चंगाई की आड़ में आदिवासियों का धर्मांतरण‎:बीमारी दूर करने का दावा कर आदिवासियों को बना रहे ईसाई

चंगाई की आड़ में आदिवासियों का धर्मांतरण‎:बीमारी दूर करने का दावा कर आदिवासियों को बना रहे ईसाई

गुना के मोहनपुर खुर्द में भील-आदिवासी समाज को प्रार्थना से बीमारियां दूर करने का झांसा देकर ईसाई धर्म से जोड़ने का मामला सामने आया है। मिशनरी से जुड़े लोग इसे धर्म नहीं बल्कि मन परिवर्तन का नाम देकर हर रविवार प्रार्थना सभाएं आयोजित कर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार प्रार्थना में जाने वालों ने मंदिरों से दूरी बना ली है और वे हिंदू धार्मिक आयोजनों का प्रसाद तक नहीं खाते हैं। हाल ही में ईस्टर पर 400 लोगों के लिए बकरे और मुर्गे की दावत रखी गई थी, जहां पास्टर उत्तम बारेला ने सिर पर हाथ रखकर बीमारी ठीक करने का दावा किया। वीडियो वायरल होते ही मिशनरी सदस्य गिरजाघर पर ताला लगाकर गायब हो गए। हिंदू संगठनों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। गौरतलब है कि यहां मिशनरियां दो दशक से सक्रिय हैं। 2017 में भी प्रशासन ने आदिवासियों की जमीन पर बने पक्के भवन को सील कर दो गिरजाघरों पर तालाबंदी की थी। वर्ष 2000 से ही बमौरी ब्लॉक के ट्राइबल बेल्ट में धर्मांतरण के प्रयास चल रहे हैं, जिसके विरोध में आरएसएस और हिंदू संगठनों ने पूर्व में बड़ा अभियान चलाया था। ग्रामीणों का दावा है कि डॉक्टरों से आराम न मिलने पर उन्हें यीशु की प्रार्थना से चंगाई मिली, जबकि हिंदू संगठनों का आरोप है कि यह अंधविश्वास फैलाकर किया जा रहा प्रलोभन है। गांव के युवा ही बन गए पास्टर, मिशनरियों का पुराना जाल
मोहनपुर में ईसाई मिशनरियों की गतिविधियां 25 साल से अधिक पुरानी हैं। मिशनरियों ने गांव के ही कई बच्चों को अपने हॉस्टलों में भेजकर शिक्षित किया और अब उन्हें पास्टर के रूप में तैयार कर दिया है। ये युवा अब खुद प्रार्थना सभाएं कराते हैं और आदिवासियों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित कर रहे हैं। मिशनरी से जुड़े उत्तम बारेला का दावा है कि प्रार्थना से नशे और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। 2017 में भी हुई थी कार्रवाई, सील किए गए थे गिरजाघर
धर्मांतरण का यह खेल नया नहीं है। 9 साल पहले भी मोहनपुर में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए आदिवासियों के लिए आरक्षित जमीन पर बने अवैध प्रार्थना भवन को सील किया था। लंबे समय तक चले विरोध और कानूनी लड़ाई के बाद प्रशासन ने तब दो गिरजाघरों में ताले डलवा दिए थे। इतने वर्षों बाद अब फिर से उसी पुराने पैटर्न पर भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाने का काम शुरू हो गया है। इस मामले में मेरी गुना पुलिस अधीक्षक से चर्चा हुई है। वह पूरे मामले की जांच करा रही हैं। जांच रिपोर्ट आने और फरियादी के सामने आने पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाएगी।’ – किशोर कन्याल, कलेक्टर

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