पटना नगर निगम की डिप्टी मेयर रेशमी चंद्रवंशी ने मेयर सीता साहू और नगर आयुक्त यशपाल मीणा को लेटर लिखा है। इस पत्र में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में पार्षद योजना 4.0 की राशि को आवंटित करवाने की बात कही गई है। इस योजना के अंतर्गत सभी 75 वार्ड पार्षद को विकास कार्य के लिए 1 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। मगर इस बार वित्तीय वर्ष के 9 महीने बीत जाने के बावजूद भी अभी तक पैसे नहीं मिले हैं, जिसके कारण वार्ड पार्षद अपना काम सही से नहीं कर पा रहे हैं। डिप्टी मेयर ने मेयर को पत्र लिखते हुए इस पर प्राथमिकता से ध्यान देने की बात की है और नगर आयुक्त को अविलंब कार्रवाई का निर्देश दिया है। हमें अपने वार्ड की जनता को जवाब देना है- वार्ड पार्षद वार्ड पार्षद डॉ इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के रनिंग योजना के अंतर्गत वार्ड पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपए आवंटित करने थे। इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पिछले 4 सालों से पार्षदों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक करोड़ का फंड मिलते आ रहा है। अब तक इस फाइनेंशियल ईयर के 9 महीने बीत गए हैं, लेकिन हमें पैसे नहीं मिले हैं। मेयर की ओर से भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। यह बहुत ही चिंता का विषय है, क्योंकि जिस वार्ड से पार्षद जीतकर आते है, वहां की जनता को उन्हें जवाब देना होता है। छोटे-मोटे सड़कों का निर्माण, नालों का निर्माण, कम्युनिटी हॉल या फिर बच्चों के लिए ग्राउंड बनाने जैसी आधारभूत संरचना, इन पैसों की मदद से अपने क्षेत्र में हम लोग करते थे। ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं पार्षद डॉ इंद्रदीप चंद्रवंशी ने आगे कहा कि पिछले 1 वर्षों से जो पटना नगर निगम का कल्चर हो गया है, उससे यही दिख रहा है कि मेयर का ध्यान काम पर नहीं है। हर साल निगम के बजटीय प्रावधान में ही यह चीज होती है, मगर शायद मेयर को यह लग रहा है कि उन्हें अपने पॉकेट से पैसा देना होगा। यह पब्लिक का पैसा है और पब्लिक के लिए खर्च करना है। शहर के लोग और पार्षद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 4 महीने पहले भी डिप्टी मेयर ने इस पर संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। वार्ड पार्षदों का कहना है कि अब सिर्फ 3 महीने बचे हैं और कई काम होते हैं जैसे कि एस्टीमेट बनाना, योजनाओं का चयन करना, अनुशंसा करना, प्रशासनिक स्वीकृति लेना, टेंडर होने जैसी प्रक्रिया में काफी समय लगता है। इसके कारण सभी काम अब पेंडिंग पड़े हुए हैं। पटना नगर निगम की डिप्टी मेयर रेशमी चंद्रवंशी ने मेयर सीता साहू और नगर आयुक्त यशपाल मीणा को लेटर लिखा है। इस पत्र में वित्तीय वर्ष 2025-26 के बजट में पार्षद योजना 4.0 की राशि को आवंटित करवाने की बात कही गई है। इस योजना के अंतर्गत सभी 75 वार्ड पार्षद को विकास कार्य के लिए 1 करोड़ रुपए दिए जाते हैं। मगर इस बार वित्तीय वर्ष के 9 महीने बीत जाने के बावजूद भी अभी तक पैसे नहीं मिले हैं, जिसके कारण वार्ड पार्षद अपना काम सही से नहीं कर पा रहे हैं। डिप्टी मेयर ने मेयर को पत्र लिखते हुए इस पर प्राथमिकता से ध्यान देने की बात की है और नगर आयुक्त को अविलंब कार्रवाई का निर्देश दिया है। हमें अपने वार्ड की जनता को जवाब देना है- वार्ड पार्षद वार्ड पार्षद डॉ इंद्रदीप चंद्रवंशी ने कहा कि फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के रनिंग योजना के अंतर्गत वार्ड पार्षदों को विकास कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपए आवंटित करने थे। इस दिशा में अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। पिछले 4 सालों से पार्षदों को अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक करोड़ का फंड मिलते आ रहा है। अब तक इस फाइनेंशियल ईयर के 9 महीने बीत गए हैं, लेकिन हमें पैसे नहीं मिले हैं। मेयर की ओर से भी इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। यह बहुत ही चिंता का विषय है, क्योंकि जिस वार्ड से पार्षद जीतकर आते है, वहां की जनता को उन्हें जवाब देना होता है। छोटे-मोटे सड़कों का निर्माण, नालों का निर्माण, कम्युनिटी हॉल या फिर बच्चों के लिए ग्राउंड बनाने जैसी आधारभूत संरचना, इन पैसों की मदद से अपने क्षेत्र में हम लोग करते थे। ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं पार्षद डॉ इंद्रदीप चंद्रवंशी ने आगे कहा कि पिछले 1 वर्षों से जो पटना नगर निगम का कल्चर हो गया है, उससे यही दिख रहा है कि मेयर का ध्यान काम पर नहीं है। हर साल निगम के बजटीय प्रावधान में ही यह चीज होती है, मगर शायद मेयर को यह लग रहा है कि उन्हें अपने पॉकेट से पैसा देना होगा। यह पब्लिक का पैसा है और पब्लिक के लिए खर्च करना है। शहर के लोग और पार्षद ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। 4 महीने पहले भी डिप्टी मेयर ने इस पर संज्ञान लेते हुए नगर आयुक्त को पत्र लिखा था, लेकिन अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया है। वार्ड पार्षदों का कहना है कि अब सिर्फ 3 महीने बचे हैं और कई काम होते हैं जैसे कि एस्टीमेट बनाना, योजनाओं का चयन करना, अनुशंसा करना, प्रशासनिक स्वीकृति लेना, टेंडर होने जैसी प्रक्रिया में काफी समय लगता है। इसके कारण सभी काम अब पेंडिंग पड़े हुए हैं।


