया। 1937 में हुए चुनाव में बिहार धारा सभा के लिए निर्वाचित हुए। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंडित शीलभद्र याजी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के संपर्क में आए और आजाद हिंद फौज से जुड़ गए। आजादी की लड़ाई में कई बार शीलभद्र याजी जेल गए इस दौरान कई बार पकड़े गए। पटना कैम्प जेल, हजारीबाग जेल, मुंबई के आर्थर रोड जेल आैर पुणे के यरवदा जेल आदि में रखे गए। आजादी के बाद पंडित शीलभद्र याजी फार्वर्ड ब्लाक के अध्यक्ष रहे, वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर कांग्रेस से जुड़े और 13 वर्ष तक राज्यसभा सदस्य रहे। वे राजनीति के साथ विभिन्न संगठनों से जुड़े रहे। हिंदी और अंग्रेजी में लगभग दर्जन भर किताबें लिखी। वे आजीवन आमजनों के लिए सड़क से सदन तक आवाज उठाते रहे। देश के इस महान सपूत ने 28 जनवरी 1996 में अंतिम सांस ली। राजनीति में भ्रष्टाचार का पहला मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया राजनीति में भ्रष्टाचार को लेकर पहली बार‌ आवाज उठाने वाले पंडित शीलभद्र याजी ही थे जब वे 1967 में राज्यसभा चुनाव में विधायकों के क्रास वोटिंग के मामले को कोर्ट तक पहुंचाया था जब पार्टी के खिलाफ छह विधायकों ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे राजेन्द्र प्रसाद जैन के पक्ष में मतदान किया और जैन चुनाव जीत गए। पंडित शीलभद्र इस चुनाव में हुई धांधली को कोर्ट तक पहुंचाया और सुप्रीम कोर्ट ने राजेंद्र प्रसाद जैन के चुनाव को अयोग्य घोषित किया था। नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के आजाद हिंद फौज से जुड़कर भारत से सिंगापुर तक अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छुड़ाने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी एक मात्र सिविलियन थे जिनका दिल्ली के लाल किले में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा कोर्ट मार्शल किया गया था। महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित शीलभद्र याजी का जन्म पटना जिला के बख्तियारपुर में किसान परिवार में 22 मार्च 1906 को हुआ था। उनके पिता शिवटहल याजी किसान थे। महात्मा गांधी के आह्वान पर वे छात्र जीवन में ही देश में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। 1922 के असहयोग आंदोलन में शामिल हुए आैर 1928 में भगत सिंह की नौजवान सभा से जुड़े। वहीं स्वामी सहजानंद के किसान आंदोलन में भी भाग लिया। 1937 में हुए चुनाव में बिहार धारा सभा के लिए निर्वाचित हुए। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पंडित शीलभद्र याजी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस के संपर्क में आए और आजाद हिंद फौज से जुड़ गए। आजादी की लड़ाई में कई बार शीलभद्र याजी जेल गए इस दौरान कई बार पकड़े गए। पटना कैम्प जेल, हजारीबाग जेल, मुंबई के आर्थर रोड जेल आैर पुणे के यरवदा जेल आदि में रखे गए। आजादी के बाद पंडित शीलभद्र याजी फार्वर्ड ब्लाक के अध्यक्ष रहे, वहीं पंडित जवाहरलाल नेहरू के अनुरोध पर कांग्रेस से जुड़े और 13 वर्ष तक राज्यसभा सदस्य रहे। वे राजनीति के साथ विभिन्न संगठनों से जुड़े रहे। हिंदी और अंग्रेजी में लगभग दर्जन भर किताबें लिखी। वे आजीवन आमजनों के लिए सड़क से सदन तक आवाज उठाते रहे। देश के इस महान सपूत ने 28 जनवरी 1996 में अंतिम सांस ली। राजनीति में भ्रष्टाचार का पहला मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया राजनीति में भ्रष्टाचार को लेकर पहली बार‌ आवाज उठाने वाले पंडित शीलभद्र याजी ही थे जब वे 1967 में राज्यसभा चुनाव में विधायकों के क्रास वोटिंग के मामले को कोर्ट तक पहुंचाया था जब पार्टी के खिलाफ छह विधायकों ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ रहे राजेन्द्र प्रसाद जैन के पक्ष में मतदान किया और जैन चुनाव जीत गए। पंडित शीलभद्र इस चुनाव में हुई धांधली को कोर्ट तक पहुंचाया और सुप्रीम कोर्ट ने राजेंद्र प्रसाद जैन के चुनाव को अयोग्य घोषित किया था।  

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