अलीगढ़ में कन्नड़ फिल्म ‘केडी: द डेविल’ पर विवाद शुरू हो गया है। फिल्म में अभिनेत्री नोरा फतेही और संजय दत्त के दृश्यों को लेकर समाज में बढ़ते विरोध के बीच उत्तर प्रदेश के शाही चीफ मुफ्ती मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने फतवा जारी किया है। मुफ्ती ने फिल्म में परोसी जा रही कथित अश्लीलता को गुनाह-ए-कबीरा (बड़ा पाप) करार देते हुए समाज और युवाओं के लिए इसे घातक बताया है। NCW के नोटिस के बाद अब धार्मिक घेराबंदी हाल ही में राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) द्वारा फिल्म की टीम और नोरा फतेही को नोटिस जारी किए जाने के बाद अब मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ्ता ने भी मोर्चा खोल दिया है। शाही मुफ्ती ने स्पष्ट किया कि समाज में बेहयाई फैलाना न केवल अनैतिक है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से भी दंडनीय है। ‘कुरान में ऐसे लोगों के लिए दर्दनाक अज़ाब’ शाही चीफ मुफ्ती द्वारा जारी फतवा में शरीयत के हवाले से कई गंभीर बातें कही गई हैं। उन्होंने कहा कि अश्लील गाने, नृत्य और आपत्तिजनक दृश्यों में भाग लेना या उन्हें बढ़ावा देना इस्लाम में हराम और गुनाह-ए-कबीरा है। बेहयाई फैलाने पर मिलता है कठोर दंड मुफ्ती ने कुरान शरीफ की सूरह नूर (24:19) का जिक्र करते हुए कहा कि जो लोग समाज में बेहयाई फैलाते हैं, उनके लिए दुनिया और आखिरत में दर्दनाक अजाब (कठोर दंड) की चेतावनी दी गई है। इसलिए समाज में अश्लीलता परोसने से बचना चाहिए। मुफ्ती ने कहा कि नोरा फतेही एक मुस्लिम पृष्ठभूमि से आती हैं, ऐसे में उनका इस तरह के कंटेंट का हिस्सा बनना इस्लामी शिक्षाओं के पूरी तरह खिलाफ है। वूमेंस डे के संदेश का अपमान मौलाना इफराहीम हुसैन ने कहा कि एक तरफ देश ने अभी महिला दिवस मनाया, जहां महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और हया (मर्यादा) की बात की गई। वहीं दूसरी ओर ऐसी फिल्में समाज के सामने परोसी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर यही स्थिति रही, तो आने वाली नस्लें और नौजवानों की सामाजिक मर्यादा ही खत्म हो जाएगा। सरकार उठाए सख्त कदम मुफ्ती ने कहा कि कलाकार केवल वही कंटेंट पेश करें जो मर्यादित और समाजहित में हो। अश्लीलता पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन और सरकार सख्त कदम उठाने चाहिए। जनता भी ऐसे कंटेंट का पूरी तरह बहिष्कार करे और अपने बच्चों को इस अनैतिकता से सुरक्षित रखें।


