चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम (Chepauk Stadium) में न्यूजीलैंड बनाम अफगानिस्तान टी20 वर्ल्ड कप मैच के दौरान दर्शकों को सीटी लेकर प्रवेश से रोक दिया गया। चेपॉक की “व्हिसल पोडु” संस्कृति से जुड़े इस फैसले ने राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है, जिसमें टीवीके ने राज्य सरकार पर आरोप लगाए हैं।
क्या है Chepauk Stadium में सीटी पर प्रतिबंध का मामला?
मैच के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने दर्शकों को सीटी लेकर स्टेडियम में प्रवेश करने से रोक दिया। चेपॉक में सीटी बजाना वर्षों से क्रिकेट फैंस की परंपरा रही है, जिससे चेन्नई सुपर किंग्स की “व्हिसल पोडु” संस्कृति जुड़ी है। इस बार सीटी पर रोक को अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के चुनाव चिन्ह से जोड़कर देखा जा रहा है। टीवीके के उप महासचिव राज मोहन ने कोयंबत्तूर में कहा कि जब से टीवीके को चुनाव चिन्ह के रूप में सीटी मिली है, डीएमके सरकार डर गई है और प्रशंसकों को सीटी लाने से जानबूझकर रोका गया है।
चेन्नई पुलिस ने पहले सुरक्षा कारणों का हवाला देकर सीटी पर प्रतिबंध का समर्थन किया, लेकिन बाद में पुलिस और तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन ने किसी भी आधिकारिक रोक से इनकार किया। दोनों संस्थाओं ने स्पष्ट किया कि दर्शकों के दिशा-निर्देशों में सीटी पर कोई प्रतिबंध नहीं था। इसके बावजूद, कुछ दर्शकों ने बताया कि प्रवेश द्वार पर उनकी सीटी जब्त कर ली गई, जबकि कुछ दर्शक स्टेडियम के अंदर सीटी बजाते दिखे।
शिवगंगा में सफाई कर्मचारियों के लिए भी सीटी पर रोक
शिवगंगा के वार्ड 21 के पार्षद अयूब खान ने सफाई कर्मचारियों को कचरा एकत्र करते समय सीटी बजाने से रोक दिया है। अब कर्मचारियों को छोटे माइक्रोफोन और स्पीकर उपकरण देकर सार्वजनिक घोषणाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। पार्षद ने बताया कि यह कदम बड़े शहरों की तर्ज पर उठाया गया है, ताकि सफाई जागरूकता गीत प्रसारित किए जा सकें। हालांकि, कुछ निवासियों ने आगामी विधानसभा चुनाव और टीवीके के चुनाव चिन्ह को लेकर इस प्रतिबंध को राजनीतिक रंग देने की बात कही है।
विवाद के राजनीतिक और सांस्कृतिक पहलू
टीवीके के राष्ट्रीय प्रवक्ता फेलिक्स जेराल्ड ने पुलिस के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि सीटी चेन्नई क्रिकेट संस्कृति का हिस्सा है और यह प्रतिबंध सरकार की राजनीतिक असुरक्षा को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जनता की राजनीतिक इच्छा को दबा नहीं सकती। इस विवाद ने एक साधारण स्टेडियम नियम को चुनावी मुद्दा बना दिया है, जिसमें सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं।



