शिवहर में ज्वेलर्स एसोसिएशन का विवादित फैसला:नकाब-हिजाब पर प्रतिबंध; अधिवक्ता नवनीत झा ने कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

शिवहर में ज्वेलर्स एसोसिएशन का विवादित फैसला:नकाब-हिजाब पर प्रतिबंध; अधिवक्ता नवनीत झा ने कानूनी कार्रवाई की दी चेतावनी

उत्तर प्रदेश के झांसी के बाद अब बिहार में ज्वेलर्स एसोसिएशन के एक फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने बुधवार, 7 जनवरी को यह निर्णय लिया कि जो ग्राहक अपने चेहरे को नकाब, हिजाब, घूंघट, हेलमेट या पगड़ी से ढककर ज्वेलरी दुकानों में प्रवेश करेंगे, उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस फैसले के बाद विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं। शिवहर विधानसभा से पूर्व राजद प्रत्याशी और सुप्रीम कोर्ट के वकील नवनीत कुमार झा ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। दोनों धर्मों की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर हमला नवनीत कुमार ने इसे सीधे तौर पर हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि हिजाब, नकाब और घूंघट भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराएं हैं, जबकि पगड़ी सिख धर्म से जुड़ा एक सम्मानित प्रतीक है। नवनीत कुमार झा के अनुसार, सुरक्षा के नाम पर उठाया गया यह कदम गैरकानूनी है और समाज में धर्म आधारित भेदभाव को बढ़ावा देता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संगठन इस निर्णय को लागू करता है, तो उसके खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता और भेदभाव रोधी कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न केवल संविधान का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (धर्म, जाति, स्थान आदि के आधार पर विवाद फैलाना) और धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कार्य) के तहत भी कानूनी चुनौती योग्य है। फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील नवनीत कुमार झा ने राज्य सरकार और ज्वेलर्स एसोसिएशन से तत्काल इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। उनका मानना है कि यह निर्णय समाज में विभाजन पैदा करने वाला और दोनों समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। वर्तमान में, इस फैसले को लेकर जिले और राज्य में दोनों समुदायों में चिंता और विरोध देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के झांसी के बाद अब बिहार में ज्वेलर्स एसोसिएशन के एक फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलचल बढ़ा दी है। बिहार ज्वेलर्स एसोसिएशन ने बुधवार, 7 जनवरी को यह निर्णय लिया कि जो ग्राहक अपने चेहरे को नकाब, हिजाब, घूंघट, हेलमेट या पगड़ी से ढककर ज्वेलरी दुकानों में प्रवेश करेंगे, उन्हें अंदर आने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस फैसले के बाद विरोध की आवाजें तेज हो गई हैं। शिवहर विधानसभा से पूर्व राजद प्रत्याशी और सुप्रीम कोर्ट के वकील नवनीत कुमार झा ने इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है। दोनों धर्मों की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान पर हमला नवनीत कुमार ने इसे सीधे तौर पर हिंदू और मुस्लिम दोनों धर्मों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि हिजाब, नकाब और घूंघट भारतीय संस्कृति की प्राचीन परंपराएं हैं, जबकि पगड़ी सिख धर्म से जुड़ा एक सम्मानित प्रतीक है। नवनीत कुमार झा के अनुसार, सुरक्षा के नाम पर उठाया गया यह कदम गैरकानूनी है और समाज में धर्म आधारित भेदभाव को बढ़ावा देता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संगठन इस निर्णय को लागू करता है, तो उसके खिलाफ धार्मिक स्वतंत्रता और भेदभाव रोधी कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई न केवल संविधान का उल्लंघन है, बल्कि भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (धर्म, जाति, स्थान आदि के आधार पर विवाद फैलाना) और धारा 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले कार्य) के तहत भी कानूनी चुनौती योग्य है। फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील नवनीत कुमार झा ने राज्य सरकार और ज्वेलर्स एसोसिएशन से तत्काल इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की। उनका मानना है कि यह निर्णय समाज में विभाजन पैदा करने वाला और दोनों समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। वर्तमान में, इस फैसले को लेकर जिले और राज्य में दोनों समुदायों में चिंता और विरोध देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक, सामाजिक और कानूनी प्रतिक्रिया और तेज होने की संभावना है।  

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