विधान परिषद सदस्य श्री चंद ने सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी में मौजूद कुछ खामियों के कारण ही अदालत को हस्तक्षेप करना पड़ा था और कुछ फैसलों पर रोक लगाई गई थी। श्री चंद ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि यूजीसी की कमियों के चलते न्यायालय को आदेशों पर रोक लगानी पड़ी, ताकि व्यवस्था को दुरुस्त किया जा सके। उन्होंने जानकारी दी कि अब शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को धन्यवाद पत्र भी प्राप्त हुए हैं। ये पत्र वित्तीयविहीन विद्यालय प्रबंधक महासभा, एंटी-करप्शन विरोग, उमेश भारत, प्राथमिक वित्तीयविहीन शिक्षक महासभा, भाजपा, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ और राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश की ओर से भेजे गए हैं।
शिक्षकों को सरकार का अभिन्न अंग बताते हुए श्री चंद ने कहा कि सरकार अपने तंत्र के माध्यम से ही कार्यों को संपादित कराती है और शिक्षक उसी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि निष्पक्ष भाव से कार्य करने में शिक्षकों से बेहतर कोई वर्ग नहीं हो सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के पास शिक्षकों के अलावा और कौन सा ऐसा वर्ग है, जिससे कार्य नहीं लिया जा रहा। प्रेस वार्ता के दौरान वित्तीयविहीन शिक्षकों को आयुष्मान कार्ड की सुविधा दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया, जिस पर श्री चंद ने अपना समर्थन जताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयुष्मान कार्ड के लिए एक निश्चित मानक और दायरा तय है। इसके तहत वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गरीबी रेखा से नीचे आने वाले लोगों को ही यह सुविधा मिलती थी। उन्होंने बताया कि वित्तीयविहीन शिक्षक इस दायरे में नहीं आ रहे थे, इसी कारण उन्हें पहले यह लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया 6 फरवरी तक की है, आगे की स्थिति पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।


