सुपौल नगर परिषद के सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सोमवार को शहर का माहौल गरमा गया। बड़ी संख्या में नगर परिषद के कर्मचारी, सफाईकर्मी और पदाधिकारी मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा के आवास पर जुट गए और घटना के खिलाफ तीखा आक्रोश जताया। इसके बाद कर्मियों ने नगर परिषद कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने भी कहा कि यदि जल्द इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो नगर परिषद सुपौल के बैनर तले बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार विवाद नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 22 में नाला निर्माण और सड़क की सफाई कार्य के दौरान शुरू हुआ। नगर परिषद की ओर से ईद के मद्देनजर ईदगाह जाने वाले नमाजियों के मुख्य मार्ग की सफाई और नाला निर्माण कराया जा रहा था, ताकि त्योहार के समय लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो। जेसीबी ऑपरेटर व सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा का आरोप है कि इसी दौरान अबू बकर नामक एक व्यक्ति, जो खुद को अधिवक्ता बताता है, मौके पर पहुंचा और जेसीबी ऑपरेटर व सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति ने कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया। मुख्य पार्षद के अनुसार घटना की जानकारी मिलने के बाद सफाईकर्मियों ने उन्हें फोन कर पूरी बात बताई। इसके बाद उन्होंने कर्मियों को सदर थाना में लिखित आवेदन देने की सलाह दी और स्वयं भी थाना प्रभारी से फोन पर बात कर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईद का पर्व नजदीक होने के कारण प्रशासन से मामले को समझदारी से सुलझाने का अनुरोध किया गया था। पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, कर्मियों में आक्रोश हालांकि कर्मियों का आरोप है कि देर रात तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उनमें आक्रोश बढ़ गया। इसी नाराजगी के बीच कुछ कर्मियों ने विरोध स्वरूप सदर थाना गेट के पास आधा ट्रेलर कचरा गिरा दिया। यह घटना देर रात की बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने हस्तक्षेप करते हुए नगर परिषद कर्मचारियों को तत्काल कचरा हटाने का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर करीब 20 मिनट के भीतर कचरा हटाने का काम शुरू कर दिया गया और लगभग आधे घंटे में पूरे क्षेत्र की सफाई करा दी गई। पुलिस ने नगर परिषद के बड़ा बाबू समेत कई कर्मियों को पकड़ा इसके बावजूद विवाद थमा नहीं। आरोप है कि देर रात पुलिस दल-बल के साथ पहुंची और नगर परिषद के बड़ा बाबू अजद आलम समेत कई कर्मियों को पकड़ लिया। मुख्य पार्षद का आरोप है कि इस दौरान अजद आलम के साथ मारपीट भी की गई और उन्हें हाजत में बंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद कर्मियों में और ज्यादा आक्रोश फैल गया। राघवेंद्र झा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर वह रात करीब साढ़े 12 बजे सदर थाना पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से कर्मियों को छोड़ने की अपील की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के कई कर्मचारी पूरी रात थाने में बंद रहे, जिससे कर्मियों में भारी नाराजगी है। साजिश के तहत फंसाने की कोशिश,विवाद में घसीटा जा रहा वहीं दूसरी ओर अधिवक्ता मोहम्मद अबु बकर ने नगर परिषद कर्मियों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद से जुड़े एक मामले में उन्हें जिला लोक शिकायत पदाधिकारी के समक्ष स्पष्टीकरण देना है और उसी को लेकर उन्हें विवाद में घसीटा जा रहा है। अबु बकर का आरोप है कि शाम करीब सात बजे नगर परिषद के कुछ कर्मचारी उनके घर पहुंचे और उनके साथ गाली-गलौज की। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें वकील होने के बावजूद अपमानित किया गया और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई। इस संबंध में उन्होंने भी सदर थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। इधर सदर थाना के थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और कुछ लोगों को डिटेन किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। सुपौल नगर परिषद के सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सोमवार को शहर का माहौल गरमा गया। बड़ी संख्या में नगर परिषद के कर्मचारी, सफाईकर्मी और पदाधिकारी मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा के आवास पर जुट गए और घटना के खिलाफ तीखा आक्रोश जताया। इसके बाद कर्मियों ने नगर परिषद कार्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। न्याय नहीं मिला तो आंदोलन और तेज किया जाएगा प्रदर्शन कर रहे कर्मियों ने चेतावनी दी कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने भी कहा कि यदि जल्द इस मामले का समाधान नहीं हुआ तो नगर परिषद सुपौल के बैनर तले बड़ा आंदोलन किया जाएगा। जानकारी के अनुसार विवाद नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 22 में नाला निर्माण और सड़क की सफाई कार्य के दौरान शुरू हुआ। नगर परिषद की ओर से ईद के मद्देनजर ईदगाह जाने वाले नमाजियों के मुख्य मार्ग की सफाई और नाला निर्माण कराया जा रहा था, ताकि त्योहार के समय लोगों को आवागमन में किसी तरह की परेशानी न हो। जेसीबी ऑपरेटर व सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा का आरोप है कि इसी दौरान अबू बकर नामक एक व्यक्ति, जो खुद को अधिवक्ता बताता है, मौके पर पहुंचा और जेसीबी ऑपरेटर व सफाईकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने लगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त व्यक्ति ने कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज की और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उनका अपमान किया। मुख्य पार्षद के अनुसार घटना की जानकारी मिलने के बाद सफाईकर्मियों ने उन्हें फोन कर पूरी बात बताई। इसके बाद उन्होंने कर्मियों को सदर थाना में लिखित आवेदन देने की सलाह दी और स्वयं भी थाना प्रभारी से फोन पर बात कर मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ईद का पर्व नजदीक होने के कारण प्रशासन से मामले को समझदारी से सुलझाने का अनुरोध किया गया था। पुलिस ने नहीं की कार्रवाई, कर्मियों में आक्रोश हालांकि कर्मियों का आरोप है कि देर रात तक पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उनमें आक्रोश बढ़ गया। इसी नाराजगी के बीच कुछ कर्मियों ने विरोध स्वरूप सदर थाना गेट के पास आधा ट्रेलर कचरा गिरा दिया। यह घटना देर रात की बताई जा रही है। घटना की जानकारी मिलते ही मुख्य पार्षद राघवेंद्र झा ने हस्तक्षेप करते हुए नगर परिषद कर्मचारियों को तत्काल कचरा हटाने का निर्देश दिया। उनके निर्देश पर करीब 20 मिनट के भीतर कचरा हटाने का काम शुरू कर दिया गया और लगभग आधे घंटे में पूरे क्षेत्र की सफाई करा दी गई। पुलिस ने नगर परिषद के बड़ा बाबू समेत कई कर्मियों को पकड़ा इसके बावजूद विवाद थमा नहीं। आरोप है कि देर रात पुलिस दल-बल के साथ पहुंची और नगर परिषद के बड़ा बाबू अजद आलम समेत कई कर्मियों को पकड़ लिया। मुख्य पार्षद का आरोप है कि इस दौरान अजद आलम के साथ मारपीट भी की गई और उन्हें हाजत में बंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद कर्मियों में और ज्यादा आक्रोश फैल गया। राघवेंद्र झा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने पर वह रात करीब साढ़े 12 बजे सदर थाना पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से कर्मियों को छोड़ने की अपील की, लेकिन उनकी बात नहीं मानी गई। उन्होंने कहा कि नगर परिषद के कई कर्मचारी पूरी रात थाने में बंद रहे, जिससे कर्मियों में भारी नाराजगी है। साजिश के तहत फंसाने की कोशिश,विवाद में घसीटा जा रहा वहीं दूसरी ओर अधिवक्ता मोहम्मद अबु बकर ने नगर परिषद कर्मियों के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं और उन्हें साजिश के तहत फंसाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद से जुड़े एक मामले में उन्हें जिला लोक शिकायत पदाधिकारी के समक्ष स्पष्टीकरण देना है और उसी को लेकर उन्हें विवाद में घसीटा जा रहा है। अबु बकर का आरोप है कि शाम करीब सात बजे नगर परिषद के कुछ कर्मचारी उनके घर पहुंचे और उनके साथ गाली-गलौज की। उन्होंने कहा कि इस दौरान उन्हें वकील होने के बावजूद अपमानित किया गया और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई गई। इस संबंध में उन्होंने भी सदर थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है। इधर सदर थाना के थानाध्यक्ष रामसेवक रावत ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और कुछ लोगों को डिटेन किया गया है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


